ट्रक चालक और मालिक बोले - भ्रष्ट तंत्र को पुनर्जीवित होने से अनावश्यक आर्थिक एवं मानसिक बोझ डालेगा 


एवीएस न्यूज..भोपाल


मध्यप्रदेश में बंद परिवहन चेकपोस्ट को दोबारा खोलने के न्यायालय के आदेश (अप्रैल 2026) ने ट्रांसपोर्ट जगत में खलबली मचा दी है। इस निर्णय पर ट्रक ऑपरेटर्स और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों ने गहरा रोष व्यक्त किया है, क्योंकि इसे भ्रष्टाचार और अवैध वसूली  के पुराने दौर की वापसी के रूप में देखा जा रहा है। जबलपुर हाईकोर्ट ने उन चेकपोस्टों को दोबारा स्थापित करने का आदेश दिया है, जिन्हें मध्य प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2024 को भ्रष्टाचार रोकने के लिए बंद कर दिया था। राज्य सरकार ने चेकपोस्ट बंद करने के बाद 45 'चेक पॉइंट्स' बनाए थे, जिन्हें लेकर भी लगातार शिकायतें आ रही थीं कि वे अवैध वसूली के केंद्र बन गए हैं। 


ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस, नई दिल्ली एवं आरटीओ एवं ट्रैफिक कमेटी के चेयरमैन, सीएल मुकाती का मानना है कि कि इससे सीमा पर गाड़ियों की लंबी कतारें, देरी और ड्राइवरों का शोषण फिर से शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पारदर्शी व्यवस्था का वादा किया था और गुजरात मॉडल लागू करने की बात कही थी, लेकिन अब कोर्ट के हस्तक्षेप से यह व्यवस्था वापस पटरी से उतरने की संभावना है।


 यह निर्णय  फिर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला प्रतीत होगा 
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष राजेंद कपूर ने कहाकि  मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग के पूर्व में बंद किए गए चेकपोस्टों को पुनः30 दिनों के भीतर खोलने के आदेश से पूरे ट्रांसपोर्ट समुदाय में गहरा आक्रोश एवं चिंता व्याप्त है।

यह निर्णय न केवल पूर्व में किए गए सुधारात्मक प्रयासों को कमजोर करता है, बल्कि एक बार फिर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला प्रतीत होता है। पूर्व में इन चेकपोस्टों के माध्यम से खुलेआम करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार होता था। कई मामलों में अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ा गया तथा उनके कब्जे से करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्ति एवं नकदी बरामद हुई थी।

इन्हीं गंभीर परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी  एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल पर इन चेकपोस्टों को बंद किया गया था, जिससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बड़ी राहत मिली थी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगा था। मगर अब पुनः चेकपोस्ट खोलने का निर्णय न केवल उसी भ्रष्ट तंत्र को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि ट्रक मालिकों, ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों एवं चालकों पर अनावश्यक आर्थिक एवं मानसिक बोझ भी डालेगा।  


 

आदेश वापस नहीं लिया तो देशभर में ट्रांसपोर्टर करेंगे विरोध प्रदर्शन 
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के हरीष डाबर ने कहाकि हमारी संस्था इस निर्णय का कड़ा विरोध करती है। यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो देशभर के ट्रांसपोर्टर संगठित होकर व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। हम केंद्र एवं राज्य सरकार से आग्रह करते हैं कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर के हितों, पारदर्शिता एवं सुशासन को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले किसी भी कदम से बचा जाए।