मंडी बोर्ड एमडी ने दिए फर्जी दस्तावेजों पर हो रहे परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश
ग्वालियर-चंबल, सागर, जबलपुर संभाग में मंडी शुल्क का सर्वाधिक अपवंचन
एवीएस न्यूज.भोपाल
कुछ व्यापारियों एवं परिवहनकर्ताओं द्वारा अधिसूचित कृषि उपज, मूंगफली का अवैध परिवहन किया जा रहा है। कृषि उपज पर देय मंडी शुल्क का अपवंचन किया जा रहा है। इतना ही कुछ व्यापारियों द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर (फर्जी) जैसे -बिल, बिल्टी, अनुज्ञापत्र आदि के माध्यम से कृषि उपज का अवैध परिवहन किया जा रहा है । इस अवैध परिवहन से मंडी शुल्क की चोरी हो रही है, जिससे मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड को राजस्व नुकसान पहुंच रहा है।
मंडी बोर्ड एमडी पुरूषोत्तम कुमार ने सभी आंचलिक अधिकारियों तथा मंडी सचिवों को सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

उक्त मामला मंडी बोर्ड प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम के संज्ञान में आने पर उन्होंने संदर्भित विषय पर सभी आंचलिक संयुक्त संचालकों से विस्तृत चर्चा की गई और स्पष्ट किया गया कि जिन मामलों में संबंधित व्यक्तियों द्वारा जानबूझकर, कूटरचना कर, मंडी दस्तावेजों में हेरा-फेरी की गई है तथा मंडी समिति को आर्थिक क्षति पहुचाई गई है, ऐसे मामलों में केवल प्रशमन शुल्क लेकर कार्रवाई समाप्त करना पर्याप्त नहीं है। ऐसे मामलों में एमडी पुरूषोत्तम कुमार ने सभी आंचलिक अधिकारियों तथा मंडी सचिवों को निर्देशित किया कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई करें।
मप्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड, सहायक संचालक योगेश नागले ने बताया कि मुख्यालय में करअपवंचन और कूचरचित दस्तावेजों के इस मामले का खुला मंडी समितियों एवं आंचलिक कार्यालयों के उड़नदस्ता दलों द्वारा किए निरीक्षण के दौरान हुआ। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल, सागर, जबलपुर संभाग में ऐसे सर्वाधिक मामले घटित हो रहे हैं। यहां बिना मंडी शुल्क जमा किए फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कृषि उपज का परिवहन हो रहा है।
एफआईआर दर्ज कराने और दोषी की अनुज्ञप्ति रद्द कर शुल्क की पूर्ण वसूली के निर्देश
सहायक संचालक योगेश नागले ने बताया कि इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए मंडी बोर्ड एमपी पुरषोत्तम कुमार ने आंचलिक अधिकारियों तथा मंडी सचिवों को निर्देशित कि कृषि उपज के परिवहन के दौरान अनुज्ञापत्र के क्यूआर कोड को स्कैन कर उसकी प्रामाणिकता की जांच की जाए। फर्जी या कूटरचित अनुज्ञापत्रों के मामलों में धारा 53 के अंतर्गत प्रशमन न किया जाए, बल्कि वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ संबंधित कृषि उपज को अभिग्रहीत कर मंडी अधिनियम की धारा 23 के तहत कार्यवाही की जाए तथा एफआईआर दर्ज कराई जाए।
दोषी व्यापारियों की अनुज्ञप्ति रद्द कर मंडी शुल्क एवं निराश्रित शुल्क की पूर्ण वसूली सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रकरणों में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

