दिवाली से शादियों तक, गोल्‍ड सिर्फ गहना नहीं यह एक भावना : एसबीआई म्‍यूचुअल फंड 


 एवीएस न्यूज..नई दिल्ली 
एसबीआई म्‍यूचुअल फंड की एक निवेशक शिक्षा एवं जागरुकता पहल करते हुए बताया कि पुराने समय में यह मुद्रा और गहनों के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता था और अब यह दुनिया की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन चुका है। हर संस्कृति में इसका बहुत महत्व है। लेकिन भारत में यह पैसे से कहीं बढ़कर है - यह समृद्धि, शुद्धता और परंपरा का प्रतीक है। 


 दिवाली से शादियों तक, गोल्‍ड सिर्फ गहना नहीं यह एक भावना है। इसकी मौजूदगी शुभ शुरुआत लाती है। हम भारतीय त्योहारों पर खासकर दिवाली में, सोने के सिक्के, बार और गहने खरीदते हैं। हमारा मानना है कि इससे घर में समृद्धि, धन और खुशहाली आती है। नए जमाने के निवेशक आसानी और लचीलापन चाहते हैं, इसलिए डिजिटल गोल्‍ड की डिमांड बढ़ रही है। सांस्कृतिक महत्व के अलावा, गोल्‍ड निवेश का स्मार्ट तरीका है। यह महंगाई से बचाता है, पोर्टफोलियो को संतुलित करता है और जोखिम कम करता है। सालों से दुनिया भर में सोने की मांग काफी बढ़ी है। इससे कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं और केंद्रीय बैंक अपने भंडार बढ़ा रहे हैं।


 आरबीआई के  पास 888 टन सोना 
भारतीय रिजर्व बैंक के पास 888 टन सोना है, जो वित्‍त वर्ष 24 में 822 टन से अधिक है और भंडार बढ़ाने वाले शीर्ष दस देशों में शामिल है। यह रणनीतिक संचय मौद्रिक नीति में बदलाव और वित्तीय संप्रभुता की इच्छा को दर्शाता है। आज की अर्थव्यवस्था में गोल्‍ड सुरक्षित आश्रय से ज्‍यादा बेहतर क्‍यों है? वैश्विक अर्थव्यवस्था आज लगातार चुनौतियों और उभरते लचीलेपन के बीच नाजुक संतुलन बना रही है।  


 भारतीय रिज़र्व बैंक ने सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया दी है
तरलता, दरों में कटौती और कैश रिजर्व रेशियो में ढील। महंगाई नियंत्रित बनी हुई है, लेकिन ऋण वृद्धि अभी गति पकड़ने बाकी है। इसका प्रदर्शन व्यापक बाजारों से बेहतर रहा है, जो इसे सुरक्षित आश्रय के रूप में मजबूत करता है। भारत में, यह ट्रेंड म्यूचुअल फंड क्षेत्र में साफ नजर आता है, जहां गोल्ड ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स का एयूएम पिछले वर्ष में लगभग दोगुना हो गया है लगभग 83,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह उछाल गोल्‍ड को एक रणनीतिक, दीर्घकालिक संपत्ति के रूप में निवेशक विश्वास की बढ़ती हुई को दर्शाता है।