एवीएस न्यूज. नई दिल्ली


वैश्विक संचार कंपनी वायासैट ने पृथ्वी पर जीवन में सुधार लाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को टिकाऊ स्पेस सॉल्यूशंस विकसित करने के लिए प्रेरित करने के लिए डिजाइन अपनी प्रमुख वैश्विक STEM पहल- Viasat: Space for Good Challenge का वैश्विक विस्तार करने की आज घोषणा की। वर्ष 2025 के कार्यक्रम की सफलता के आधार पर अगली पुनरावृत्ति अमेरिका, ब्रिटेन एवं आयरलैंड, भारत और पहली बार ऑस्ट्रेलिया में 2026 और 2027 के दौरान की जाएगी। 
साथ ही, एक सफल शुरुआत के बाद वायासैटः स्पेस फॉर गुड चैलेंस ने भारत की विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग प्रतिभाओं का लाभ उठाने के लिए इस देश में वापसी की है। 

भारतः वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्र में वापसी
•    आवेदन खुले हैः 8 जून, 2026   
•    ग्रैंड फाइनल्सः 27 अक्टूबर, 2026- नई दिल्ली, भारत 


वायासैट इंडिया के प्रबंध निदेशक गौतम शर्मा ने कहा, “ ‘वायासैटः स्पेस फॉर गुड” को दूसरे वर्ष वापस भारत लाना, इस गतिशील टेक्नोलॉजी परिदृश्य को लेकर हमारी गहरी प्रतिबद्धता दर्शाती है। पिछले वर्ष विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत जो नवप्रवर्तन हमने देखा, वह वास्तव में असाधारण था और हम उम्मीद करते हैं कि इस वर्ष के प्रतिभागी भारत और विश्व के लिए सार्थक, टिकाऊ अंतरिक्ष समाधान विकसित करने के लिए डिजिटल समावेशन के हमारे मिशन में योगदान करेंगे।


दि वायासैटः स्पेस फॉर गुड चैलेंज नवप्रवर्तकों की अगली पीढ़ी को अंतरिक्ष टिकाऊपन विशेषकर कक्षीय मबले के शमन से लेकर सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव के लिए उपग्रह संपर्क का लाभ उठाने के बारे में गहन चिंतन करने के लिए सशक्त बनाता है। इसमें प्रतिभागियों को एक कठिन तीन चरणीय प्रक्रियाओः संकल्पना अभिव्यक्ति, डिजिटल परिशोधन और उद्योग विशेषज्ञों के एक पैनल के समक्ष अंतिम प्रस्तुति से गुजरना होता है। यह पैनल तकनीकी व्यवहार्यता, डिजाइन और नीतिगत जटिलताओं का आंकलन करता है। 


जैसा कि वायासैट वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिबद्धताओं का निरंतर निर्माण एवं मजबूती की दिशा में अग्रसर है, 2026 के कार्यक्रम में एशिया प्रशांत क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है जिससे स्थानीय प्रतिभाएं क्षेत्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों को हल करने के लिए प्रेरित हों। 
अगली पीढ़ी का सशक्तिकरण
यद्यपि इस कार्यक्रम का तत्काल ध्यान भारत और ऑस्ट्रेलिया में आगामी आयोजनों पर है, 2027 में इसमें अमेरिका और ब्रिटेन एवं आयरलैंड को शामिल करने की तैयारी है। इन सभी क्षेत्रों में जीतने वाले विद्यार्थियों को वायासैट के वैश्विक विशेषज्ञों की ओर से मौद्रिक पुरस्कार और मार्गदर्शन प्राप्त होगा जिससे स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उन्हें आगे की शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी और वे संभावित योगदान कर सकेंगे। 


वायासैट के चीफ पीपुल एंड कल्चर ऑफिसर रेबेका ग्रैटन ने कहा, “स्पेस टेक्नोलॉजी हमारे दैनिक जीवन के लगभग प्रत्येक पहलू को स्पर्श करती है जिसमें हम कैसे यात्रा करते हैं, संचार करते हैं और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, इन सभी में शामिल हैं। इस चैलेंज का ऑस्ट्रेलिया तक विस्तार कर और भारत वापसी से हम प्रतिभाओं को विकसित करने और ऐसे समाधानों को आगे बढ़ाने की हमारी प्रतिबद्धता दोहरा रहे हैं जो भूमि, आकाश और समुद्र में एक वैश्विक स्तर पर सार्थक, अंतरिक्ष आधारित प्रभाव का सृजन करे।