एनबीबीलएल ने ई-वेहिकल वॉलेट रिचार्ज को बनाया आसान
एवीएस न्यूज. भोपाल
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, एनपीसीआई भारत बिलपे लिमिटेड (एनबीबीलएल), भारत के बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) इकोसिस्टम के लिए डिजिटल भुगतान समाधानों को मजबूत कर रही है।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 के दौरान लॉन्च की गई ईवी रिचार्ज श्रेणी के माध्यम से अब इलेक्ट्रिक वाहन मालिक भारत कनेक्ट-सक्षम टचपॉइंट्स पर आसानी से अपने ईवी वॉलेट को टॉप-अप कर सकते हैं। नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में ईवी की बिक्री 2016 में 50,000 से बढक़र 2024 में 2.08 मिलियन हो गई है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत 2030 तक कुल वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की 30 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखता है।
प्रमुख ईवी वॉलेट प्रदाताओं और चार्जिंग नेटवर्क को एक ही सुलभ ढांचे में एकीकृत करके, एनबीबीलएल एक परेशानी मुक्त भुगतान बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। यह भारत कनेक्ट के एपीआई-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से उपयोगकर्ताओं को सभी पार्टनर ऐप्स पर एक जैसा अनुभव प्रदान करता है।
विद्युत मंत्रालय (एमओपी) के अनुसार, अगस्त 2025 तक देश भर में कुल 29,277 सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। अब भारत कनेक्ट-सक्षम ऐप्स और वेबसाइटों पर ईवी वॉलेट टॉप-अप उपलब्ध होने से, ग्राहक टाटा ईज़ी चार्ज और ज़ीऑन चार्जिंग जैसे स्टेशनों के लिए अपना बैलेंस आसानी से मैनेज कर सकते हैं। ये लेनदेन यूपीआई, कार्ड, नेट बैंकिंग और वॉलेट जैसे परिचित तरीकों से पूरे किए जा सकते हैं, जिसमें तत्काल पुष्टि और डिजिटल रिकॉर्ड की सुविधा भी मिलती है।
इस नई श्रेणी पर बात करते हुए, एनबीबीलएल की एमडी और सीईओ, सुश्री नूपुर चतुर्वेदी ने कहा, "चूंकि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारत के परिवहन परिदृश्य का केंद्र बनती जा रही है, इसलिए ईवी वॉलेट रिचार्ज के लिए एक भरोसेमंद समाधान प्रदान करना आवश्यक है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए, हमने इस सेवा को भारत कनेक्ट के मजबूत और विस्तृत नेटवर्क में एकीकृत किया है। 'ईवी रिचार्ज' श्रेणी को स्केलेबिलिटी और सुविधा के लिए बनाया गया है और यह भारत में बढ़ते ईवी अपनाने के साथ विकसित होती रहेगी।
यह पहल आवश्यक डिजिटल भुगतान सेवाओं के एक विश्वसनीय सूत्रधार के रूप में एनबीबीलएल की स्थिति को मजबूत करती है और भारत के स्वच्छ मोबिलिटी ट्रांज़िशन में अपना समर्थन देती है। यह इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के लिए दृश्यता में सुधार करने और एक बड़े डिजिटल नेटवर्क तक पहुंच बनाने में भी मदद करती है।

