भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स व्यापारियों की संस्था नही ,बन गई कुछ लोगों के हाथों की बनी कठपुतली
कुछ महत्वाकांक्षी लोगों के षडय़ंत्रों की बदौलत चेंबर की छबि हो रही फिर धूमिल
आत्माराम सोनी.भोपाल
राजधानी के व्यापारियों की शीर्ष संस्था कही जाने वाली भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्टी (बीसीसीआई) अब कुछ लोगों के हाथों की कठपुतली बन गई है। व्यापार और व्यापारियों के हित के लिए करीब 1960 में तत्कालीन व्यापारियों के वरिष्ठ और प्रबुद्धजनों द्वारा गठित की गई है यह संस्था अब महत्वाकांक्षी लोगों के राजनीतिकरण की भेंट चढ़ रही है। गठन के बाद कई उतार-चढ़ाव और संघर्ष के पश्चात व्यापारियों के दिलों में ही नहीं, बल्कि सरकारी संस्थाओं में भी अपनी अमिट छाप छोडऩे वाली बीसीसीआई अब राजनीतिकरण और षडय़ंत्र का शिकार हो रही है। जिस उद्देश्य पूर्ति के लिए संस्था का गठन हुआ था उसकी छबि कुछ महत्वाकांक्षी लोगों के षडय़ंत्रों की बदौलत धूमिल हो रही है। यह बात राजधानी के विभिन्न व्यापारिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने कही, जो चेंबर के मेंबर भी हैं।
मेंबरों का कहना है कि मौजूदा समय में संस्था में चल रही गतिविधियां समझ से परे हैं
संगठनों के प्रतिनिधियों और चेंबर के मेंबरों का कहना है कि मौजूदा समय में संस्था में चल रही गतिविधियां समझ से परे हैं। जून 2025 से गतिविधि शुल्क जमा कराने और नए सदस्य बनाने का कार्य जारी हुआ था जो अभी भी जारी है। संस्था के जिम्मेदारों ने पहले जहां 5 बार गतिविधि शुल्क जमा करने और नए सदस्य बनाने की तारीख बढ़ाई, वहीं फिर 20 नवंबर 2025 को 6वीं बार स्वयंभू अध्यक्ष बने उपाध्यक्ष , महामंत्री ने तारीख बढ़ा दी। जबकि सिंतबर माह में हुई वार्षिक साधारण सभा में अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने सहित की सहमति से 5 दिसंबर से 15 जनवरी के चुनाव संपन्न कराने की घोषणा की थी। बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार स्वयंभू अध्यक्ष बने उपाध्यक्ष , महामंत्री, एक उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष की मनमानी इन दिनों चरम पर है, खुले आम चेंबर के संविधान का माखौल उड़ाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि मौजूदा समय में व्यापारिक सदस्यों से प्राप्त चेंबर के कोषालय में करीब 1 करोड़ 15 लाख रुपए राशि जमा है।
संगठनों के प्रतिनिधियों और चेंबर के मेंबरों का कहना

पाली के अच्छे कार्य कुछ महत्वाकांक्षी लोगों को रास नहीं आया और रचा षडय़ंत्र पर षडय़ंत्र
चेंबर ऑफ कॉमर्स भोपाल व्यवसायियों की एक प्रतिष्ठित संस्था है। इसकी प्रतिष्ठा में चार चांद लगाने का काम तेजपालसिंह पाली ने किया। यही से उनके इन अच्छे कार्यों से कुछ महत्वाकांक्षी लोगों को रास नहीं आया। इसलिए उनके खिलाफ षडय़ंत्र पर षडय़ंत्र किए गए। इससे चेंबर की प्रतिष्ठा धूमिल ही नहीं, बल्कि समस्त व्यापारियों को कमजोर भी किया गया। अब संंस्था के सभी लोगों को मिलकर षड्यंत्रकारियों के षडय़ंत्र से चेंंबर की प्रतिष्ठा को बचाना होगा।
अजय सिंह
अध्यक्ष, भोपाल पेट्रोल पंप डीलर्स ऑनर्स एसोसिएशन

राजनीतिक दखलंदाजी से संस्था खो रही है पुन: अपनी गरीमा
राजधानी के व्यापारियों की शीर्ष संस्था कही जाने वाली संस्था भोपाल चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्टी के अपने गठन के उद्देश्य ,उत्तरदायित्व एव अधिकारों का ज्ञान नहीं है। उसका प्रमुख कारण शहर के आम व्यापारी का संस्था से जुड़ाव ना होना है। संस्थान में राजनीतिक दखलंदाजी बढऩे से संस्था पुन: अपनी गरीमा खो रही है।
एडवोकेट रोहित श्रोती
(पूर्व चुनाव अधिकारी )

अपने वोट की खातिर जबरदस्ती बनाए जा रहे सदस्य
तेजकुलपाल सिंह पाली जैसे अध्यक्ष का पूरी कार्य कार्यकारिणी ने कोई साथ नहीं दिया। पाली ने विधिवत यह सोचने और समझने के बाद इस्तीफा दिया कि ये सब सुधरेंगे, मेरा इस्तीफा अस्वीकार कर मेरा साथ देंगे। यहीं वह चूक गए। जिन्होंने व्यापार हित और व्यापारियों के लिए कुछ नहीं किया वे अब संस्था में कुंडली मारे हुए है और संस्था का कद घटाने के साथ चेंबर की गरिमा को ठेस पहुंच रहे हैं, जब की सभी समझदार है। शहर के व्यापारियों की यह संस्था अपने उद्देश्य से भटक गई है और संस्था में राजनीति ने घर लिया है। मुझ जैसे बहुत से व्यापारी संस्था के वर्तमान रवैए से नाराज है। जिस संस्था में सदस्यता लेने के लिए व्यापारियों की लाइन लगी थी, लेकिन मौजूदा समय में भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स की स्थिति यह हो गई है कि अपने वोट की खातिर जबरदस्ती सदस्य बनाए जा रहे है।
सुनील पंजाबी
अध्यक्ष भोपाल किराना व्यापारी महासंघ

कुछ लोग अपने पर्सनल एजेंडा, आत्म-प्रशंसा और राजनीतिक समीकरण बैठाने के लिए चला रहे
भोपाल चैंबर्स ऑफकॉमर्स कुछ लोगों के हाथों की अब कठपुतली बन गई है। यह महसूस होने लगा है कि यह भोपाल के व्यापारियों के लिए नहीं बनी हैं। इसे कुछ लोग अपनी व्यवस्थानुसार, अपने पर्सनल एजेंडा, आत्म-प्रशंसा और राजनीतिक समीकरण बैठाने के लिए चला रहे हैं।
आशीष पांडे
अध्यक्ष, भोपाल ऑटोमोबाइल डीलर वेलफेयर एसोसिएशन

संस्था राजनीतिज्ञ, मठाधीशों के हाथों की अलावा भामाषायों के हाथों की कठपुतली बन गई
भोपाल चेंबर्स ऑफ कॉमर्स व्यापारियों की मानक संस्था थी और है भी, लेकिन आज संस्था की जो अवस्था है व्यापारियों को कुंठित कर रहा है और संस्था में मौजूदा हालात को देखकर गहन दुख होता है। क्योकि आज ये संस्था राजनीतिज्ञ, मठाधीशों के हाथों की अलावा भामाषायों के हाथों की कठपुतली बन गई है,जो कि अत्यधिक: दुखद विषय है।
रामबाबू शर्मा
कोर कमेटी संयोजक, फेडरेशन ऑफ एमपी टेंट एसोसिएशन

संस्था में राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए
इसमें को कोई दोराहे की बात नहीं कि तेजकुलपाल सिंह पाली की अध्यक्ष में भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स ने अपनी खोई हुई गरीमा हासिल की और उल्लेखनीय ऊंचाई पर पहुंचा। लेकिन व्यापारियों की इस संस्था में राजनीतिकरण और निष्पक्षता का अभाव हो गया है। जिससे व्यापारियों की इस संस्था की छबि धूमिल हुई है। अत: संस्था में राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। हर कार्य निष्पक्षता पूर्ण होना चाहिए।
मुकेश गोयल
पूर्व अध्यक्ष, न्यूमार्केट सराफा व्यापारी एसोसिएशन

वर्तमान गतिविधियों को देखकर लगा रहा है चेंबर का मठाधीश चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है
तेजकुलपाल सिंह पाली की अध्यक्षता में भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स में हुए कार्र्याे से संस्था का कद बढ़ा,लेकिन कुछ लोगों की उच्च पद पर आसीन होने लालसा और महत्वाकांक्षाओं और षडय़ंत्र के शिकार हुए पाली द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद संस्था की छबि धूमिल हुई है। मौजूदा समय में संस्था में घटित हो रही गतिविधियों से यह स्पष्ट हो रहा है कि खुद को चेंबर का मठाधीश समझने वाले लोग चेंबर के चुनाव कराने के पक्ष में फिलहाल नहीं हैं। फिलहाल चेंबर की छबि राजधानी के व्यापारियों के बीच धूमिल हो रही है। रमाकांत तिवारी
पूर्व महामंत्री, कैट भोपाल

