भोपाल के आविष्कारक का दावा: मोबाइल बनेगा हियरिंग मशीन
सस्ती तकनीक से करोड़ों लोगों की सुनने की समस्या हो सकती है दूर
महंगी हियरिंग मशीनों का विकल्प बन सकता है स्मार्टफोन आधारित समाधान
एवीएस न्यूज.भोपाल
क्या भविष्य में हियरिंग मशीन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आपका स्मार्टफोन ही सुनने में मदद करने वाली हाईटेक हियरिंग एड मशीन बन जाएगा? मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के आविष्कारक ठाकुरलाल राजपूत ने एक ऐसा अभिनव विचार प्रस्तुत किया है, जो सुनने की समस्या से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।

राजपूत का मानना है कि यदि मोबाइल फोन के माइक्रोफोन और सॉफ्टवेयर में कुछ तकनीकी बदलाव किए जाए तथा विशेष हियरिंग एड एप्लिकेशन विकसित किया जाए, तो स्मार्टफोन और ब्लूटूथ ईयरबड्स की मदद से कम लागत में उन्नत हियरिंग एड प्रणाली तैयार की जा सकती है।
उनके अनुसार प्रस्तावित तकनीक में मोबाइल फोन को एक डिजिटल हियरिंग प्रोसेसर के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। विशेष ऐप के माध्यम से उपयोगकर्ता अपने बाएं और दाएं कान की सुनने की क्षमता के अनुसार अलग-अलग सेटिंग कर सकेगा। इस प्रणाली में इक्वलाइजर आधारित नियंत्रण होंगे, जिनमें आवाज की तीव्रता, बेस, ट्रेबल, वॉयस क्लैरिटी, माइक्रोफोन संवेदनशीलता और नॉइज रिडक्शन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। उपयोगकर्ता स्वयं अपनी सुविधा के अनुसार सेटिंग बदल सकेगा।
हियरिंग लॉस की बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र, तेज आवाज, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य कारणों से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वर्तमान में बाजार में उपलब्ध हियरिंग मशीनों की कीमत लगभग 17 हजार रुपए से लेकर 2.5 लाख रुपए तक होती है, जिससे बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोग इनका लाभ नहीं उठा पाते। आविष्कारक का कहना है कि यदि यही तकनीक मोबाइल फोन में उपलब्ध करा दी जाए तो एक सामान्य स्मार्टफोन की कीमत में ही व्यक्ति को हियरिंग एड जैसी सुविधा मिल सकती है।
वर्तमान हियरिंग मशीनों में क्या हैं चुनौतियां?
राजपूत के अनुसार वर्तमान प्रणाली में ऑडियोलॉजिस्ट द्वारा ऑडियोमेट्री परीक्षण के बाद मशीन की सेटिंग की जाती है। कई बार उपयोगकर्ता को अपनी आवश्यकता के अनुसार स्पष्ट आवाज नहीं मिल पाती, जिसके कारण बार-बार सेटिंग करवाने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने दावा किया कि यदि नियंत्रण सीधे उपयोगकर्ता के हाथ में हो तो वह अपनी सुनने की सुविधा के अनुसार तुरंत बदलाव कर सकता है, जिससे अनुभव बेहतर हो सकता है।
दो मोड में काम करेगा सिस्टम, प्रस्तावित ऐप में दो प्रमुख मोड होंगे
फोन मीडिया मोड- इस मोड में उपयोगकर्ता मोबाइल कॉल, वीडियो, फिल्में, संगीत और अन्य डिजिटल कंटेंट को अपनी आवश्यकता के अनुसार बढ़ी हुई स्पष्टता के साथ सुन सकेगा। पब्लिक वॉयस मोड- इस मोड में बाहरी वातावरण की आवाजों को प्रोसेस कर उपयोगकर्ता तक पहुंचाया जाएगा। नॉइज फिल्टरिंग और वॉयस एन्हांसमेंट तकनीक के जरिए आसपास की बातचीत को अधिक स्पष्ट बनाने का प्रयास किया जाएगा।
एआई और स्मार्टफोन तकनीक से जुड़ सकता है भविष्य
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक स्मार्टफोन पहले से ही उन्नत माइक्रोफोन, डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लूटूथ तकनीक से लैस हैं। ऐसे में भविष्य में स्मार्टफोन आधारित श्रवण सहायता प्रणालियां एक नई दिशा दे सकती हैं।

करोड़ों लोगों के लिए बड़ा बाजार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) के अनुमानों के अनुसार दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी स्तर की श्रवण समस्या से प्रभावित हैं। भारत में भी लाखों लोग सुनने की समस्या का सामना कर रहे हैं। यदि इस प्रकार की तकनीक व्यवहारिक रूप से विकसित और चिकित्सा मानकों के अनुरूप प्रमाणित हो जाती है, तो यह न केवल मरीजों के लिए कम लागत वाला विकल्प बन सकती है, बल्कि मोबाइल और हेल्थ-टेक उद्योग के लिए भी एक विशाल वैश्विक बाजार तैयार कर सकती है।
आविष्कारक की सोच
भोपाल निवासी आविष्कारक ठाकुरलाल राजपूत का कहना है कि उनका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है जो आम लोगों को सस्ती, सुविधाजनक और स्वयं नियंत्रित की जा सकने वाली श्रवण सहायता उपलब्ध करा सके। उनका मानना है कि भविष्य में स्मार्टफोन केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सहायता उपकरण के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।






