ड्राइवरों की कमी और बढ़ती लागत पर जताई चिंता
 

एवीएस न्यूज.भोपाल 
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी ) की 219वीं मैनेजिंग कमेटी बैठक एवं मध्यप्रदेश इकाई के प्रांतीय अधिवेशन ‘परिवहन मंथन-2026’ में देशभर से आए ट्रांसपोर्टरों, बस-ट्रक संचालकों और मोटर स्वामियों ने परिवहन क्षेत्र की चुनौतियों पर मंथन किया।

सम्मेलन में बढ़ती परिचालन लागत, प्रशिक्षित ड्राइवरों की कमी, ई-चेकिंग व्यवस्था और अवैध वसूली जैसे मुद्दों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार को भेजने के लिए 10 सूत्रीय साझा एजेंडा तैयार किया गया।

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि ट्रांसपोर्ट उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन आज भी यह क्षेत्र स्पष्ट राष्ट्रीय परिवहन नीति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है।


एआईएमटीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सबरवाल ने कहा कि देश में प्रशिक्षित ड्राइवरों की कमी लगातार बढ़ रही है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी संख्या में व्यावसायिक वाहन संचालन से बाहर हो सकते हैं।

उन्होंने ड्राइवरों के प्रशिक्षण, बीमा और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ई-चेकिंग प्रणाली को पारदर्शी बनाने, लागत आधारित भाड़ा निर्धारण और राष्ट्रीय परिवहन नीति लागू करने की मांग की।

पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बाल मलकीत सिंह ने बताया कि सम्मेलन में पारित 10 प्रमुख मांगें केंद्र सरकार को भेजी जाएंगी। इनमें लागत के अनुरूप प्रति किलोमीटर भाड़ा तय करना, ई-चालान प्रणाली में सुधार तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर ड्राइवरों के लिए रेस्ट हाउस विकसित करना प्रमुख हैं। 


आरटीओ एवं ट्रैफिक कमेटी के चेयरमैन सी.एल. मुकाती ने कहा कि केवल जुर्माना बढ़ाने से सड़क दुर्घटनाएं नहीं रुकेंगी। उन्होंने आधुनिक ट्रांसपोर्ट नगर, सुरक्षित पार्किंग और अवैध वसूली पर प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता बताई।

एआईएमटीसी के चेयरमैन जीआर शानमुगप्पा ने यात्री बसों में व्यावसायिक माल ढुलाई पर पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए इसे यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।


 सम्मेलन की प्रमुख मांगें


ई-चेकिंग और जांच व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल एवं पारदर्शी बनाई जाए।
राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर ट्रक पार्किंग और सुविधा केंद्र विकसित किए जाएं।
पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए।
प्रत्येक जिले में आधुनिक ट्रांसपोर्ट नगर स्थापित किए जाएं।
टोल प्लाजा का ऑडिट कर वसूली पूरी होने पर टोल दरें कम की जाएं।
ड्राइवरों के लिए प्रशिक्षण, बीमा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
लागत आधारित वैज्ञानिक भाड़ा निर्धारण लागू किया जाए।
यात्री बसों में व्यावसायिक माल ढुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
ई-चालान और वीडीएल के नाम पर होने वाली अवैध वसूली रोकी जाए।
ट्रक परिवहन को उद्योग का दर्जा देने सहित अव्यावहारिक नियमों की समीक्षा की जाए।