भोपाल । मध्यप्रदेश में वाणिज्य कर विभाग के अंतर्गत जीएसटी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जीएसटी आयुक्त द्वारा कर चोरी पर नियंत्रण के लिए विभिन्न जिलों में जांच अभियान चलाया जाता है, परंतु जमीनी हकीकत इससे अलग है। जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है, वे वास्तव में नियमों का पालन न करने वाले व्यापारियों और वाहन चालकों से मोटी रकम वसूल कर उन्हें छोड़ देते हैं। वहीं दूसरी ओर जिन ट्रांसपोर्टरों के पास पूरे दस्तावेज होते हैं और वे ईमानदारी से व्यापार करते हैं, उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। कागज पूरे होने के बावजूद उनमें खामियां निकालकर ट्रक चालकों से प्रतिदिन के हिसाब से रिश्वत की मांग की जाती है। यह बात ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (पंजी) अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कही।  

जांच अभियानों में पारदर्शिता लाई जाए
एसोसिएशन के अध्यक्ष कपूर ने बताया कि दिल्ली के कुछ ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों ने हमारे संगठन को इस संबंध में जानकारी देते हुए केंद्रीय स्तर पर शिकायत करने की मांग है। जिसके चलते मैने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव, वाणिज्य मंत्री और वाणिज्यिक कर आयुक्त को एक पत्र लिखा। जिसमे प्रमुख रूप से इस भ्रष्टाचार पर गहरी चिंता व्यक्त की और आग्रह किया कि जांच अभियानों में पारदर्शिता लाई जाए और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही की जाए।

ट्रांसपोर्ट व्यवसाय प्रभावित

कपूर ने कहाकि ईमानदार व्यापारियों को तंग कर भ्रष्टाचारियों को  मौज की छूट देना, पूरे तंत्र को खोखला कर रहा है। अगर यह रवैया नहीं बदला गया तो ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित होगा।