एवीएस न्यूज.अहमदाबाद 

नमक से ढके विशाल रेगिस्तानों से लेकर विरासत से सजी ऐतिहासिक इमारतों और आधुनिक वित्तीय कॉरिडोर तक, गुजरात धीरे-धीरे भारत के सबसे बहुमुखी फिल्मांकन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। विविध प्राकृतिक दृश्यों, संगठित नीतिगत सहयोग और मजबूत बुनियादी ढांचे के कारण यह राज्य रचनात्मकता के साथ-साथ प्रोडक्शन की सहजता भी प्रदान करता है—जो आज के समय में फिल्म निर्माताओं और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।
हाल ही में फेमिना मिस इंडिया 2023 की फर्स्ट रनर-अप श्रेया पूंजा और फेमिना मिस इंडिया 2024 की फर्स्ट रनर-अप रेखा पांडेय ने गुजरात के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया। राज्य के विविध प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिदृश्यों को करीब से देखने के बाद उन्होंने महसूस किया कि किस तरह गुजरात स्वाभाविक रूप से सिनेमाई कहानी कहने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
गुजरात की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां एक ही राज्य के भीतर अलग-अलग तरह के दृश्य और परिवेश सहजता से मिल जाते हैं। एक ओर कच्छ का रण है, जहां दूर-दूर तक फैला सफेद नमक का मरुस्थल किसी भव्य ऐतिहासिक फिल्म के लिए शानदार पृष्ठभूमि बन सकता है। वहीं अरब सागर के किनारे स्थित शिवराजपुर बीच, जिसे ‘ब्लू फ्लैग’ का दर्जा प्राप्त है, अपने स्वच्छ और सुंदर तटीय दृश्यों के साथ रोमांटिक या संगीत प्रधान फिल्मों के लिए आदर्श लोकेशन प्रदान करता है।
इसके अलावा पहाड़ियां, पथरीले क्रैकलैंड्स और घने जंगल रोमांच और खोज पर आधारित कथानकों के लिए प्राकृतिक मंच तैयार करते हैं। वहीं स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास नर्मदा नदी में सालभर होने वाली रिवर राफ्टिंग तेज-रफ्तार एक्शन दृश्यों के लिए उपयुक्त वातावरण देती है। प्राकृतिक विविधता के साथ-साथ गुजरात अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। अहमदाबाद की चहल-पहल भरी पोल्स और ऐतिहासिक इमारतें—जो भारत का पहला यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी है—बीते समय की कहानियां जीवंत कर देती हैं। वहीं चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्विक उद्यान और धोलावीरा जैसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल इतिहास और सभ्यता की गहराई से जुड़ी लोकेशंस उपलब्ध कराते हैं। दूसरी ओर गिफ्ट सिटी जैसे आधुनिक विकास परियोजनाएं अत्याधुनिक शहरी पृष्ठभूमि प्रदान करती हैं। इस तरह कहानीकार एक ही राज्य के भीतर अलग-अलग समय और परिवेश को सहजता से दर्शा सकते हैं।
गुजरात की यह विविधता पहले ही कई फिल्मों में नजर आ चुकी है। काई पो चे!, आरआरआर और सत्यप्रेम की कथा जैसी फिल्मों ने यहां की लोकेशनों का उपयोग किया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रोडक्शन एक्सट्रैक्शन ने भी गुजरात के विशाल और प्रभावशाली दृश्यों को अपने फ्रेम में शामिल किया। वहीं गुजराती सिनेमा भी लास्ट फिल्म शो जैसी ऑस्कर में भेजी गई फिल्मों के जरिए वैश्विक मंच तक पहुंच चुका है, जिससे राज्य की कहानी कहने की क्षमता को और पहचान मिली है।
श्रेया पूंजा ने कहा, “मुझे सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की हुई कि बहुत कम दूरी में ही यहां का दृश्य पूरी तरह बदल जाता है। एक जगह ऐसा लगता है मानो आप किसी ऐतिहासिक और कालातीत दुनिया का हिस्सा हों, और दूसरी जगह आधुनिक वास्तुकला से घिर जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे एक ही राज्य में कई अलग-अलग दुनिया मौजूद हैं।”
सिर्फ खूबसूरत लोकेशन्स ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सहयोग भी गुजरात को फिल्म निर्माण के लिए आकर्षक बनाता है। वर्ष 2014-15 में गुजरात को ‘सबसे फिल्म-फ्रेंडली राज्य’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। राज्य सरकार प्रस्तावित सिनेमैटिक टूरिज्म पॉलिसी के माध्यम से शूटिंग की अनुमति प्रक्रियाओं को और सरल बनाने, सिंगल-विंडो क्लियरेंस को मजबूत करने तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रोडक्शन्स के लिए प्रोत्साहन देने की दिशा में काम कर रही है।रेखा पांडेय ने कहा, “यहां सबसे खास बात यह है कि सब कुछ बेहद व्यवस्थित महसूस होता है। मजबूत कनेक्टिविटी, भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, अलग-अलग बजट के लिए आवास की सुविधाएं और विशाल आउटडोर लोकेशन्स—ये सभी चीजें किसी भी फिल्म यूनिट के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी कि सुंदर लोकेशन्स।”विविध प्राकृतिक परिदृश्यों और सहयोगी व्यवस्था के साथ गुजरात सिर्फ लोकेशन्स ही नहीं दे रहा, बल्कि खुद को एक ऐसे सिनेमाई परिवेश के रूप में विकसित कर रहा है जहां हर पैमाने की कहानियां आकार ले सकती हैं।