भारतीय अब अपनी भाषा में यात्रा की खोज करने लगे हैं: मेकमायट्रिप
एवीएस न्यूज.गुरुग्राम
भारत की प्रमुख ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी मेकमायट्रिप ने आज अपने जेन-एआई आधारित ट्रिप प्लानिंग असिस्टेंट 'मायरा' से मिले कुछ शुरुआती रुझान साझा किए हैं। ये संकेत देते हैं कि भारतीय यात्री अब वॉइस के माध्यम से किस तरह से इंटरैक्ट करना शुरू कर रहे हैं और इसमें एक नया व्यवहारिक रुझान उभर रहा है। मायरा का यूज़र बेस अभी बढ़ रहा है और इस पर रोज़ाना 50,000 से अधिक बातचीत हो रही है, लेकिन शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि वॉइस सर्च लोगों को अपनी बात ज़्यादा खुलकर, संदर्भ के साथ और अपनी पसंदीदा भाषा में रखने का मौका दे रहा है। यह तरीका टेक्स्ट के ज़रिए सर्च करने के पारंपरिक तरीके से काफी अलग और स्वाभाविक है।
वॉइस और टेक्स्ट सर्च के बीच बढ़ता अंतर
इस्तेमाल के शुरुआती पैटर्न में ही यह साफ दिखने लगा है कि लोग टाइप करते समय और बोलकर अपनी बात रखते समय अलग तरह का व्यवहार करते हैं। ज़्यादातर टेक्स्ट सर्च आमतौर पर 3-4 शब्दों के छोटे, संक्षिप्त और सीधे कीवर्ड वाले होते हैं, जैसे – "गोवा होटल्स चीप" या "दिल्ली मुंबई फ्लाइट"। वहीं, वॉइस सर्च का तरीका काफी अलग नज़र आ रहा है। लगभग 23% वॉइस क्वेरी 11 शब्दों से ज़्यादा लंबी होती हैं, जबकि टेक्स्ट सर्च में ऐसा केवल 7% मामलों में होता है। बोलते समय लोग स्वाभाविक रूप से एक ही वाक्य में कई चीज़ें बता देते हैं—जैसे जगह की लोकेशन, होटल की सुविधाएँ, बजट, साथ में कितने लोग हैं और यात्रा की तारीखें। उदाहरण के तौर पर लोग इस तरह पूछ रहे हैं: “नार्थ गोवा में बीच के पास पूल वाला किफायती होटल दिखाइए” या “2 वयस्क और एक बच्चा, 14 जनवरी से 3 रात, बजट 15,000 रुपये प्रति रात से कम।”
कई सर्च श्रेणियों में शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि वॉइस का इस्तेमाल टेक्स्ट के मुकाबले काफी ज़्यादा हो रहा है। तारीखों से जुड़ी सर्च में यह अंतर सबसे ज़्यादा है, जो वॉइस पर टेक्स्ट की तुलना में 3.3 गुना अधिक है। लोग टाइप करते समय तारीखों को बहुत छोटा और संक्षिप्त (जैसे 26-29 दिसंबर) लिखते हैं, जबकि बोलते समय वे स्वाभाविक तरीके से कहते हैं— “26 दिसंबर से 29 दिसंबर तक” या “अगले शुक्रवार से रविवार तक।”
इसी तरह, जानकारी प्राप्त करने वाली क्वेरी—जहाँ लोग किसी प्रक्रिया या सेवा के बारे में मार्गदर्शन या स्पष्टीकरण चाहते हैं—वॉइस पर 2.7 गुना अधिक देखी गई हैं । इससे संकेत मिलता है कि लोग अब केवल लेन-देन (ट्रान्जेक्शनल सर्च) के अलावा अन्य सवालों के लिए भी बातचीत के माध्यम से मदद लेना पसंद कर रहे हैं । उदाहरणों में शामिल हैं:
· हिंदी में: "सऊदी का वीज़ा कैसे मिलेगा?"
· कन्नड़ में: "ಜಪಾನ್ಗೆ ಪ್ರಯಾಣಕ್ಕೆ ಹೋಗುವ ಮೊದಲು ಯಾವ ದಾಖಲೆಗಳನ್ನು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸಬೇಕು?” (जापान यात्रा पर जाने से पहले कौन से दस्तावेज़ तैयार करने चाहिए?)
· मराठी में: "कोल्हापूर ते दिल्ली जाण्यासाठी कोणती ट्रेन आहे व किती दिवस लागतात आणि ती कोणकोणत्या वारी असते?" (कोल्हापुर से दिल्ली जाने के लिए कौन सी ट्रेन है, कितना समय लगता है और वह किन-किन दिनों चलती है?)
· मलयालम में: "എനിക്ക് ആനയിൽ നിന്ന് കൊച്ചിയിലേക്കുള്ള തത്കാല ടിക്കറ്റ് തിങ്കളാഴ്ച ഉള്ള ટિકറ്റ് ആണ് വേണ്ടത്. അതിന് വേണ്ടി ഞാൻ എന്താണ് ചെയ്യേണ്ടത്" (मुझे सोमवार के लिए अनाई से कोच्चि का तत्काल टिकट चाहिए। इसके लिए मुझे क्या करना होगा?)
· तमिल में: "வீல் சேர் எப்படி பુક பண்ணனும்னு சொல்லு?" (व्हीलचेयर कैसे बुक करनी है, बताइए?)
स्थान (लोकेशन) से जुड़ी क्वेरी
स्थान (लोकेशन) से जुड़ी सर्च कुल वॉइस सर्च का 25.1% है और यह टेक्स्ट की तुलना में 1.5 गुना अधिक है । इसमें यूज़र्स "बीच के पास" (near beach) या " गोल्डन टेंपल से पैदल दूरी" (walking distance from Golden Temple) जैसे वाक्यांशों के माध्यम से स्वाभाविक रूप से नज़दीकी व्यक्त करते हैं । अन्य भाषाओं में भी यही पैटर्न दिखाई देते हैं, उदाहरण के लिए:
· बंगाली में: "হ্যালো মাইরা এটা এই হোটেলটা গুয়াহাটি রেল স্টেশন থেকে কতদূর" (हेलो मायरा, यह होटल गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से कितनी दूर है?)
· तेलुगु में: "గోవా బాగా దగ్గరలో తక్కువ రేట్లు మంచి రూమ్స్ కావాలి" (गोवा के बहुत करीब कम दामों में अच्छे कमरे चाहिए)
वॉइस सर्च से पूरे भारत में यात्रा की खोज आसान हो रही है
डेटा से मिल रहे शुरुआती संकेतों में से एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वॉइस सर्च लोगों को उस भाषा में खोजने की सुविधा दे रहा है जिसमें वे स्वाभाविक रूप से सोचते और बोलते हैं। जहाँ टेक्स्ट सर्च (टाइप करके खोजना) में अभी भी अंग्रेज़ी का बोलबाला है, वहीं वॉइस इंटरैक्शन में भाषाई विविधता बहुत ज़्यादा है और इसमें अंग्रेज़ी का हिस्सा काफी कम है।
यह अंतर एक सीधी सी बात की ओर इशारा करता है जो लोग अपनी भाषा में ज़्यादा सहज महसूस करते हैं, वे वॉइस सर्च की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए, मलयालम में टेक्स्ट सर्च के मुकाबले वॉइस सर्च 46 गुना ज़्यादा है। तमिल में यह अनुपात 36:1 और तेलुगु में 32:1 का है।
जिन लोगों के लिए टाइप करना संभव नहीं था, उनके लिए यह बदलाव सिर्फ तकनीक का नहीं बल्कि अपनी बात कहने की आज़ादी का मामला है। वॉइस सर्च उन्हें बिना शब्दों को छोटा किए, अपनी ही भाषा में यह बताने की सुविधा देता है कि उन्हें असल में क्या चाहिए।
हिंदी और अंग्रेज़ी मिलाकर बोलने वाले यानी 'कोड-मिक्स्ड' यूज़र्स शुरुआती आंकड़ों में सबसे ज़्यादा विस्तार से अपनी बात रखते दिखे हैं; उनकी एक वॉइस क्वेरी में औसतन 10.5 शब्द होते हैं। उदाहरण के लिए: “मनाली में 3 रातों के लिए होटल चाहिए, माउंटेन व्यू और ब्रेकफास्ट के साथ।” इस तरह की सर्च एक ही सांस में यात्रा की बारीकियों और पसंद को समेट लेती है, जिसे टेक्स्ट सर्च में शामिल करना लगभग नामुमकिन होता था। एक ही वाक्य में जगह, सुविधा और पसंद—सब कुछ बताने का यह तरीका टेक्स्ट सर्च में आमतौर पर देखने को नहीं मिलता।
मेकमायट्रिप के सह-संस्थापक और ग्रुप सीईओ, राजेश मागो ने कहा कि मायरा के जरिए हमें जो शुरुआती संकेत मिल रहे हैं, वे काफी उत्साहजनक हैं। वॉइस सर्च अब उन लोगों को यात्रा खोजने और उसकी योजना बनाने का एक अधिक स्वाभाविक तरीका दे रहा है, जो अपनी भाषा में ज़्यादा सहज महसूस करते हैं। कोच्चि या कोयंबटूर जैसे शहरों में रहने वाले लोग अगर मलयालम या तमिल में सोचते हैं, तो अपनी ज़रूरतें सीधे बोलकर बताना (बजाय इसके कि उन्हें अंग्रेज़ी में टाइप करें), उनके अनुभव को पूरी तरह से बदल देता है। अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है, लेकिन ये संकेत बताते हैं कि वॉइस सर्च भविष्य में पूरे भारत में यात्रा की योजना बनाने के तरीके को और भी समावेशी और सुलभ बना सकता है।”

