एवीएस न्यूज .मुंबई
 बॉलीवुड में कॉमेडी का मतलब सिर्फ पंचलाइन या जबरदस्त हंसी वाले गैग्स नहीं है, बल्कि इसके लिए सही टाइमिंग, अभिनय में ठहराव और अफरा-तफरी भरे माहौल को भी मनोरंजन में बदलने का हुनर बेहद ज़रूरी है। कॉमेडी के असली बादशाह वही कलाकार हैं, जो अपने किरदार को बखूबी समझते हुए तालमेल के साथ अभिनय करते हैं, और बेतुकी बातों को भी यकीन दिलाने वाले अंदा? में कह जाते हैं।

ज़ी5 पर मस्ती 4 की रिलीज के साथ ही हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडी कलाकार एक बार फिर से साथ नजर आने वाले हैं, तो आइए उन 5 अभिनेताओं के बारे में जानें, जिन्होंने हमेशा इस जॉनर पर राज किया और पर्दे पर भारतीय दर्शकों के लिए कॉमेडी के मायने भी बदल दिए।


रितेश देशमुख-  सिचुएशनल कॉमेडी की बात की जाए, तो इसमें बहुत ही कम अभिनेताओं ने रितेश देशमुख की तरह महारत हासिल की है। कमाल की टाइमिंग और चेहरे के हाव-भाव के अलावा उलझन, मासूमियत और हंगामे वाले किरदारों को बखूबी पर्दे पर उतारना ही उनके अभिनय की सबसे बड़ी खासियत है। बीते कुछ सालों में, और खासकर मस्ती फ्रेंचाइजी के बाद से तो रितेश स्मार्ट और बेहतरीन किरदारों के जरिए दर्शकों को हंसाने के लिए जाने जाते हैं। मस्ती 4 में उन्होंने एक बार फिर से साबित कर दिया कि वह बॉलीवुड में कॉमेडी के सबसे भरोसेमंद कलाकार क्यों हैं वे फिल्म के पागलपन भरे माहौल को बड़ी बारीकी से संभालते हैं और अजीबोगरीब अंदाज़ वाले सीन को भी बिल्कुल सहज बना देते हैं।
 

अक्षय कुमार- अगर कॉमेडी का कोई सिलेबस होता, तो अक्षय कुमार उसमें एक पूरा अध्याय होते। हेरा फेरी, गरम मसाला, भूल भुलैया जैसी यादगार फिल्मों में उनके डायलॉग तो आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं। उनकी खूबी क्या है? लाजवाब टाइमिंग। अभिनय की बारीकी। पागलपन भरा अंदाज़। चाहे वे उलझन में हों, डरे हुए हों या अफरा-तफरी में झूठ बोल रहे हों, अक्षय घबराहट वाले ऐसे दृश्यों में भी हंसाने का हुनर बखूबी जानते हैं।  


कुणाल खेमू- कुणाल खेमू किसी जबरदस्त किरदार के बिना भी अभिनय से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचने में माहिर हैं। गोलमाल का गोटी तो याद ही होगा? या गो गोवा गॉन का वो नशे में धुत जीनियस? बिल्कुल। वह अपने अभिनय में मासूमियत, बेवकूफी और हैरानी की ऐसी शानदार जुगलबंदी पेश करते हैं, जो तब सामने आता है जब दर्शकों को इसकी बिल्कुल उम्मीद नहीं होती। वह ऐसे कलाकार हैं, जो बस एक लाइन बोलकर भी पूरा सीन अपने नाम कर लेते हैं।


अरशद वारसी-  जब भी कोई सर्किट का नाम ले, तो हमें बस उनकी ही आवाज सुनाई देती है। अरशद ने कॉमेडी को एक नया अंदाज दिया, जो बहुत ही सहज और जमीन से जुड़ा होने के साथ-साथ बिल्कुल हकीकत जैसा लगता है। उनका मजाकिया अंदाज उस हाजिरजवाब दोस्त की तरह है, जो बेहद मज़ेदार बातों को एक लाइन में बस यूं ही कह देता है। चाहे मुन्ना भाई एमबीबीएस हो, जॉली एलएलबी हो, मस्ती 4 हो या कोई और कॉमेडी फिल्म, अरशद दिल के जज्बातों और हंसी का ऐसा मेल पेश करते हैं, जो सच में बेमिसाल है।
 

विवेक ओबेरॉय- विवेक की कॉमेडी दर्शकों को इसलिए पसंद आती है, क्योंकि वे अपने किरदारों में बहुत ज्यादा उत्साह और सादगी के बीच कमाल का संतुलन बनाए रखना जानते हैं। चाहे अफरा-तफरी के बीच गंभीर बने रहना हो या फिर बढ़-चढक़र अभिनय करना हो, वह दर्शकों की सोच से परे अपने अंदाज से कॉमेडी को और बेहतर बना देते हैं। मस्ती 4 की तिकड़ी में शामिल विवेक अपनी फिजिकल कॉमेडी, हाव-भाव और हालात के हिसाब से अपने मजेदार अभिनय के जरिए पागलपन भरे माहौल में संतुलन लाते हैं, जिससे उनकी कॉमेडी जबरदस्ती की नहीं बल्कि एकदम सहज लगती है। मस्ती 4 के पागलपन से लेकर इस जॉनर में दशकों के यादगार अभिनय तक, इन सभी कलाकारों ने साबित किया है कि बेहतरीन कॉमेडी कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक कला है। और जब इसे सही तरीके से पेश किया जाए, तो यह दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती है।