मप्र का अगला कदम ‘एआई-रेडी’ डिलिवरी सिस्टम बनाना होना चाहिए


एवीएस न्यूज.भोपाल


भारत मंडपम, नई दिल्ली में इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सहभागिता ने मध्यप्रदेश के लिए बड़ा अवसर बनाया है। पर उसी के साथ एक तथ्य भी स्पष्ट है मप्र बजट 2026–27 में एआई, आईटी-कंप्यूट, डेटा-इंफ्रा और डिजिटल-गवर्नेंस के लिए अलग, पहचान योग्य बजटीय व्यवस्था और टाइमलाइन सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं दिखती।

एआई-युग में यह “एड-ऑन” नहीं, बेसिक इंफ्रा है। अब राज्य को “एआई की चर्चा” से आगे बढ़कर “एआई की तैयारी” को लिखित, समयबद्ध और मापनीय रूप में सामने रखना चाहिए। 


मप्र एआई-डेटा-कंप्यूट एक्शन प्लान” सार्वजनिक करें , जिसमें 4 बातें स्पष्ट हो 
केंद्रीय स्तर पर एआई और कंप्यूट क्षमता बढ़ाने के संकेतों के बीच प्रतिस्पर्धा रीयल-टाइम डिलिवरी सिस्टम की है।  मप्र सरकार से आग्रह है कि बजटीय विंडो के साथ शीघ्र “मप्र एआई-डेटा-कंप्यूट एक्शन प्लान” सार्वजनिक करें , जिसमें 4 बातें स्पष्ट हो: 

 पहली - कंप्यूट और डेटा के लिए स्टेट-लेवल रोडमैप किन शहरों या क्लस्टर में, किस क्षमता के साथ, और किन विभागों की जिम्मेदारी में।

दूसरी- एआई के लिए बेसिक इंफ्रा ग्रीन पावर, ग्रिड अपग्रेड, इंडस्ट्रियल फीडर, फाइबर नेटवर्क, कूलिंग-वॉटर इनकी टाइमलाइन और फंडिंग मैप।

तीसरी - सबसे जरूरी: तेज़ और भरोसेमंद अनुमतियाँ सिंगल-विंडो की तय समय-सीमा, और हर अनुमति के लिए डिफॉल्ट “डिलिवरी डेट”। 

चौथी - घोषित 3700 एकड़ नॉलेज एंड एआई सिटी, भोपाल के लिए “कब तक क्या होगा” की कंप्यूट-रेडी टाइमलाइन।


 

मप्र का अगला कदम ‘एआई-रेडी’ डिलिवरी सिस्टम बनाना होना चाहिए
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की समिट सहभागिता के बाद अब मप्र का अगला कदम ‘एआई-रेडी’ डिलिवरी सिस्टम बनाना होना चाहिए। अगर रोडमैप, ट्रंक एंड टेक इंफ्रा और अनुमतियों की टाइमलाइन स्पष्ट हो गई, तो राज्य और राजधानी भोपाल देश का सबसे भरोसेमंद निवेश-गंतव्य बन सकते हैं। 
 मनोज मीक
अध्यक्ष, क्रेडाई भोपाल , फाउंडर, ‘कमाल का भोपाल’ अभियान