एवीएस न्यूज.भोपाल 


महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में मिलावटी और सिंथेटिक दूध के निर्माण से जुड़े मामले सामने आने के बाद मध्यप्रदेश में दूध की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग सतर्क हो गया है।

आम लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में विशेष निगरानी, निरीक्षण और सैंपलिंग अभियान शुरू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन मध्यप्रदेश के नियंत्रक मनोज पुष्प ने भोपाल सहित सभी जिलों के अभिहित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दूध से जुड़े खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच करने को कहा है।

 

डेयरी और चिलिंग प्लांट की होगी जांच
जारी आदेश के अनुसार अभियान के तहत जिले के सभी दूध चिलिंग प्लांट, डेयरी इकाइयां, दूध संग्रहण केंद्र, दूध निर्माण इकाइयां, थोक दूध विक्रेता अन्य संबंधित खाद्य व्यवसाय संचालक का निरीक्षण किया जाएगा। विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संदेहास्पद दूध और दुग्ध उत्पादों के पर्याप्त नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत लिए जाएं।

निरीक्षण के दौरान यदि दूषित, मिलावटी या सिंथेटिक दूध पाया जाता है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर प्रतिष्ठान को सील करने और सामग्री जब्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।  दूध की प्रारंभिक जांच के लिए मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब और मैजिक बॉक्स का उपयोग किया जाएगा, ताकि मौके पर ही दूध की गुणवत्ता और मिलावट की जांच की जा सके।


पुलिस और प्रशासन के साथ होगी संयुक्त कार्रवाई
विभाग ने निर्देश दिए हैं कि मिलावटी दूध, नकली दूध या खाद्य अपमिश्रण से जुड़ी गतिविधियां मिलने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग के साथ समन्वय बनाकर संयुक्त कार्रवाई की जाए।  साप्ताहिक अभियान के दौरान किए गए निरीक्षण, लिए गए नमूने, त्वरित जांच और की गई वैधानिक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट सभी जिलों को 31 जुलाई 2026 तक मुख्यालय भोपाल भेजनी होगी।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। विभाग का उद्देश्य प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा मिलावटखोरों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।