बड़झिरी के किसान संतोष कुमार की 30 कट्टे प्याज की पहली बिक्री 3,900 रुपए में, रणजीत सिंह की उपज को मिला सबसे ऊंचा भाव


  एवीएस न्यूज.भोपाल 
कृषि उपज मंडी समिति भोपाल ने मंगलवार से प्याज कारोबार के लिए नई व्यवस्था की शुरुआत हुई। भोपाल मंडी के इतिहास में पहली बार मंडी समिति के माध्यम से प्याज की सरकारी बोली लगाकर नीलामी की गई। पहले ही दिन किसानों से करीब 700 क्विंटल प्याज की आवक दर्ज हुई।

सरकारी नीलामी शुरू होने से किसानों और व्यापारियों में उत्साह देखा गया।
उप संचालक एवं मंडी सचिव नरेश परमार  प्याज की पहली सरकारी बोली लगाई और नई व्यवस्था के तहत ग्राम बड़झिरी के किसान संतोष कुमार ने अपनी 30 कट्टे प्याज की उपज मंडी में सबसे पहले घोष विक्रय के माध्यम से बेची। मंडी समिति की ओर से किसान का माला पहनाकर स्वागत किया गया। उनकी प्याज को वसीम ट्रेडर्स ने 3,900 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा।

इस मौके पर क्रेता फर्म के प्रतिनिधियों का भी मंडी समिति ने माला पहनाकर स्वागत किया। इस मौके पर दौरान मंडी निरीक्षक जीवन सिंह राजपूत, रघुवीर शर्मा, विनोद भार्गव, नसीम खान, इन्द्र मणि, राजीव मित्रा दुबे, राहुल और महेंद्र परिहार सहित मंडी समिति के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

 


 

 4,200 रुपए प्रति क्विंटल रहा सबसे ऊंचा भाव
मंडी में प्याज का सबसे ऊंचा भाव 4,200 रुपए प्रति क्विंटल रहा। यह प्याज मोहम्मद सलमान ने खरीदी। उन्होंने ग्राम खाईखेड़ा, जिला विदिशा के किसान रणजीत सिंह से अधिकतम मूल्य पर प्याज की खरीदी की। मंडी समिति ने किसान और क्रेता का माला पहनाकर स्वागत किया।
 

लंबे समय से थी सरकारी नीलामी की मांग
भोपाल मंडी में प्याज की सरकारी नीलामी शुरू होने से किसानों और व्यापारियों में खासा उत्साह देखने को मिला। किसान लंबे समय से प्याज की बिक्री के लिए सरकारी नीलामी व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे थे। मांग पूरी होने पर किसानों ने खुशी जताई।

मंडी समिति के अधिकारियों के अनुसार, नई नीलामी व्यवस्था से किसानों को उनकी उपज का बेहतर और पारदर्शी मूल्य मिलने की उम्मीद है। साथ ही प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए बाजार में कीमतों का पारदर्शी निर्धारण होने से उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलने की संभावना है।
 

आढ़त प्रथा खत्म होने की शुरुआत : नरेश परमार  
 भोपाल कृषि उपज मंडी समित के सचिव नरेश परमार ने कहा कि प्याज की सरकारी नीलामी शुरू होने से  लंबे समय से चली आ रही आढ़त प्रथा के खत्म होने की शुरूआत हुई है।

उन्होंने कहा कि सरकारी बोली से किसानों उन्हें अपनी उपज का वास्तविक और पारदर्शी भाव मिल सकता है, जबकि आढ़तियों और थोक व्यापारियों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में अचानक बदलाव से मंडी कारोबार की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
 

  व्यापारी बोले- आढ़त व्यवस्था का भी है कारोबार में महत्व
 मंडी के थोक प्याज कारोबारियों और आढ़तियों का कहना है कि मंडी में वर्षों से चली आ रही आढ़त व्यवस्था केवल कमीशन तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से किसानों की उपज की बिक्री, खरीदारों से संपर्क, माल की छंटाई, भुगतान और उठाव जैसी गतिविधियां भी संचालित होती हैं।

व्यापारियों का कहना है कि यदि आढ़त प्रथा पूरी तरह समाप्त की जाती है तो नई सरकारी नीलामी व्यवस्था में इन सभी प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी होगी। कारोबारियों ने कहा कि किसानों को बेहतर भाव मिलना जरूरी है, लेकिन व्यापार की पूरी प्रक्रिया भी व्यावहारिक और सुचारु रहनी चाहिए।