लोकायुक्त प्रकरण वाले अधिकारी को डीओ का जिम्मा
 पत्नी भी अभिहित अधिकारी के पद पर, जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने का दावा


एवीएस न्यूज . .भोपाल
मध्यप्रदेश के खाद्य एवं औषधि विभाग में अधिकारियों की पदस्थापना और प्रभार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिन दो अधिकारियों को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने प्रमोशन के लिए उपयुक्त नहीं पाया, उन्हें ही विभाग ने प्रमोशन वाले वरिष्ठ पदों का प्रभार दे दिया। इनमें एक अधिकारी के खिलाफ लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज होने और दूसरे के जाति प्रमाण पत्र को उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा निरस्त किए जाने का दावा किया जा रहा है।


  लोकायुक्त प्रकरण दर्ज होने के बाद मिला डीओ  का प्रभार
जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग में सागर पदस्थ फूड इंस्पेक्टर अरविंद पथरोल को विभाग द्वारा 20 जुलाई 2026 को वरिष्ठ पद डीओ  (नामित अधिकारी/अभिहित अधिकारी) का प्रभार सौंपा गया। आरोप है कि इससे कुछ दिन पहले ही 15 जुलाई 2026 को लोकायुक्त द्वारा उनके विरुद्ध प्रकरण क्रमांक 203/ई/26-27 दर्ज किया गया था। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि विभाग को लोकायुक्त प्रकरण की जानकारी थी, तो जांच के दौरान संबंधित अधिकारी को वरिष्ठ पद का प्रभार देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यह आशंका भी जताई जा रही है कि वरिष्ठ पद का प्रभार मिलने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।


 पत्नी को भी वरिष्ठ पद की जिम्मेदारी
इसी मामले में अधिकारी की पत्नी सुषमा पथरोल, जो सागर जिले में पदस्थ हैं, को भी डीओ /अभिहित अधिकारी का प्रभार दिए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने उन्हें प्रमोशन के लिए उपयुक्त नहीं पाया था। साथ ही उनका जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा निरस्त किए जाने की बात भी कही जा रही है।
 

प्रमोशन के लिए अपात्र तो प्रभार 
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि दोनों अधिकारियों को नियमित पदोन्नति के लिए उपयुक्त नहीं माना गया था, तो उन्हें उसी स्तर के वरिष्ठ पदों का प्रभार किस आधार पर दिया गया? क्या विभाग में प्रभार देने के लिए अलग नियम लागू होते हैं और यदि हां, तो इन मामलों में उनकी प्रक्रिया क्या रही? वहीं, आरोप लगाने वालों ने इसे विभागीय स्तर पर नियमों की अनदेखी बताते हुए ‘बैकडोर प्रमोशन’ जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, भ्रष्टाचार के इन आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकती है।
 

विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
एक अधिकारी के खिलाफ लोकायुक्त प्रकरण दर्ज होने के कुछ ही दिनों बाद वरिष्ठ पद का प्रभार और दूसरे अधिकारी के प्रमोशन संबंधी प्रतिकूल रिकॉर्ड के बावजूद जिम्मेदारी दिए जाने के दावों ने खाद्य एवं औषधि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में अब यह महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इन नियुक्तियों के आधार, नियमों और दोनों अधिकारियों की पात्रता को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला विभागीय पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।