प्रशिक्षण की कमी और ट्रैफिक नियमों के पालन न करने से राजधानी में बढ़ी सड़क दुर्घटनाएं
भोपाल में रोजाना सड़क हादसे में जा रही लोगों की जान
नाबािलग भी सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ा रहे वाहन,
ट्रैफिक पुलिस वाहन चालकों को नियमों का पालन कराने में हुई नकामयाब
शिवनारायण सोनी, भोपाल। राजधानी में तेजी से बढ़ रहे सड़क हादसे चिंता का कारण बन गया है। रोजाना सड़क हादसे में किसी के बेटा-बेटी की मौत हो रही है तो किसी महिला के मांग का सिंदूर भी उजड़ रहा है। शराब पीकर और अनियंत्रित तेज गति से वाहन चलाना भी सड़क हादसे का कारण है। कुछ जानकारों की माने तो सड़क हादसों का सबसे प्रमुख कारण बिना प्रशिक्षण प्राप्त कर थोड़ी की जानकारी के साथ वाहन चलाना है, जिसमें आए दिन लोग मौत का शिकार हो रहे हैं, जो सबसे बड़ी समस्या है। वहीं कुछ जानकारों का कहना है कि आरटीओ द्वारा अधिकृत ठेके पर दी गईं एजेंसियां जो ड्राइविंग लाइसेंस बनाती हैं वे मोटर वीकल एक्ट के नियमों का पालन न करते है सिर्फ पैसा लेकर लाइसेंस बनावा देते हैं। चाले वह व्यक्ति वाहन चालने के काबिल हो अथवा न हो। उन एजेंसियों को इससे कोई मतलब नहीं रहता। वास्तव में वाहन चलाने का प्रशिक्षण लेने के बाद उसका प्रमाण मिलने के बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाना चाहिए। इससे सड़क हादसे में काफी कमी आएगी। वहीं कई माताओं की गोद उजड़ने से बच जाएगी। इसके साथ ही अभिभावकों को अपने नबालिग और बिना प्रशिक्षण प्राप्त बच्चों को वाहन चलाने के लिए नहीं देना चाहिए।
राजधानी भोपाल में सड़क हादसों के आंकड़े डराने वाले हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार बीते 5 सालों में 900 से ज्यादा लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई है, जिनमें से करीब 70 प्रतिशत यानी 543 लोगों ने हेलमेट नहीं पहना था। भोपाल में 16 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां सबसे अधिक गंभीर हादसे होते हैं। भोपाल में 108 एंबुलेंस ने 2025 में जनवरी से अगस्त तक सड़क हादसे में 3965 घायल लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।
राजधानी में हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण कई घरों के चिराग बुझ गए हैं। बढ़ते ट्रैफिक के बीच आज सुरक्षित वाहन चलाना काफी मुश्िकल हो गया है। दो पहिया, तीन पहिया, चार पहिया या भारी वाहन चालक ट्रैफिक नियमों को ध्यान में न रखकर वाहन दौड़ा रहे हैं। कोई भी कहीं भी तेजी से वाहन चलते हुए आगे भगने की होड़ में लगा रहता है। इसके साथ ही लेफ्ट साइड को भी क्लियर नहीं रखते अपने बड़े वाहन खड़े करने से नगर में कई बार जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है। वहीं आगे भागने की होड़ में या ओवटेक करने की चाहत में अक्सर वहन दुर्घटना ग्रस्त हो जाते हैं।
खराब सड़क भी दुर्घटना का कारण
सड़कों पर दरारें, जगह- जगह कट, अंधे मोड़, संकेतकों-रेलिंग का अभाव, घाट, सड़क निर्माण में तकनीकी खामियां ये कुछ वजहें जाने-अनजाने प्रदेशभर में सड़क हादसों को जन्म दे रही हैं। इंजीनियरिंग में गड़बड़ी जानलेवा साबित हो रही है। सूबे में ऐसी सड़कों की लंबाई 203 किलोमीटर है। यह सामने आया है परिवहन विभाग की रोड सेफ्टी शाखा की रिपोर्ट में, जो बताया है सड़क हादसों का कारण है।
अधिक मामले 16 से 30 वर्ष आयु वालों के
मध्यप्रदेश में वर्ष 2025 में जनवरी से जून के बीच 69 हजार 951 ट्रॉमा केस दर्ज किए गए। इनमें भी सबसे अधिक मामले 16 से 30 वर्ष आयु वालों के हैं। इनकी संख्या 40 हजार 441 रही। यह कुल दुर्घटनाओं का 57.81 प्रतिशत है। यह आंकड़े 108 एंबुलेंस की रिपोर्ट के हैं। वहीं 2023 में मध्यप्रदेश में 13 हजार से ज्यादा लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हुई है। 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 14 हजार से भी अिधक हो गई।
2025 में सड़क हादसे में घायलों का आंकड़ा
जनवारी: 606
फरवारी : 483
मार्च : 468
अप्रैल : 470
मई : 616
जून : 484
जुलाई : 432
अगस्त : 406
108 एंबुलेंस द्वारा हॉस्पिटल पहुंचाया गया।
सड़क हादसों का प्रमुख कारण
1. बिना प्रशिक्षण प्राप्त कर सड़काें पर वाहन दौड़ाना
2.वाहनों का ओवर स्पीड होना
3. शराब पीकर वहन चालाना
4. वाहनों की खराब स्थिति
5. सड़कों की खराब हालत
6. मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना
7. आगे भागने की होड़ में अनियंत्रित वाहन चलाना8. ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर लापरवाही से वाहन चलाना
प्रैक्टकल जानकारी न होना दुर्घटना की वजह

आज के युवाओं को प्रैक्टिकल जानकारी नहीं होने के कारण वे हादसे का शिकार हो रहे हैं। जानकारी के अभाव में न तो वे ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं और न ही गाड़ी को नियंत्रित चलाने का अभ्यास रहता है। सिर्फ वे वाहनों को दौड़ाना ही जानते हैं। ड्राइविंग एक नशा है, जैेसे शराब का नशा होता है। नए बच्चों के हाथ में जैसे ही नया वाहन आता है वे तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। इसका दुष्परिणाम यह होता है कि वे हादशे में अपाहिज हो जाते हैं या फिर उनके अभिभावक उनको खो देते हैं। इन्हें वाहन चलाने से पहले पूर्ण प्रशिक्षण लेना चाहिए, जिससे कहां पर कैसे गाड़ी चलाना है उसका पूरा अभ्यास हो जाएगा और ट्रैफिक नियमों का भी पूर्णरूप से पालन करेंगे। हम बच्चों को प्रोत्सािहत करने के लिए और हादसे से बचाने के लिए स्कूल-कॉजेल में जाकर उन्हें जागरूक करते हैं, साथ ही ट्रैफिक नियमों की पूरी जानकारी देते हैं। बच्चों को बताते हैं जैसे स्कूल कॉलेज जाते समय जूता पहनना नहीं भूलते वैसे ही वाहन चलाते समय हेल्मेट लगाना नहीं भूलना चाहिए।
बसंत कोल, डीसीपी, ट्रैफिक पुलिस, भोपाल
टेस्ट लिया जाता है
भोपाल आरटीओ में लाइसेंस जारी करने से पहले आवेदक के फार्म की जांच की जाती है। इसके बाद प्रभारी अधिकारी टेस्ट लेता है, जिसमें दो पहिया या चार पहिया वाहन आवेदकों से वाहन चलवा कर देखा जाता है। इसके बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है।
जितेन्द्र शर्मा, आरटीओ, भोपाल
आरटीओ की अधिकृत एजेंसियां नहीं करती नियमों का पालन

मोटर एक्ट के तहत जो ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाता है उसमें उन नियमों का पालन ही नहीं किया जाता है। इन दिनों ड्राइविंग लाइसेंस बनने के लिए आरटीओ द्वारा अधिकृत एजेंसियां अपने मूल कर्तव्यों का पालन ही नहीं करतीं हैं। लाइसेंस बनाने की व्यवस्था में दोष है। इसका दूसरा मुख्य कारण है ठेके पर कामों को देना। उन ठेकेदारों का उद्देश्य िसर्फ पैसा कमाना रहता है। उनको सिर्फ पैसा चाहिए, सामने वाला व्यक्ति वाहन चलाना जानता है या नहीं उनको इससे कोई मतलब नहीं रहता। लाइसेंस देने के लिए विधवित उनको प्रशिक्षण देना चाहिए, और प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही किसी भी व्यक्ति को वाहन चलाने का लाइसेंस देना चाहिए। बिना प्रशिक्षण के गाड़ी चलाने वाला सड़क पर सिर्फ गाड़ी दौड़ा सकता है। उसे न तो ट्रैफिक नियम मालूम होते हैं और न ही गाड़ी को नियंत्रित करने की जानकारी होती है, जिसके कारण वह दुर्घटना का शिकार होता है। आज से 15 से 20 साल पहले पूर्ण प्रशिक्षण के बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस देते थे। आज ठेके की एजेंसियां और दलाल पैसा लेकर लाइसेंस बनवा देते हैं। शहर में इन दिनों ई-रिक् क्षा जितने भी चल रहे हैं उनमें अिधकांश लोग बिना प्रशिक्षण के ही गाड़ी चलाते हैं। सरकार को लापरवाही करने वाले अधिकृत ठेके की एजेंसियों पर कार्रवाई करना चाहिए। वैसे तो ये ठेके की व्यवस्था तो बंद करना चाहिए। जिसके पूर्ण प्रशिक्षण लेकर ही वाहन चलाने का लाइसेंस मिल सके।
श्याम सुंदर शर्मा
अध्यक्ष, सड़क परिवहन कर्मचारी अधिकारी उत्थान समिति मध्य प्रदेश
शराब पीकर वाहन चलाने से हाती है अिधकांश दुर्घटनाएं

बच्चों में वाहन चालने का उत्सह रहता है। कुछ बच्चे थोड़ा सा चलाना सीख कर सड़क पर उतर आते हैं। उन्हें न तो नियमों की जानकारी रहती और और न ही वाहनों पर कंट्रोल रहता है। वे तेजी से और लापरवाही से वाहन चलते हैं, जिससे वे आए दिन दूसरे वाहनों से या फिर डिवाइडर से जाकर टकरा जाते हैं। यहां तक की बच्चे नया वाहन हाथ लगते ही तेजी और लापरवाही से वाहन चालते हैं, जिससे कई बार खड़े वाहनों में घुस जाते हैं और अपनी जान को गवां देते हैं। इसके अलावा मुख्य कारण यह भी है कि नवयुवक रात में घर से दूर ढाबों पर खाना खाने या फिर चाय नास्ता करने जाते हैं, वहां पर खाने के साथ शराब भी पीते हैं। फिर देर रात वाहां से निकलते हैं। नशा होने के कारण उनसे वहन संभलता नहीं है और डिबाइटर या खड़े वाहनों में पीछे से टकरा कर दुर्घाटना ग्रस्त हो जाते हैं। इसके लिए पुलिस प्रशासन को भी सख्ती से जांच कार्रवाई करना चाहिए। इससे शराब पीकर वाहन चलाने वालों में कमी आएगी और हादसे भी कम होंगे। उदाहरण के तौर पर इंदौर में रात में वहान चालाने वालों की लगातार चैकिंग की जाती है। ऐसा ही हमारे राजधानी में भ्ाी होना चाहिए। जिससे हम अपनी नई पीढ़ी को दुर्घटना से और मौत के मुंह में जाने से बचा सकते हैं।
ठाकुर लाल राजपूत
अध्यक्ष, भोपाल ट्रांसपोर्ट कंपनीज एसोसिएशन
सीट बेल्ट और हेलमेट का उपयोग न करने वालों को ज्यादा चोट की संभावना

हमारी एंबुलेंस सेवा पूरे निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ लोगों की सेवा के लिए तत्पर है। एक्सीडेंट के मामले में देखा गया है की जो मामलों में सीट बेल्ट और हेलमेट का उपयोग नहीं करते हैं, उसमें मरीज को चोट लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हमारा सबसे अपील है कि सभी ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए गाड़ी चलाएं एवं किसी प्रकार की आपातकालीन स्थिति होने पर जीवन रक्षक 108 एंबुलेंस से संपर्क करें, जिसमें जीवन रक्षक उपकरण एवं प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद होते हैं, जो जरूरत पड़ने पर आपकी जीवन रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तरुण सिंह परिहार,
सीनियर मैनेजर, मध्य प्रदेश 108 एंबुलेंस सेवा

