सिसकियों से सिलिकॉन तक का सफर, त्रासदी के 40 साल बाद अपनी शर्तो पर खड़ा हुआ भोपाल : मीक
अब हमें सहानुभूति नहीं, हिस्सेदारी चाहिए, भोपाल मांग रहा हैरी-डेवलपमेंट पैकेज
एवीएस न्यूज. भोपाल
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए 3 दिसंबर एक गहरा घाव है, लेकिन 41 साल बाद, अब वक्त है कि हम केवल घाव न देखें, बल्कि उन खोए हुए दशकों की बात करें, जिसने भोपाल को आर्थिक रूप से पीछे धकेल दिया। भोपाल को अब दया नहीं, भोपाल को री-डेवलपमेंट पैकेज चाहिए। तीन दिसंबर की तारीख आते ही भोपाल की हवा में एक भारीपन तैरने लगता है। सायरन की वो आवाजें, वो भागती हुई रात और वो अंतहीन सन्नाटा... हम सब उसे याद करते हैं। हममें से कइयों ने उस दौर से आज तक के भोपाल को जिया है, त्रासदियों की श्रंखला को भोगा है, लेकिन एक कॉलमिस्ट और इस शहर का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, आज मैं उस रसायनिक धुंध से परे देखने का साहस कर रहा हूं। हम कमाल का भोपाल बनाने का सपना देख रहे हैं, लेकिन हमें उस कड़वे आर्थिक सच को स्वीकारना होगा जो पिछले चार दशकों से सदमे और भावनाओं की आड़ में छिपा रहा। सच यह है कि भोपाल ने केवल अपने लोग नहीं खोए, उसने अपना समय और संसाधन खोया है। यह बात कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर और क्रेडाई के अध्यक्ष मनोज मीक ने कही।

-खोया हुआ दशक और आर्थिक नाकाबंदी
उन्होंने कहाकि आंकड़ों नजर डाले तो 1984 में भोपाल एक उभरता हुआ इंडस्ट्रियल हब था। फिर 1990 का दशक आया - भारत में आर्थिक सुधारों और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की आंधी आई। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों ने इस मौके को लपका। आज बेंगलुरु की जीडीपी लगभग 110 बिलियन डॉलर और हैदराबाद की 75 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। लेकिन भोपाल उस वक्त अपनी सांसें गिन रहा था। जब दूसरे शहर सॉफ्टवेयर कोड लिख रहे थे, भोपाल मेडिकल रिपोर्ट पढ़ रहा था। बीएमजे ओपन 2023 का शोध चीख कर कहता है कि गैस पीडि़तों की दूसरी पीढ़ी में भी रोजगार क्षमता कम हुई है और वे विकलांगता के शिकार हुए हैं। यह केवल स्वास्थ्य संकट नहीं था, यह भोपाल के खिलाफ एक अघोषित आर्थिक नाका बंदी थी जिसने हमारी ह्यूमन कैपिटल को तोड़ दिया।
कमाल का भोपाल नागरिक अभियान इसका जीवंत प्रमाण है। भोपाल दुनिया का एकमात्र शहर है जो केव से कोड की यात्रा तय कर रहा है- केव हमारे पास भीमबेटका की 30,000 साल पुरानी रॉक आर्ट है जो मानव सभ्यता का आदिम दस्तावेज है। कोड- हम भौंरी के 3707 एकड़ में नेक्स्ट जनरेशन नॉलेज एंड एआई सिटी की नींव रख रहे हैं। भेल टाउनशिप की रिक्त भूमि का स्मार्ट इंडस्ट्रीज के लिए समुचित पुनर्प्रयोजन प्रक्रियाधीन है। सरकार को सौंपी गई कमाल का भोपाल रिपोर्ट महज एक रिसर्च नहीं, यह भोपाल के भविष्य का रनवे है।
- लॉजिस्टिक्स का हृदय और ग्रीन कैपिटल
कर्क रेखा पर स्थित भोपाल भारत का दिल है। क्रेडाई के गूगल अर्थ आधारित अध्ययन के अनुसार भोपाल का 500 किमी का दायरा भारत का सबसे बड़ा लैंड लॉक्डअर्बन जोन है। जहां से देश के 50 फीसदी से अधिक अर्बनफुट प्रिंट्स तक मात्र 10 घंटे में पहुंचा जा सकता है। लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए जो लोकेशन एडवांटेज हमारे पास है, वह किसी के पास नहीं। राजधानी क्षेत्र में दो यूनेस्को वल्र्ड हेरिटेज साइट्स है। हमारे पास राजाभोज का दिया हुआ जल-प्रबंधन और स्थापत्य आधारित नगर योजना है जो आज भी क्लाइमेट चेंज के दौर में दुनिया के लिए मॉडल है। हमारे पास नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व और रामसर साइट्स का ग्रीन कवर है जो इसे देश की सबसे लिवेबल राजधानी बनाता है।

-अब हमें क्या चाहिए? विशेष पैकेज, दया नहीं
क्रेडाई अध्यक्ष मनोज मीक ने कहाकि भोपाल अब सहानुभूति नहीं मांगता। हम दान नहीं, निवेश और साझेदारी मांग रहे हैं। केन्द्र और राज्य सरकार को समझना होगा कि भोपाल का समग्र विकास केवल एक शहर का विकास नहीं, बल्कि भारत के हार्ट-लैंड को पुनर्जीवित करना है। हमें जापान या यूरोप की तर्ज पर एक विशेषरी-डेवलपमेंट पैकेज की आवश्यकता है। दुनिया के टेक-लीडर्स, इन्वेस्टर्स और पॉलिसी मेकर्स के लिए संदेश साफ है आपने बेंगलुरु को उभरते देखा, गुरुग्राम और हैदराबाद की रफ्तार देखी। अब आइये, भारत के सबसे खूबसूरत, शांत और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में भविष्य का निर्माण कीजिए। भोपाल के पिछले पन्ने पर भले ही त्रासदी का दाग था, लेकिन इसका अगला पन्ना सिलिकॉन की चमक और कमाल की उम्मीद से लिखा जा रहा है। वह शहर, जो कभी अपनी सिसकियों के लिए जाना गया, अब अपनी सक्षमताओं के लिए जाना जाएगा। यही 3 दिसंबर का असली सबक है और यही कमाल का भोपाल अभियान का संकल्प है।

