पतंजलि का दावा: च्यवनप्राश पर शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित, तनाव से कोशिकाओं की सुरक्षा के मिले संकेत
पतंजलि के वैज्ञानिकों ने महर्षि च्यवन से सम्बंधित लोकप्रचलित कथा को आधुनिक विज्ञान के साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत कर जीवंत कर दिया है - आचार्य बालकृष्ण


एवीएस न्यूज..हरिद्वार 


पतंजलि ने दावा किया है कि उसके स्पेशल च्यवनप्राश पर किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका प्रायोगिक जरा-विज्ञान में प्रकाशित किया गया है। कंपनी के अनुसार, अध्ययन में च्यवनप्राश के नियमित सेवन से तनाव की परिस्थितियों में कोशिकाओं की सुरक्षा, मांसपेशियों की कार्यक्षमता बनाए रखने और दीर्घायु से जुड़े संभावित लाभों के संकेत मिले हैं।

 


पतंजलि के महासचिव आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह अध्ययन आयुर्वेद में वर्णित महर्षि च्यवन और च्यवनप्राश की पारंपरिक अवधारणा को आधुनिक वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा में च्यवनप्राश को लंबे समय से रोग प्रतिरोधक क्षमता, स्वास्थ्य और दीर्घायु से जोड़ा जाता रहा है।


यह अध्ययन सी.एलिगेंस नामक मॉडल जीव पर किया गया 
पतंजलि के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि यह अध्ययन सी.एलिगेंस नामक मॉडल जीव पर किया गया, जिसका उपयोग विश्वभर में वृद्धावस्था और तनाव संबंधी जैविक अनुसंधानों में किया जाता है। उनके अनुसार, शोध में पाया गया कि च्यवनप्राश के सेवन से हीट स्ट्रेस के कारण होने वाली कोशिकीय क्षति में कमी, जीवनकाल में वृद्धि, भोजन ग्रहण करने की क्षमता में सुधार तथा मांसपेशियों की गतिशीलता बेहतर होने के संकेत मिले।


  यह अध्ययन आयुर्वेद और आधुनिक जीवविज्ञान के समन्वय का है उदाहरण 
शोधकर्ताओं का दावा है कि च्यवनप्राश में मौजूद तत्व एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुणों से युक्त हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से कोशिकाओं की रक्षा करने और शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायक हो सकते हैं। पतंजलि का कहना है कि यह अध्ययन आयुर्वेद और आधुनिक जीवविज्ञान के समन्वय का उदाहरण है तथा पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति पर वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।