रणनीतिक विविधीकरण और मजबूत मांग ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र को वैश्विक उथल पुथल से सुरक्षित रखा- एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी रिपोर्ट्स
• घरेलू ईंधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बेहतरीन रिफाइनिंग मार्जिन बनाए रखने के लिए भारतीय रिफाइनरियां होर्मुज जलडमरूमध्य में आई रुकावट से समझदारी से निपट रही हैं
• दुनियाभर में उतार-चढ़ाव के बावजूद कोयला भारत की ऊर्जा प्रणाली के लिए के किफायती और मजबूत आधार बना हुआ है
एवीएस न्यूज.मुंबई
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के ताजा विश्लेषण के मुताबिक, वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उल्लेखनीय परिवर्तन के बीच भारत का ऊर्जा क्षेत्र मजबूत और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता दिखा रहा है। हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कमोडिटी के प्रवाह को लगातार बदल रहे हैं, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और उभरती डिजिटल मांग पूरी करने के लिए विविध सप्लाई चेन, घरेलू ऊर्जा संसाधनों और बुनियादी ढांचे की तैयारी का सफलतापूर्वक लाभ उठा रहा है।
तेल, बिजली, डेटा सेंटरों और कोयला बाजारों में एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के विशेषज्ञों को एक बात समान दिखती है और वह है भारत भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए खुद को रणनीतिक तौर पर तैयार करते हुए दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है।
तेल बाजार में घटनाक्रमः भारत को बेहतर विकल्प की जरूरतः कच्चे तेल के विविध मार्ग, बड़े स्टोरेज/इनवेंटरी बफर और एलपीजी के आयात समेत आयात से जुड़ी निर्भरता कम करने वाले विश्वसनीय विकल्प जहां खाड़ी देशों पर संरचनात्मक निर्भरता उजागर हुई है।
भारत के संकट प्रबंधन ने निकट भविष्य में काम किया है, लेकिन लंबे समय तक रुकावट रहने से निश्चिंतता की गुंजाइश कम हो जाती है, खासकर साल के आखिर तक पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के मामले में (पढ़ें एसएंडपी ग्लोबल में कार्यकारी निदेशक एवं डाउनस्ट्रीम ऑयल रिसर्च के प्रमुख- एशिया, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और सीआईएस प्रेमाशीष दास द्वारा “Strait of Hormuz shock redraws India’s oil market strategy” विषय पर लिखित रिपोर्ट)
डिजिटल क्रांति को ताकतः तत्काल ईंधन सुरक्षा से परे जाकर भारत वैश्विक डेटा सेंटर क्षेत्र की विस्फोटक वृद्धि का फायदा उठाने की अनूठी स्थिति में है। भारत में डेटा सेंटर पावर की मांग सालाना 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर से बढ़ने के अनुमान के साथ यह देश एआई वर्कलोड और सीमा पार क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक रणनीतिक केंद्र के तौर पर उभर रहा है। इसके अलावा, भारत का पावर ग्रिड अपने पड़ोसी देशों की तुलना में काफी हद तक स्थिर रहा है क्योंकि एलएनजी आयात पर निर्भरता कम है और घरेलू कोयला उत्पादन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। (पढ़ें- एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी में बिजली एवं अक्षय ऊर्जा अनुसंधान के वैश्विक प्रमुख जेनी यांग द्वारा “Powering the Digital Boom” विषय पर लिखित रिपोर्ट)
रणनीतिक स्थिरता लाने वाले कारक के तौर पर कोयलाः ग्रिड की स्थिरता को बनाए रखने में कोयले ने एक महत्वपूर्ण बैलेंसिंग ईंधन का काम किया है जिससे इस पर निरंतर निर्भरता बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर गैस की कीमतों में उतार चढ़ाव रहने से कोयले की मांग बहुत मजबूत बनी हुई है जिससे भारत की ऊर्जा प्रणाली के लिए इसने एक किफायती और मजबूत आधार सुनिश्चित किया है। (पढ़ें एसएंडपी ग्लोबल में वरिष्ठ प्रबंधक- एपीएसी एवं ईएमईए तापीय कोयला- प्रितीश राज द्वारा “Coal as a Strategic Stabilizer” विषय पर लिखित रिपोर्ट)






