सिंजेंटा का स्टेम फ्लाई अभियान, मध्यप्रदेश के 400 गाँवों में सोयाबीन किसानों को मिला लाभ
भोपाल। सोयाबीन उत्पादन को प्रभावित करने वाले तने की मक्खी (स्टेम फ्लाई) के प्रकोप के खतरे के बीच, मध्य प्रदेश में चलाए गए एक माह लंबे जागरूकता अभियान ने 400 गाँवों के 4,000 से अधिक किसानों को इस विनाशकारी कीट से अपनी फसल को बचाने के व्यावहारिक उपायों से सुसज्जित किया है।
यह अभियान सिंजेंटा इंडिया ने इंटरनेशनल रिसोर्सेज फॉर फेयरर ट्रेड (IRFT) के साथ मिलकर चलाया। इसमें इंदौर, उज्जैन और देवास ज़िलों के सोयाबीन किसानों को स्टेम फ्लाई की पहचान और उससे बचाव के प्रभावी उपाय सिखाए गए। ये प्रशिक्षण कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) की सलाह से चुने गए विशेषज्ञों ने दिए।
मध्यप्रदेश भारत के लगभग 50% सोयाबीन उत्पादन का केंद्र है, जहाँ करीब 5.47 मिलियन टन उत्पादन होता है। कृषि अनुसंधानों के अनुसार, सोयाबीन स्टेम फ्लाई का प्रकोप 30% से 50% तक पैदावार घटा सकता है। यह कीट फसल की शुरुआती अवस्था में तनों को खोखला कर देता है, जिससे पौधे मुरझा जाते हैं, उनकी बढ़त रुक जाती है और कई बार पूरी फसल नष्ट हो जाती है।
डॉ. आर. पी. शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक और प्रमुख, केवीके देवास ने समय पर रोकथाम की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “स्टेम फ्लाई एक बड़ी चुनौती है जो अगर नियंत्रण में न लाई जाए तो किसानों की आय पर सीधा असर डाल सकती है। लेकिन सही जागरूकता, रोकथाम की तकनीकें और एकीकृत कीट प्रबंधन से किसान नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं और बेहतर पैदावार ले सकते हैं।”
किसानों के लिए ऐसे नुकसान का सीधा असर आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। राज्य की औसत सोयाबीन उत्पादकता लगभग 1,200 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। केवल 30% पैदावार कम होने से भी किसानों की आमदनी प्रति हेक्टेयर ₹12,000–15,000 तक घट सकती है।डॉ. के. सी. रवि, चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर, सिंजेंटा इंडिया ने बताया कि सही हस्तक्षेप से किसान इन नुकसानों से बच सकते हैं और हर हेक्टेयर से अतिरिक्त आमदनी भी कमा सकते हैं।
उन्होंने कहा, “इस अभियान के ज़रिए हमारा उद्देश्य केवल जागरूकता तक सीमित नहीं था, बल्कि किसानों को ऐसे व्यावहारिक समाधान देना था जिन्हें वे तुरंत अपने खेतों में लागू कर सकें। जब किसान विज्ञान, प्रशिक्षण और वास्तविक आमदनी की सुरक्षा का रिश्ता समझते हैं, तो तकनीकों को अपनाने की दर बढ़ती है और पुरेसमुदाय को लाभ मिलता है।”
सिंजेंटा की
सीएसआर पहलके तहत यह अभियान संरचित प्रशिक्षण सत्रों और मोबाइल वैन द्वारा व्यापक पहुँच का संगम था। कुल 4,490 किसानों को सीधे प्रशिक्षण मिला, जबकि हज़ारों और किसान 441 गाँवों में मोबाइल वैन अभियानों के माध्यम से जुड़े। भारत हर साल 14 मिलियन टन से अधिक सोयाबीन पैदा करता है, ऐसे में बड़े पैमाने पर कीट-रोधी क्षमता विकसित करना बेहद ज़रूरी है। मध्यप्रदेश का यह स्टेम फ्लाई प्रबंधन अभियान, अपनी पहुँच और प्रभाव दोनों में, अब एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है जिसे पूरे देश के सोयाबीन बेल्ट में लागू किया जा सकता है।

