भोपाल। अगर नीति और नियमों में व्यापक सुधार किया जाए, तो भारत के 30 रुपए करोड़ रुपए के बीज उद्योग से सालाना 800 करोड़ रुपये से ज्यादा अतिरिक्त आर्थिक मूल्य पैदा किया जा सकता है। इससे किसानों तक बेहतर किस्में जल्दी पहुंचेंगी और भारत का वैश्विक बीज व्यापार में हिस्सा लगभग 1 फीसदी से बढक़र 2035 तक 10 फीसदी  तक पहुंच सकता है, ऐसा फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया  की एक नई रिपोर्ट ने बताया।


भारतीय बीज उद्योग में व्यापार करने में आसानी , समग्र नीतिगत सुधारों के माध्यम से विकास को गति देना नामक इस रिपोर्ट को फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया  की 9वीं वार्षिक आम बैठक और सम्मेलन के दौरान लांच किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक अगर नियमों को आसान बनाया जाए तो भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। इन सुधारों से एक औसत बीज कंपनी हर साल 3-5 नई किस्में पेश कर सकती है,अनुसंधान और विकास में ज्यादा निवेश कर सकती है और किसानों तक नई तकनीक जल्दी पहुंचा सकती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बीज उद्योग को हर साल करीब 300 करोड़ रुपए  का नुकसान नियमों में बाधाओं के कारण होता है, खासकर लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन में देरी के कारण। इसके अलावा, अनावश्यक किस्म परीक्षण, राज्यों और केंद्र के नियमों में असंगति और जटिल प्रक्रियाएं विशेषकर एमएसएमई को प्रभावित करती हैं।


पीपीवीएफआरए के चेयरपर्सन डॉ. त्रिलोचन मोहापात्रा ने कहा कि बौद्धिक संपदा  की सुरक्षा इन बाधाओं को दूर करने की कुंजी है। उन्होंने कहाकि ारत ने इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है और आगे बढऩे के लिए एक मज़बूत आईपी ढांचा बेहद ज़रूरी है। ब्रीडर्स और किसानों के अधिकारों की रक्षा न सिर्फ़ रिसर्च में निवेश को बढ़ावा देती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि नई तकनीक बिना देर किए किसानों तक पहुँचे।  आईपी सुरक्षा के साथ-साथ, आवेदनों की समय पर मंजूरी भी उतनी ही अहम है और यही हमारी अथॉरिटी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।


कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव (बीज) अजीत के. साहू ने कहाकि सरकार बीज क्षेत्र की वृद्धि के लिए सभी चुनौतियों को दूर करने की दिशा में काम कर रही है। साथी जैसी पहल बीजों की ट्रेसबिलिटी को और मजबूत बनाएगी और किसानों तक अच्छी क्वालिटी के बीज समय पर पहुंचाएगी। मैं बीज उद्योग का स्वागत करता हूं कि वह वैल्यू चेन अप्रोच अपनाए और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप फॉर एग्रीकल्चर वैल्यू चेन डेवलपमेंट  जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग ले।