भोपाल। नई जीएसटी व्यवस्था परिवर्तनकारी और व्यापार जगत के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, क्योंकि इसके अंतर्गत कर संरचना को सरल और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। मेरा मानना है कि इन बदलावों से जहां एक ओर उपभोक्ता-खरीदशक्ति में वृद्धि होगी और मांग में सुधार आएगा, वहीं दूसरी ओर छोटे व मझोले व्यापारियों को कर प्रणाली की जटिलताओं से काफी हद तक छुटकारा मिलेगा। यह बात देवराज बवेजा अध्यक्ष, व्यापार महासंघ ने कही।

उन्होंने कहाकि इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, निर्माण सामग्री तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर दर घटने से इनकी कीमतें कम होंगी, जिससे विक्रय बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट और रिटर्न प्रक्रिया में भी सहजता आने से कारोबारियों को प्रशासनिक स्तर पर राहत मिलेगी।
बवेजा ने कहाकि  लक्ज़री व उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर बढ़े कर दरों से वहाँ की मांग में कमी आ सकती है।

ब्रांडेड वस्त्र, फैशन उत्पाद, गहने और लक्जरी उपभोक्ता सामग्री बेचने वाले व्यवसायों को अपने विपणन एवं मूल्य निर्धारण की रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त मौजूदा स्टॉक, बिलिंग सिस्टम, एमआरपी लेबल और पैकेजिंग में बदलाव करने में व्यापारियों को प्रारंभिक समय और लागत लग सकती है। यदि यह बदलाव सुचारु रूप से लागू हो जाता है तो उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर वस्तुएं मिलेंगी, कारोबारियों को सरल कर प्रणाली का लाभ मिलेगा और अर्थव्यवस्था में नई गति आएगी। व्यापार जगत व सरकार के बीच सहयोग से यह सुधार भारतीय व्यापार व्यवस्था को और सुदृढ़ एवं प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगा।