एवीएस न्यूज.. नई दिल्ली 
 भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की महिला सशक्तिकरण इकाई ब्रिक्स सीसीआई डब्लूई द्वारा आयोजित एक वैश्विक पैनल में यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकला कि नवप्रवर्तन और उद्यमशीलता के माध्यम से लैंगिक समानता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लोकतांत्रिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरक है। 
क्रियान्वयन करने वालों से नवप्रवर्तकों तक एआई में महिला उद्यमशीलता की दिशा में दृष्टिकोण बदलने का आह्वान विषय पर चर्चा के दौरान उपक्रम लगाने और पारिस्थितिकी नेतृत्व में महिलाओं को केंद्र में रखा गया। इस सत्र में वैश्विक नेता, उद्यमी, निवेशक और पारितंत्र निर्माताओं ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे एआई को समावेशी प्रतिभाग और महिलाओं के नेतृत्व में नवप्रवर्तन के जरिए लोकतांत्रिक बनाया जा सकता है। 
स्वागत भाषण देते हुए ब्रिक्स सीसीआई के वाइस चेयरमैन समीप शास्त्री ने एआई में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और समावेशी नवप्रवर्तन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि  “आज भारत वैश्विक एआई पारितंत्र में एक मजबूत आवाज के तौर पर उभर रहा है। एआई को महज शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि समावेशी भी होना आवश्यक है। जैसा कि भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करने जा रहा है, हमारा लक्ष्य टेक्नोलॉजी, डिजिटल नवप्रवर्तन, उद्यमशीलता और जिम्मेदार एआई विकास में सहयोग मजबूत करना है।” 
ब्रिक्सी सीसीआई डब्लूई (महिला सशक्तिकरण) की अध्यक्ष और शीएटवर्क की संस्थापक सुश्री रूबी सिन्हा ने एआई के उद्भव के मौजूदा चरण को नए सिरे से परिभाषित कर माहौल बनाते हुए कहाकि एआई अब भावी टेक्नोलॉजी नहीं रह गया है, बल्कि यह मौजूदा परिदृश्य के आधारभूत ढांचे में समाहित है। भारत की एआई की यात्रा अपने व्यापक स्तर, नवप्रवर्तन और प्रभाव को लेकर विश्व का ध्यान खींच रही है। प्रधानमंत्री के विजन के मुताबिक मौजूदा एआई समिट 2026 का ध्यान टेक्नोलॉजी के उपयोग को लोकतांत्रिक बनाने पर है जिसमे लिंग समानता पर विशेष ध्यान है। दशकों से महिलाएं महज पहुंच की मांग कर रही थीं। आज हम उस टेबल पर एक सीट मांगने के बजाय स्वयं टेबल को डिजाइन करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।