विजेता को 4,00,000 रुपये का पुरस्कार मिला, दूसरे और तीसरे स्थान पर निरमा युनिवर्सिटी की भूमि रैयानी और आईआईटी कानपुर के अरुणतेजा रहे जिन्हें क्रमशः 2.5 लाख रुपये और एक लाख रुपये का पुरस्कार मिला

 

नई दिल्ली। सैटेलाइट कम्युनिकेशंस में विश्व की अग्रणी कंपनी वायासैट इंक ने बिट्स पिलानी के मयंक गोलेछा को वायासैटः स्पेस फॉर गुड 2025 पहल के अपने भारतीय संस्करण का विजेता घोषित किया है। यह पहल विद्यार्थियों के लिए स्टेम नवप्रवर्तन की एक ऐतिहासिक चुनौती है। निरमा युनिवर्सिटी की भूमि रैयानी और आईआईटी कानपुर के अरुणतेजा जारुपुला इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी चुनौती में उप विजेता रहे।   

 

ब्रिटेन और अमेरिका में भारी सफलता के बाद विश्वविद्यालयों से युवाओं को दुनिया की वास्तविक समस्याओं को हल करने और अंतरिक्ष एवं दूरसंचार नेतृत्वकर्ताओं की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए वायासैटः स्पेस फॉर गुड भारत आया है। बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी के मयंक गोलेछा ने मैग्नोसैट नाम की अवधारणा पेश की जिसमें विभिन्न कक्षाओं में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रिंग्स की सीरीज का उपयोग कर बगैर पारंपरिक ईंधन के सैटेलाइट को संचालित करने का प्रस्ताव है।

 

एक वीडियो संबोधन में संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, अंतरिक्ष- अंतिम सीमा अब मानव जाति की पहुंच में है। शानदारी विचारों और प्लेटफॉर्मों के साथ आप उदीयमान उद्मयी कृषि, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों के जरिए अंतरिक्ष को हमारे और करीब ला रहे हैं। सभी प्रतिभागियों को बधाई और यह जीत आपको कदम दर कदम मजबूत करेगी एवं और भारत का ध्वज दुनिया में लहराएगी क्योंकि हम एक विकसित देश बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

 

विजेता को 4,00,000 रुपये का प्रथम पुरस्कार प्राप्त होगा, जबकि दूसरे स्थान पर रही निरमा युनिवर्सिटी की 19 वर्षीय भूमि रैयानी को 2,50,000 रुपये और तीसरे स्थान पर रहे आईआईटी कानपुर के 18 वर्षीय अरुणतेजा जारुपुला को 1,00,000 रुपये का पुरस्कार मिलेगा। भूमि का विचार प्लाज्मा पाथवेज एक भावी अंतरिक्ष संचार अवधारणा पर केंद्रित है, जबकि अरुणतेजा की परियोजना स्टेलर के तहत कक्षीय अंतरिक्ष बस्तियां स्थापित करने का प्रस्ताव है जो विनिर्माण केंद्र के तौर पर काम करेंगे।

 

इस प्रतिस्पर्धा के विजेता मयंक गोलेछा ने कहा, स्पेस फॉर गुड चैलेंज के लिए वायासैट द्वारा सम्मानित किया जाना मेरे लिए गर्व की बात है। इस अवसर ने ना केवल मेरी रचनात्मकता और तकनीकी कौशल की सीमाओं का विस्तार करने करने के लिए प्रोत्साहित किया, बल्कि पृथ्वी पर टिकाऊ समाधान का निर्माण करने के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी की ताकत में मेरा विश्वास बढ़ाया है। मुझे उम्मीद है कि मेरी परियोजना अन्य लोगों को ऐसे अनूठे विचार पेश करने के लिए प्रेरित करेगी जो हमारी धरती और मानवता के लिए एक बेहतर भविष्य के निर्माण में योगदान कर सके।

 

वायासैट इंडिया के प्रबंध निदेशक गौतम शर्मा ने कहा, हम वायासैटःस्पेस फॉर गुड 2025 पहल के जरिए युवाओं द्वारा प्रदर्शित अविश्वसनीय सरलता और जुनून देखकर रोमांचित हैं। यह प्रतियोगिता यहां मौजूद जीवंत नवप्रवर्तन पारितंत्र का एक प्रमाण है और यह दिखाती है कि विश्व की वास्तविक समस्याओं को हल करने में स्पेस टेक्नोलॉजी कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वायासैट में हम इन भावी नेतृत्वकर्ताओं को सहयोग और मार्गदर्शन करने को लेकर गौरवान्वित हैं जो अंतरिक्ष में टिकाऊ उन्नयन को गति दे रहे हैं जिनसे ना केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया लाभान्वित होगी।