भोपाल में हर रोज 9.5 लाख लीटर पेट्रोल, करीब 12 लाख लीटर डीजल और मप्र में 1200 मीट्रिक टन पेट्रोल और करीब 1600 मीट्रिक टन डीजल की सालाना खपत  


 एवीएस न्यूज..भोपाल


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नसीहत और पेट्रोल-डीजल के दाम में मूल्यवृद्धि के संकेत दिए जाने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बाजार में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पेट्रोप पंप संचालन कार्य से जुड़े पंप संचालकों के अनुसार आने वाले समय में ईंधन के दामों में  वृद्धि और सुनिश्चित हो गई है।  


इस संबंध में मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में तेल कंपनियों को प्रति लीटर लगभग 17 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में ईंधन कीमतों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ोतरी की संभावना है।

उनका मानना है कि पहले चरण में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।  क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, परिवहन लागत और टैक्स संरचना के कारण तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।


अजय सिंह का मानना है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी असर देखने को मिल सकता है।

हालांकि, अभी तक सरकार या तेल कंपनियों की ओर से आधिकारिक रूप से किसी मूल्य वृद्धि की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन बाजार में बढ़ती अटकलों के बीच उपभोक्ताओं और परिवहन उद्योग की नजरें आगामी निर्णयों पर टिकी हुई हैं।

  एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सिंह के मुताबिक मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रतिदिन लगभग 9.5 लाख लीटर पेट्रोल और करीब 12 लाख लीटर डीजल की खपत होती है।  जबकि मध्यप्रदेश में लगभग 1200 मीट्रिक टन पेट्रोल और करीब 1600 मीट्रिक टन डीजल की  सालाना खपत होती है। 


राजधानी के बैरसिया रोड़ स्थित जिओ बीपी पंप के संचालक  समीर भार्गव का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पेट्रोल-डीजल के समझदारी से उपयोग की अपील की थी और तेल आयात पर बढ़ते आर्थिक दबाव का उल्लेख किया था।

पेट्रोल, डीजल की बिक्री से कंपनी भारी नुकसान में है। इस वजह से पेट्रोल पम्प पर सप्लाई बहुत सीमित हो रही है। पेट्रोल पंप संचालक एक तरीके से राशनिंग करनी पड़ती है, अगर रेट बढ़ते है तो सप्लाई सही होने की संभावना है। परंतु पेट्रोल पंप पर लागत का दबाव बढ़ेगा और प्रॉफिट मार्जिन कम होगा।

  
 पेट्रोल पंप एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द दाम बढ़े, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ता से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर और पेट्रोल पंप कारोबार तक दिखाई देगा।

 कहाकि जा रहा है कि कीमतें बढ़ने पर सबसे पहले आम लोग गैरजरूरी वाहन उपयोग कम करते हैं। इससे पेट्रोल पंपों पर बिक्री घट सकती है। खासकर छोटे और ग्रामीण इलाकों के पंपों पर असर ज्यादा पड़ने की आशंका है।

ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी और इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने को भी इसी बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।  इधर केंद्र सरकार भी लगातार ईंधन बचत और वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर दे रही है।