आत्माराम सोनी.भोपाल


निजी बस यानी पैसेंजर बस संचालकों द्वारा यात्रियों से ज्यादा माल का अवैध परिवहन किया जा रहा है।  ऐसा करके निजी बस ऑपरेटर माल लादकर लाने व ले जाने के खेल से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं।  राजधानी सहित मध्यप्रदेश और देशभर में चल रही अधिकांश बसों में नियमों की अनदेखी कर धड़ल्ले से माल लाद कर लाया और ले जाया जाता है।  जिससे सरकार को बतौर राजस्व के रूप में करोड़ों रूपए का नुकसान हो रहा है और यात्रियों की जान जोखिम में पड़ रही है। 
राजधानी सहित मध्यप्रदेश और अतंरप्रांतीय राज्यों के ट्रांसपोर्टरों ने इस संबंध में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के मांग की है कि पैसेंजर वाहनों में माल का हो रहे अवैध परिवहन पर हस्ताक्षेप करें।  ट्रांसपोर्ट संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहाकि हम लोग लंबे समय से पैसेंजर बसों में माल ढुलाई का विरोध करते आ रहे हैं। हमारा स्पष्ट मानना है कि जब तक इस अवैध प्रथा पर रोक नहीं लगेगी, हम लगातार अपनी आपत्ति प्रत्येक संबंधित सरकारी कार्यालय चाहे वह केंद्रीय या राज्य परिवहन विभाग हो, जीएसटी विभाग हो या यातायात पुलिस हर जगह दर्ज कराते रहेंगे।


 - मप्र में करीब 200 बसों में  600 टन से अधिक व्यवसायिक माल का अवैध परिवहन प्रतिदिन 
भोपाल ट्रांसपोर्ट कंपनीज एसोसिएशन अध्यक्ष ठाकुरलाल राजपूत ने कहाकि  मध्यप्रदेश में करीब 200 बसों से 600 टन से अधिक व्यवसायिक माल प्रतिदिन मध्यप्रदेश के भीतर एवं अन्य प्रदेशों जैसे मुंबई, पूना, नागपुर, रायपुर, अहमदाबाद, सूरत, भीलवाड़ा जयपुर, आगरा, दिल्ली, कानपुर आता -जाता है।  किसी भी शहर के बस स्टैंड के आस-पास बस के केबिन में ऊपर एवं यात्रियों की सीट के नीचे बनी डेक में करीब तीन टन माल आ आता और पैसेंजर वाहन मालकों एवं चालकों द्वारा माल अवैध रूप से भरा जाता है।  सुबह एवं शाम के बाद, डेक बनी, ऊंची ऊंची बसें बस अड्डों के आस , इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर अन्य शहरों में माल उतर और चढ़ाते देखा जा सकता है। बस कंपनियों द्वारा माल परिवहन की बुकिंग, डिलीवरी, गोदाम आदि की शिकायत कई बार संगठन ने आरटीओ और पुलिस के अधिकारी से की,लेकिन शिकायत करने के बाद इन्हें कुछ  नजर नहीं आता।  ठाकुरलाल राजपूत ने कहाकि ट्रक-ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों ने कई बार इसकी शिकायत शासन से भी की। माल ढोने के लिए ट्रक है, ट्रक में एक सवारी बैठा लें, तो पुलिस चालान बना देती है, व्यापारी के बिल में, अथवा ई-वे बिल में कोई त्रुटि हो जाए तो शास्ती ट्रांसपोर्टर को भरनी पड़ती है, लेकिन इसके विपरीत जबकि बसों से करोड़ों का माल बिना बिल, बिना ई-वे बिल के परिवहन हो रहा है और करोड़ों की जीएसटी चोरी हो रही है, तो यह सब ना ही विभाग जिम्मेदारों को नजर आ रहा है और पुलिस वालों को, निजी बसों में अवैध माल परिवहन सरकार के नीचे सब साहूकारी से चल रहा है।
-  जो बसें टनों माल लाद रहे हैं वे कर रहे यात्रियों की जान से खिलवाड़  
अध्यक्ष ठाकुर लाल राजपूत ने कहाकि जो बसें टनों के हिसाब से माल लाद रहे हैं वे कर रहे यात्रियों की जान से खिलवाड़ भी कर रहे हैं। ट्रक ट्रांसपोर्ट का काम बसें कर रही है, जिसके कारण हम ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों के बिजनेस पर भी असर पड़ रहा है, सीधा -सीधा ट्रकों का हक बसों द्वारा छीना जा रहा है। अत: शासन-प्रशासन से अनुरोध है कि माल से भरी बसों का परमिट रद्द किया जा और बसों में व्यवसायिक माल की बुकिंग पूर्णत: बंद हो सख्त कार्रवाई की जाए। ताकि हम ट्रांसपोर्टरों को राहत मिल सकें।  

 

 


  पैसेंजर बसों में सामान ढुलाई पर नकेल कसें शासन-प्रशासन 
आल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (पंजी.) के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कहाकि संगठन लंबे समय से पैसेंजर बसों में माल ढुलाई का विरोध करती आ रही है।  मेरा मानना है कि जब तक इस अवैध प्रथा पर रोक नहीं लगेगी, संगठन अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा। उन्होंने कहाकि पैसेंजर बसों द्वारा माल ढुलाई के चलते ट्रक ऑपरेटरों को वैध पार्किंग की जगह नहीं मिलती। पार्किंग माफिया बसों से मोटा पैसा वसूलते हैं। इन पार्किंग स्थलों पर न केवल माल उतारा और लादा जाता है, बल्कि आने-जाने वाले प्रत्येक माल पर भी अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता है।

- जीएसटी की बड़े पैमाने पर चोरी 
पैसेंजर बसों में सामान बिना बिल और दस्तावेजों के ले जाया जाता है, जिससे सरकार को जीएसटी का राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

 - प्रतिबंधित और मादक पदार्थों की तस्करी 
पान मसाला, गुटखा, सिगरेट जैसे प्रतिबंधित और मादक पदार्थ बड़ी मात्रा में पैसेंजर बसों के माध्यम से एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचाए जाते हैं, जो समाज और युवा पीढ़ी के लिए खतरनाक है।

 - बिना कागजात का माल परिवहन:
अधिकांश बस ऑपरेटर बिना किसी वैध कागज़ात के माल परिवहन करते हैं और इसके एवज में भारी-भरकम नकद वसूली करते हैं।

- यात्रियों की जान को खतरा 
पैसेंजर बसों को मुख्यतः यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए बनाया जाता है। जब इन बसों में अतिरिक्त माल, भारी-भरकम बोरियाँ, बॉक्स या प्रतिबंधित सामान लादा जाता है तो न केवल बस का लोड बढ़ जाता है बल्कि आग लगने, दुर्घटना और जान-माल की हानि का जोखिम भी कई गुना बढ़ जाता है। यात्रियों की सुरक्षा से इस प्रकार का खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

-  ट्रांसपोर्ट उद्योग पर दुष्प्रभाव 
इस अवैध गतिविधि से वैध ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को गहरा नुकसान हो रहा है। अनेक परिवहन कंपनियां पहले ही बंद हो चुकी हैं और कई बंद होने की कगार पर हैं, जिससे लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है। हमारी पुरज़ोर मांग है की सरकार तुरंत पैसेंजर बसों में सामान ढुलाई पर सख्ती से रोक लगाए। साथ ही अवैध पार्किंग और इस धंधे में संलिप्त माफिया पर कठोर कार्यवाही करें। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर लेगी और वैध परिवहन उद्योग का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।

 

 


 आरटीओ व पुलिस की मिलीभगत से चल रहा अवैध परिवहन का धंधा  
- भोपाल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ट्रांसपोर्ट नगर कोकता के अध्यक्ष अशोक गुप्ता  ने कहाकि बस हल्के वजन से बनती उसमें कमानी नहीं होती, बस वाले केबिन पर माल लोड करते हैं, जिससे हमेशा दुर्घटना आए दिन होती हैं। बस से माल का परिवहन करना दंडनीय अपराध हैं , लेकिन आरटीओ व पुलिस की मिलीभगत से पैसेंजर बसों में अवैध परिवहन का गोरख धंधा चल रहा है।   गुप्ता ने कहाकि पैसेंजर बसों में माल ढुलाई के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों का विरोध और प्रतिबंध की मांग परिवहन क्षेत्र की एक आम समस्या है। ट्रांसपोर्टरों की मुख्य शिकायत यह है कि बस कंपनियां यात्री सेवा के साथ-साथ अवैध रूप से माल ढुलाई करती हैं, जिससे माल परिवहन करने वालों का व्यापार प्रभावित होता है और उन्हें आर्थिक नुकसान होता है। वे यात्री बसों के इस अनधिकृत माल ढुलाई को रोकने और इन पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं ताकि परिवहन व्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे।   

 

  -  यात्रियों की जान को खतरा होने के साथ जीएसटी की करोड़ों की चोरी  
-  भाईचारा राजमार्ग परिवहन सेवा के संस्थापक नरेंद्र मिश्रा ने कहाकि पैसेंजर बसों में माल ढुलाई करना  पैसेंजर के लिए सबसे बड़ा खतरा है। बसे को पैसेंजर परिवहन के लिए आरटीओ परमिशन देता है। जबकि ट्रक को माल परिवहन के लिए। जो कि गुड्स कैरियर जो गाड़ियों के सामने लिखा होता है,  लेकिन आज के समय में बसों के मालिक  आरटीओ अधिकारी के मिलीभगत से खुलेआम भारत के संविधान, नियमों का उलंघन कर रहे हैं ।  आरटीओ अधिकारी खुलेआम पैसे की वसूली कर रहे हैं। अगर बसों में माल ढुलाई होता है तो मोटर वाहन मालिक को कड़ी सजा का प्रावधान हो और बस का परमिट तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाए।