55 फीसदी टैरिफ से पहले कंटेनर निर्यातकों में अफरा-तफरी
भोपाल। ट्रंप द्वारा लगाए 55 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) से बचने के लिए निर्यातकों में 27 अगस्त की समय-सीमा से पहले अपने कंटेनर निर्यात को लेकर अफरा -तफरी मच गई है। इससे देशभर के निर्यातक आइसगेट पोर्टल के माध्यम से शिपिंग बिल जनरेट कर रहे हैं। अत्यधिक लोड के कारण यह पोर्टल पूरी तरह से ठप हो गई है। इससे हजारों कंटेनरों की प्रक्रिया अटक गई है। जिससे पोर्टल और डिपो पर कंटेनरों का अंबार लग गया है। ऐसे में व्यापारियों को भारी नुकसान की आशंका है। ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने बताया कि अमेरिकी सरकार ने भारत से 28 अगस्त 2025 से आयात होने वाले लकड़ी आधारित फर्नीचर और हस्तशिल्प उत्पादों पर 55 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने की घोषणा की थी। इसने देशभर के निर्यातकों को चिंता में डाल दिया। विशेष रूप से जोधपुर जो भारत का प्रमुख हस्तशिल्प निर्यात केंद्र है। निर्यातक अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए कंटेनर रवाना करने की होड़ में लगे हैं। इससे संबंधित साइट ठप हो गई और इस तकनीकी विफलता के चलते जोधपुर के कई निर्यातकों की लोडिंग और डिस्पैच प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो गई है।
- ऑर्डर रद्द होने और आर्थिक हानि की आशंका
कपूर ने कहाकि निकट भविष्य में इसका समाधान नहीं किया गया, तो हजारों कंटेनर समय पर रवाना नहीं हो पाएंगे। उन पर 55 फीसदी टैरिफ लागू हो जाएगा। इससे न केवल भारी आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की साख को भी गहरा आघात पहुंचेगा। एक्सपोर्टर्स की ओर से पत्र भेजकर विभाग से किए आग्रह के आधार पर संबंधित विभाग शनिवार रविवार को भी खुले रहें। उल्लेखनीय है कि टैरिफ बढ़ने से पहले एक्सपोर्टर्स जल्द से जल्द अपना माल अमेरिका भेजना चाहते हैं, इससे डिपो पर कंटनर्स की भीड़ लग गई है। यह स्थिति न केवल निर्यात में देरी कर रही है, बल्कि व्यापारियों के ऑर्डर रद्द होने और आर्थिक हानि की आशंका भी बढ़ा रही है।

- व्यापारियों ने की निर्यात ऑर्डर को बचाने विशेष छूट और सुविधा की मांग
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष कपूर ने मांग की है कि ईसीगेट पोर्टल और क्लीयरेंस प्रक्रिया में तुरंत सुधार किया जाए। विशेष निर्यात दिवस घोषित कर लोडिंग और शिपमेंट को तेज किया जाए। व्यापारियों के निर्यात ऑर्डर को बचाने के लिए विशेष छूट और सुविधा दी जाए। समय पर हस्तक्षेप न होने पर यह स्थिति व्यापार और परिवहन उद्योग के लिए गंभीर संकट में बदल सकती है।

