सरकार से मांग: खाद्य तेल पर स्टॉक सीमा लागू करने की जरूरत, कीमतों में 10-15 फीसदी गिरावट की संभावना
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पूर्व प्रदेश महामंत्री रमाकांत तिवारी ने कहा -खाद्य तेलों की आपूर्ति और जमाखोरी पर नियंत्रण लगाने से कीमतों में स्थिरता आएगी
एवीएस न्यूज.भोपाल
लगातार बढ़ती खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार से स्टॉक सीमा (स्टॉक लिमिट) लागू करने की मांग की जा रही है। बाजार जानकारों का मानना है कि यदि सरकार यह कदम उठाती है, तो आने वाले समय में खाद्य तेलों के दामों में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पूर्व प्रदेश महामंत्री रमाकांत तिवारी ने कहा कि घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की आपूर्ति और जमाखोरी पर नियंत्रण लगाने से कीमतों में स्थिरता आएगी। इससे जून–जुलाई के दौरान आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
तिवारी का कहना है कि हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और आयात लागत बढ़ने के कारण तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। ऐसे में स्टॉक सीमा लागू होने से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और जमाखोरी पर रोक लगेगी। रमाकांत तिवारी के अनुसार, बाजार में कीमतों में संभावित गिरावट से घरेलू बजट पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और उपभोक्ताओं को आवश्यक खाद्य तेलों की खरीद में राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में मांग और आपूर्ति के संतुलन के चलते कीमतों में नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जमाखोरी और कृत्रिम मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण के लिए स्टॉक सीमा लागू किए जाने की संभावना है। यदि सरकार यह कदम उठाती है, तो बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रमाकांत तिवारी ने कहा कि बाजार में पारदर्शिता और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने से न केवल कीमतों पर नियंत्रण रहेगा, बल्कि आम जनता को भी आर्थिक रूप से राहत मिलेगी।
खाद्य तेल पैकिंग में फिर लागू होगा स्टैंडर्डाइजेशन, तय पैक साइज में ही होगी बिक्री

उपभोक्ताओं के साथ हो रही धोखाधड़ी और भ्रम को रोकने के लिए सरकार खाद्य तेलों की पैकेजिंग में 'मानकीकरण' का नियम फिर से लागू करने पर विचार कर रही है। इसके तहत तेल की बिक्री केवल निश्चित और तय पैक आकारों (जैसे 250 मिली/ग्राम, 500 मिली/ग्राम, 1 लीटर/किग्रा और 5 लीटर/किग्रा) में ही अनिवार्य की जाएगी।
केंद्र सरकार जल्द ही खाद्य तेल पैकिंग में स्टैंडर्डाइजेशन दोबारा लागू करने जा रही है। इंडस्ट्री की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए सरकार इस संबंध में नया नोटिफिकेशन जारी करेगी।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसओपीए) के अनुसार सरकार ने खाद्य तेल पैकिंग क्वांटिटी को फिर से मानकीकृत करने की सिफारिश मंजूर कर ली है। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद सभी कंपनियों और पैकर्स को निर्धारित पैक साइज़ और वजन में ही खाद्य तेल की बिक्री करनी होगी।
जनवरी 2023 में हटाए गए नियम फिर होंगे लागू
जानकारी के मुताबिक जनवरी 2023 में खाद्य तेल पैकिंग के स्टैंडर्ड नियम हटाए गए थे, जिसके बाद बाजार में 875 मिलीलीटर, 900 मिलीलीटर जैसे अलग-अलग पैक आकार आने लगे थे। इससे ग्राहकों को कीमतों की तुलना करने में परेशानी होती थी। अब नए नियम लागू होने के बाद बाजार में केवल तय मानक पैक साइज़ में ही तेल उपलब्ध होगा। सरकार इंडस्ट्री को नए नियमों को लागू करने के लिए 90 दिनों का ट्रांजिशन समय भी देगी।
उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों को होगा फायदा
बाजार जानकार और तेल ब्रोकर रमाकांत तिवारी ने इस फैसले को उपभोक्ताओं और खाद्य तेल उद्योग दोनों के लिए बड़ी राहत बताया है। उनका कहना है कि पैकिंग में एकरूपता आने से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को कीमत समझने व तुलना करने में आसानी होगी।
उन्होंने कहाकि नए नियम लागू होने के बाद भ्रामक पैक साइज खत्म होंगे और उपभोक्ताओं को वास्तविक कीमत का बेहतर अंदाजा मिल सकेगा। साथ ही, बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहाकि जनवरी 2023 में सरकार ने निर्माताओं को लचीलापन देने के लिए निश्चित पैक आकारों की बाध्यता खत्म कर दी थी। इसका फायदा उठाकर कई कंपनियों ने 800एमएल , 810एमएल , 850एमएल या 870एमएल जैसे अजीबो-गरीब पैक साइज निकालने शुरू कर दिए।
ये गैर-मानक पैकेट देखने में बिल्कुल 1 लीटर या 1 किलो के लगते हैं, लेकिन इनमें तेल कम होता है। इससे ग्राहकों को लगता है कि वे सस्ता तेल खरीद रहे हैं, जबकि असल में उन्हें प्रति लीटर ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है ।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र की पांच अग्रणी संस्थाओं द्वारा उपभोक्ता मामले विभाग को पहले एक संयुक्त ज्ञापन दिया गया था और उसमें बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं के साथ होने वाली धोखाधड़ी की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया था।






