मनोज श्रीवास्तव   . भोपाल/मानपुर

 एक ओर शासन स्वच्छ पेयजल और जल जीवन मिशन के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद मानपुर के वार्ड क्रमांक 6 की स्थिति इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। पिछले लगभग 15 दिनों से वार्डवासियों के घरों में कीड़ेयुक्त, दूषित और मटमैले पानी की सप्लाई हो रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।


बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह पंचायतिकालीन नल से एक बार फिर गंदे पानी की सप्लाई होने पर रहवासियों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गंभीर समस्या की शिकायत पूर्व में नगर परिषद मानपुर को की जा चुकी है। दिनांक 27 अप्रैल 2026 को नगर परिषद के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण भी किया था और शिकायत सही पाए जाने की पुष्टि की थी, लेकिन 15 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

भीषण गर्मी और जल संकट के बीच नागरिक स्वच्छ पानी की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन मजबूरी में दूषित पानी का उपयोग करने को विवश हैं। रहवासियों का कहना है कि गंदे पानी के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब पानी जैसी मूलभूत सुविधा ही सुरक्षित नहीं है, तो आमजन अपनी समस्याएं लेकर आखिर कहां जाएं।

नगर परिषद के नल-जल प्रभारी श्री गोस्वामी ने कर्मचारियों की कमी को समस्या की प्रमुख वजह बताया है। उनके अनुसार नगर परिषद क्षेत्र के 6 ग्रामों के बीच केवल एक मिस्त्री उपलब्ध है तथा अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग अध्यक्ष और सीएमओ से की जा चुकी है। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्ष 2022 में नई परिषद बनने के बाद लगभग 20 आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती की गई थी, जिनमें अधिकांश स्वीपर थे। अब यह संख्या बढ़कर लगभग 75 तक पहुंच गई है, लेकिन पेयजल व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विभाग में पर्याप्त नल मिस्त्री और लेबर की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी।

इसके चलते पाइपलाइन लीकेज और मरम्मत कार्य समय पर नहीं हो पाते, जिससे नागरिकों को लंबे समय तक दूषित पानी की समस्या झेलनी पड़ रही है।

गौरतलब है कि हाल ही में जिले के दौरे पर आए नागर सिंह चौहान ने ग्राम पंचायत धमोखर और बड़ेरी में जल जीवन मिशन योजना का निरीक्षण कर अधिकारियों को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद नगर परिषद मानपुर क्षेत्र में लगातार दूषित पानी की शिकायतें स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो वे ज्ञापन सौंपने, जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराने और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन जैसे लोकतांत्रिक कदम उठाने को बाध्य होंगे। नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।