भोपाल में 6 सालों से संघर्ष कर रहे दंपति को नोवा आई.वी.एफ आकर सफलता मिली
एवीएस न्यूज.भोपाल
नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी ने 6 सालों से संघर्ष कर रहे भोपाल के एक दंपति के आंगन में खुशियां बिखेर दीं। इन पति-पत्नी, दोनों को ही फर्टिलिटी से संबंधित समस्याएं थीं। पति को अनुवांशिक समस्या थी। वहीं पत्नी को बढ़ती उम्र की वजह से प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं हो पा रहा था।
मीरा (36 वर्ष) और अरुण (38 वर्ष) (गोपनीयता के लिए बदला हुआ नाम) की शादी को छः साल हो चुके थे। वो शादी के बाद से ही गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी। उन्होंने कई जगह टेस्ट भी कराए। इसके बाद उन्होंने नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी से संपर्क किया। यहाँ पर उनके फर्टिलिटी के व्यक्तिगत टेस्ट किए गए। पति के टेस्ट में पाया गया कि एक जन्मजात समस्या के कारण स्पर्म को ले जाने वाले ट्यूब उनके शरीर में थे ही नहीं, जिसकी वजह से उनके सीमेन में स्पर्म की संख्या शून्य थी। यह गड़बड़ी बहुत कम पुरुषों में पाई जाती है। 36 साल की पत्नी के शरीर में अंडों की क्वालिटी और संख्या उनकी उम्र के मुकाबले काफी कम थी।
इसके अलावा, उनके जेनेटिक काउंसलिंग टेस्ट में सामने आया कि पति के शरीर में सीएफटीआर जीन म्युटेशन था, जो सिस्टिक फाईब्रोसिस कर सकता है। यदि यह अनुवांशिक समस्या शिशु में जाती है, तो उसे आजीवन साँस की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। परीक्षणों के मुताबिक पत्नी के शरीर में यह जीन नहीं था।
अगर माता-पिता, दोनों में सीएफटीआर जीन म्युटेशन के कैरियर होते हैं, तो बच्चे को सिस्टिक फाईब्रोसिस होने की संभावना होती है। उन लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग दी गई क्योंकि ट्यूब्स का न होना सीएफटीआर जीन म्युटेशन की मौजूदगी का संकेत है।

डॉ. पायल रघुवंशी, फर्टिलिटी स्पेशियलिस्ट, नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी ने कहा, ‘‘यह मामला केवल पति या पत्नी की इन्फर्टिलिटी का नहीं था। हमें सर्जरी से पहले पति के स्पर्म और फिर पत्नी के अंडे लेने पड़े क्योंकि पत्नी के शरीर में बहुत कम अंडे बचे थे। इलाज करने से पहले हमने उनकी जेनेटिक काउंसलिंग की, ताकि वो एक स्वस्थ शिशु प्राप्त कर सकें। पुरुषों की इन्फर्टिलिटी बढ़ रही है, इसलिए पति और पत्नी, दोनों को एक साथ टेस्ट कराना चाहिए।’’
पति और पत्नी, दोनों को समस्या होने के कारण नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी ने उनके लिए इलाज की व्यक्तिगत योजना बनाई। पति की टेस्टिकुलर स्पर्म एस्पिरेशन (टेसा) सर्जरी की गई। यह सीधे टेस्टिकुलर टिश्यू से स्पर्म निकालने की प्रक्रिया है। इस प्रकार, स्पर्म प्राप्त हो जाने के बाद आईवीएफ की प्रक्रिया शुरू की गई।
डॉ. पायल रघुवंशी ने कहा, ‘‘जब आप केवल दो एम्ब्रियो लेकर यूटेरस के ऐसे वातावरण में काम करते हैं, जो बिल्कुल सही होना जरूरी होता है, तब एम्ब्रियो को ट्रांसफर करने की टाईमिंग बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। इन पति पत्नी ने अपने अंडों और स्पर्म से पहले ट्रांसफर में ही सफलतापूर्वक गर्भधारण करके डिलीवरी की। यह सही प्लानिंग, सतर्क लैब वर्क और पति-पत्नी की हिम्मत का प्रमाण है।’’
प्रिग्नेंसी के नतीजे पॉजिटिव मिले थे। पत्नी की प्रिग्नेंसी के दौरान सतर्क निगरानी की गई। अंत में उन्होंने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
इस मामले से प्रदर्शित होता है कि भले ही इन्फर्टिलिटी किसी गंभीर अनुवांशिक समस्या के कारण हो, या अंडों की सीमित संख्या या स्पर्म की अनुपस्थिति के कारण, मुश्किल से मुश्किल मामलों में भी सही निदान और व्यक्तिगत दृष्टिकोण की मदद से सफल परिणाम दिए जा सकते हैं।






