मंडी टैक्स वृद्धि के विरोध में मंडियां रहीं बंद, नीलामी और कारोबार रहा ठप
भोपाल में 2 करोड़ रु. और प्रदेश में करीब 50 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार प्रभावित
एवीएस न्यूज.भोपाल
मध्यप्रदेश सरकार के निर्देश पर मंडी बोर्ड द्वारा कृषि उपज पर मंडी टैक्स 1 फीसदी से बढ़ाकर 1.50 फीसदी करने के विरोध में राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर के गल्ला व्यापारियों ने मंगलवार को एक दिवसीय हड़ताल की। इस विरोध के कारण मंडियों में नीलामी और कारोबार पूरी तरह ठप रहा, जिससे भोपाल में लगभग 2 करोड़ रुपए और पूरे मध्य प्रदेश में 50 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार प्रभावित हुआ।
सकल अनाज दलहन तिलहन व्यापारी महासंघ मध्य प्रदेश के आह्वान पर हुई एक दिवसीय मंडियां बंद हड़ताल में व्यापारियों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार कर बढ़ी हुई दरें वापस लेने की मांग की है।
गौरतलब है कि इन दिनों मंडियों में मूंग की फसल के साथ अन्य उपज की आवक बड़े स्तर पर हो रही है, लेकिन मंडी बंद रहने से किसान अपनी उपज नहीं बेच पाएं। जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
भोपाल ग्रेन मर्चेंट एंड ऑयल सीड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश ज्ञानचंदानी, प्रवक्ता संजीव जैन ने बताया कि भोपाल मंडी में सभी उपजों की आवक 7 हजार से 8 हजार बोरे की है, जबकि मध्यप्रदेश में करीब 5 लाख बोरे की। अत: हड़ताल के चलते अनाज मंडियां नहीं खुली और व्यवसाय प्रभावित हुआ।
व्यापारियों का तर्क-मंदी के बीच टैक्स बढ़ाना अव्यावहारिक
एसोसिएशन के प्रवक्ता संजीव जैन ने सरकार के इस कदम को अव्यावहारिक बताया है। उन्होंने कहा कि बाजार में पहले से ही मंदी और महंगाई की मार है, ऐसे में मंडी शुल्क बढ़ाना बिल्कुल सही नहीं है। यह सरकार को जगाने के लिए हमारा एक प्रतीकात्मक विरोध है और इस फैसले पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।
सकल अनाज दलहन तिलहन व्यापारी महासंघ मध्य प्रदेश के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने 16 जून से ही मंडी शुल्क की यह नई वृद्धि लागू कर दी है, जिसका सीधा असर किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
अन्य राज्यों की तुलना में मप्र में टैक्स पहले से ज्यादा
व्यापारी संगठनों का कहना है कि मध्य प्रदेश में मंडी टैक्स महाराष्ट्र और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में पहले से ही काफी अधिक है। नई बढ़ोतरी से राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर होगी और यहां व्यापार करना महंगा हो जाएगा। व्यापारियों ने आशंका जताई है कि यदि मध्य प्रदेश में टैक्स का बोझ इसी तरह बढ़ता रहा, तो बड़ी प्रोसेसिंग कंपनियां और खरीदार दूसरे राज्यों का रुख कर सकते हैं।
उपज के सही दाम न मिलने को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी
व्यापारियों की इस हड़ताल और टैक्स बढ़ोतरी के कारण किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। किसानों का मानना है कि यदि टैक्स बढ़ने से व्यापारियों की लागत में इजाफा होगा, तो वे फसलों की खरीदी कीमत कम कर सकते हैं। इसके चलते किसानों को अपनी मेहनत और उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।






