ट्रांसपोर्टरों ने की आरटीओ द्वारा बंद किए ऑटो हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन की सुविधा को पुन: चालू करने की मांग
आत्माराम सोनी .भोपाल
ट्रांसपोर्टरों ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द्वारा बंद की गई ऑटो हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन (बंधक समाप्त करने) की सुविधा को फिर से चालू करने की मांग की है, क्योंकि यह प्रक्रिया वाहन खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण है जो ऋण चुकाने के बाद आरसी से बैंक का नाम हटवाना चाहते हैं और इसके बंद होने से वाहन बेचने या एक्सचेंज करने में दिक्कतें आ रही हैं।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के एमसी मेंबर सी.एल. मुकाती ने मध्यप्रदेश के ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों की ओर से इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी , मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित मुख्य सचिव अनुराग जैन , परिवहन सचिव मनीष सिंह , परिवहन आयुक्त ग्वालियर विवेक शर्मा को पत्र लिखकर मांग की, कि आरटीओ द्वारा बंद किए ऑटो हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन की सुविधा को पुन: चालू की जाए।
मुकाती ने कहाकि इस सुविधा के बंद होने के कारण, ट्रांसपोर्टर अपनी पुरानी गाड़ी नहीं बेच पा रहे हैं, क्योंकि खरीदार पूरी तरह से स्वामित्व वाली, यानी 'स्पष्ट-शीर्षक' वाली वाहन पसंद करते हैं और हाइपोथेक वाली आरसी के साथ गाड़ी बेचना मुश्किल हो जाता है। अत:ट्रांसपोर्टरों की मांग है कि आरटीओ इस सुविधा को फिर से चालू करे, ताकि वे अपनी गाड़ियों का मालिकाना हक पूरी तरह से अपने नाम करवा सकें और फिर आराम से अपनी गाड़ियां बेच सकें।
मुकाती पत्र में उल्लेख किया कि केन्द्र सरकार तथा मध्यप्रदेश शासन के सुशासन, व्यापार में आसानी और जीवन में आसानी की परिकल्पना को साकार रूप प्रदान करने के लिए परिवहन विभाग मध्यप्रदेश द्वारा सेवाओं को डिजिटल, पारदर्शी एवं पेपरलेस बनाने की दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) द्वारा हाल ही में देशभर में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की गई है, जिसके अंतर्गत वाहन पोर्टल को बैंकों एवं फाइनेंस कंपनियों के पोर्टल से जोड़ा जाकर लोन समाप्त होने पर वाहन के रिकॉर्ड में दर्ज हाइपोथिकेशन को आटोमेटिक रूप से हटाने का प्रावधान किया गया है।
मात्र 10 दिनों के भीतर ही मध्यप्रदेश परिवहन विभाग ने इस सुविधा को बंद किया
यह व्यवस्था महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, दिल्ली, पश्चिम बंगाल समेत देश के अनेक राज्यों में सुचारू रूप से लागू है तथा मध्यप्रदेश में भी प्रारंभ की गई थी। किंतु खेद का विषय है कि मात्र 10 दिनों के भीतर ही मध्यप्रदेश परिवहन विभाग द्वारा इस सुविधा को बंद कर दिया गया। इस निर्णय से प्रदेश के वाहन स्वामियों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जबकि इस व्यवस्था से न तो परिवहन विभाग के राजस्व को कोई हानि हो रही थी और न ही आम जनता का कोई अहित हो रहा है।
अनावश्यक परेशानी, विलंब और भ्रष्टाचार बढऩे की आशंकाअ
उन्होंने कहाकि किंतु अब पुन: वाहन स्वामियों को हाइपोथिकेशन हटाने के लिए आरटीओ पोर्टफोलियो में प्रवेश, फॉर्म-35 एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के साथ पूर्व वाली प्रक्रिया से गुजरने की बाध्यता हो गई है, जिससे अनावश्यक परेशानी, विलंब और भ्रष्टाचार बढऩे की आशंका है।
- इस सुविधा से वाहन स्वामियों एवं बैंकों को लाभ
लोन समाप्त होते ही वाहन स्वामी को सीधे मोबाइल पर हाइपोथिकेशन हटने का संदेश प्राप्त होना, वाहन मालिकों को आरटीओ कार्यालयों और बिचौलियों के चक्कर लगाने से मुक्ति , बैंक एवं फाइनेंस कंपनियां फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र के कारण होने वाली धोखाधड़ी से मुक्ति , जनता का समय, श्रम और धन की बचत और पारदर्शी प्रक्रिया है ।

