एवीएस न्यूज.भोपाल 
 नीट यूजी (NEET-UG) केवल एमबीबीएस में प्रवेश का माध्यम नहीं है, बल्कि आयुष शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश का भी एक महत्वपूर्ण द्वार है। यह बात केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य एवं एसकेआरपी गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर तथा फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. ए.के. द्विवेदी ने कही।


डॉ. द्विवेदी ने बताया कि नीट के माध्यम से विद्यार्थियों को बीएचएमएस (होम्योपैथी), बीएएमएस (आयुर्वेद), बीएनवाईएस (योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा), बीयूएमएस सहित अन्य आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को एमबीबीएस में प्रवेश नहीं मिल पाता, उनके लिए ये पाठ्यक्रम सम्मानजनक और उज्ज्वल करियर विकल्प साबित हो सकते हैं।


उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद आयुष क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आयुष मंत्रालय की स्थापना, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान का विस्तार, राष्ट्रीय आयुष मिशन तथा आम लोगों के बढ़ते विश्वास के कारण आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पद्धतियों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है।


डॉ. द्विवेदी के अनुसार आयुष क्षेत्र में केवल चिकित्सकीय प्रैक्टिस ही नहीं, बल्कि शिक्षण, अनुसंधान, सार्वजनिक स्वास्थ्य, अस्पताल प्रबंधन, स्वास्थ्य परामर्श और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि विश्वभर में समग्र (Holistic) और एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण आयुष शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर विकसित हो रहे हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों से आयुष पाठ्यक्रमों की संभावनाओं को समझने और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के विकल्प के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में आयुष भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था का और अधिक सशक्त स्तंभ बनेगा तथा नीट यूजी के माध्यम से हजारों युवा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सफल करियर बना सकेंगे। डॉ. द्विवेदी ने कहा, "एमबीबीएस ही नहीं, आयुष भी उज्ज्वल भविष्य और समाज सेवा का एक सशक्त मार्ग है।"