एवीएस न्यूज.भोपाल
 सरकार द्वारा हाल ही में वाहनों की फिटनेस टेस्ट फीस में अत्यधिक वृद्धि कर इसे लगभग 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है, जिसे ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों, ट्रक आपरेटर्स तथा राष्ट्रीय स्तर पर माल ढुलाई से जुड़े लाखों लोगों को काफी नुकसान होगा।  ट्रांसपोर्ट व्यवसाय व ट्रक मालिकों को पहले से ही काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है तथा यह दस गुणा वृद्धि तो व्यवसायियों की कमर ही तोड़ देगी। यह बात ट्रांसपोर्ट व्यवसाय जुड़े ट्रांसपोर्टरों के अलावा ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कही।

उन्होंने कहाकि नई आयु-श्रेणियों (10-15 वर्ष, 15-20 वर्ष एवं 20 वर्ष से अधिक) के आधार पर विशेषकर 20 वर्ष से अधिक पुराने ट्रक, बसों की फिटनेस टेस्ट फीस 2,500 से बढ़ाकर 25,000 कर दी गई है। यह वृद्धि न केवल अत्यधिक, असमय और अव्यावहारिक है, बल्कि पहले से ही मुश्किल परिस्थितियों में चल रहे ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर एक भारी आर्थिक बोझ भी डालेगी।
 ट्रांसपोर्टरों आपत्तियां और चिंताएं
ट्रांसपोर्ट उद्योग पहले से ही मंदी, बढ़ते डीज़ल दाम, टोल टैक्स, ई-वे बिल जटिलताओं और चालान व्यवस्था के दबाव में है। ऐसे समय में 10 गुना फ़ीस वृद्धि आर्थिक रूप से विनाशकारी है। देश का 80 फीसदी ट्रांसपोर्ट छोटे एवं मध्यम स्तर के ऑपरेटर्स चलाते हैं, जिनके लिए यह अतिरिक्त भार असहनीय है। पुरानी गाडय़िों की फ़िटनेस टेस्ट फ़ीस में इतनी अधिक बढ़ोतरी से लाखों ट्रक सडक़ से बाहर हो सकते हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी, मंहगाई बढ़ेगी, तथा आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन प्रभावित होगी। फीस वृद्धि पर कोई पूर्व परामर्श, ड्राफ्ट, उद्योग की राय या व्यवहार्यता अध्ययन नहीं किया गया,जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह नीति निर्णय प्रत्यक्ष रूप से आम जनता, किसानों, व्यापारियों, उद्योगों और परिवहन से जुड़े करोड़ों परिवारों पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।

ट्रांसपोर्टरों ने कहाकि पुराने वाहन अक्सर स्वयं ट्रक चालक व गरीब ट्रांसपोर्ट व्यवसायी ही खऱीदते हैं जो लंबे सफर को तय नहीं करते हैं व लोकल ही चलते हैं वह यह बोझ सहन नहीं कर सकेंगे और आत्मनिर्भर होने के स्थान पर फिर से नौकरी करने को मजबूर हो जायेंगे। 
 ट्रांसपोर्टरों ने की सरकार से अपील 
 ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े ट्रांसपोर्टरों ने ने सरकार की अपील की है कि इस फीस वृद्धि को तत्काल स्थगित किया जाए। ट्रांसपोर्ट सेक्टर के प्रतिनिधियों से मीटिंग करके न्यायसंगत एवं व्यावहारिक फीस संरचना तय की जाए। फिटनेस सेंटरों की क्षमता, पारदर्शिता एवं भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 15 वर्ष से पुराने लेकिन अच्छी कंडीशन वाले वाहनों के लिए रियायत या सब्सिडी की व्यवस्था की जाए। राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के अनुरूप ऐसे निर्णय लिए जाएं जो उद्योग के हितों को प्रभावित न करें।

ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कहाकि हमारा केंद्र सरकार से आग्रह हैं कि वह इस निर्णय पर पुनर्विचार करें, ताकि देश का ट्रांसपोर्ट सेक्टर, जो भारत की आर्थिक धमनियों में से एक है, अनावश्यक बोझ से न टूटे।