- ट्रांसपोर्टरों के संगठन एआईएमटीसी और आईटीओटीए का ऐलान : मुख्यमंत्री के 'सुशासन' के संकल्प को जारी रखने जाएंगे हाईकोर्ट की ऊपरी अदालत की शरण में
चेक पोस्ट ओवरलोड रोकने का माध्यम नहीं अवैध वसूली के अड्डे हैं न्यायालय को देंगे प्रमाण
एवीएस न्यूज. भोपाल
भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बंद किए गए परिवहन चेक पोस्टों को जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा 30 दिनों के भीतर पुनः प्रारंभ करने के आदेश के बाद ट्रांसपोर्टर समुदाय में भारी असंतोष है। ट्रांसपोर्टर्स ने इस फैसले को चुनौती देने और ऊपरी अदालत का रुख करने की घोषणा की है।
ट्रांसपोर्टर संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहाकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'सुशासन' के संकल्प को जारी रखने के लिए हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एआईएमटीसी और आईटीओटीए उच्च न्यायालय की ऊपरी अदालत की शरण में जाएगें। ज्ञात हो कि जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने 22 अप्रैल 2026 को ओवरलोडिंग रोकने और सड़क सुरक्षा के बहाने अंतरराज्यीय चेक पोस्ट को फिर से स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।
जिसके बाद मध्यप्रदेश सहित देशभर के ट्रांसपोर्टरों में खलबली मची गई और ट्रांसपोर्टरों के संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) एवं इंदौर ट्रक ऑपरेटर एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईटीओटीए) ने इस आदेश के खिलाफ हो गए और आदेश को लेकर डबल बेंच की शरण में जाने की तैयारी में जुट गए हैं।

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सीएल मुकाती ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा चेक पोस्ट खत्म करने के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि जब केंद्र स्तर पर डिजिटल सिस्टम की ओर बढ़ा जा रहा है, तो चेक पोस्ट फिर शुरू करना गलत है।
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने इस आदेश को तर्कसंगत नहीं माना है और कहा है कि वे इसके खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि चेक पोस्ट बंद होने से पहले वहां आरटीओ कर्मियों द्वारा भारी अवैध वसूली, अनावश्यक रोक-टोक और उत्पीड़न होता था। परिवहन चेक पोस्टों को पुनः प्रारंभ करने के आदेश के विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने अब कानूनी लड़ाई तेज करने का निर्णय लिया है।
ट्रांसपोर्टर संगठनों का मानना है कि इस निर्णय से राज्य में माल ढुलाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण वे न्यायालय की डबल बेंच में रिवीजन पिटीशन के माध्यम से आदेश पर पुनर्विचार की मांग करेंगे।
उच्च न्यायालय की डबल बेंच में रिवीजन पिटीशन दायर करेंगे
एआईएमटीसी के मैनजटिंग कमेटी मेंबर अमरजीत सिंह बग्गा, राजेंद्र सिंह त्रेहन, विजय कालरा, राकेश तिवारी, कपिल शर्मा हरीश डाबर ने कहाकि 1 जुलाई 2024 को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चेक पोस्ट बंद करने का निर्णय मध्य प्रदेश में 'सुशासन' और 'पारदर्शी परिवहन व्यवस्था' की स्थापना की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था। इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हम उच्च न्यायालय की डबल बेंच में रिवीजन पिटीशन दायर करेंगे।
मुख्यमंत्री से मिली ट्रांसपोर्टरों को बड़ी राहत हम वापस छीनने नहीं देंगे
उन्होंने कहाकि पूर्व में चेक पोस्टों पर चेकिंग के नाम पर घंटों जाम लगा रहता था। इससे न केवल कीमती समय की बर्बादी होती थी, बल्कि वाहन चालकों को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी। चेक पोस्ट बंद होने से चालकों और ट्रांसपोर्टरों को बड़ी राहत मिली थी, जिसे हम वापस छीनने नहीं देंगे।
हम न्यायालय के समक्ष प्रमाण भी प्रस्तुत करेंगे जिनमें पूर्व में एक परिवहन सिपाही से करोड़ों की संपत्ति, 52 किलो सोना और 250 किलो चांदी बरामद हुई थी। साथ ही हाल ही में लोकायुक्त द्वारा की गई कार्रवाई और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा अवैध वसूली पर लिखे गए पत्र को भी आधार बनाया जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार के निर्देशानुसार अब सभी टोल प्लाजा पर ऑटोमेटिक वजन कांटे और चार गुना पेनाल्टी की व्यवस्था लागू हो रही है। जब तकनीक के माध्यम से ओवरलोडिंग पर लगाम लगाई जा सकती है, तो फिर भ्रष्टाचार के केंद्रों (चेक पोस्टों) को दोबारा शुरू करने का कोई औचित्य नहीं है।
न्यायालय के समक्ष अपनी बात पुरजोर तरीके से रखेंगे
एआईएमटीसी और आईटीओटीए के पदाधिकारियों के अनुसार हमारी संगठन उच्च न्यायालय से यह गुहार लगाएगी कि चेक पोस्ट केवल अवैध वसूली के अड्डे हैं, न कि ओवरलोड रोकने का माध्यम। हम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश के विजन को मजबूती प्रदान करने और लाखों ट्रक चालकों के हितों की रक्षा के लिए अपनी बात पुरजोर तरीके से रखेंगे।






