तेल कंपनियां कर रही मनमानी : भुगतान के बाद भी नहीं दे रही पर्याप्त ईंधन, पंप संचालकों को आरोप
एवीएस न्यूज.भोपाल
तेल कंपनियों पर भुगतान करने के बावजूद पंप संचालकों ने पूरा पेट्रोल-डीजल न देने का आरोप लगाया है। डीलरों के अनुसार तेल कंपनियों की मनमानी पूर्ण रवैए के चलते भोपाल सहित प्रदेश की कई पेट्रोल पंप सीमित सप्लाई पर ही चल रहे हैं।
डीलरों के कहना है कि कंपनियों के बिक्री अधिकारी उच्च अधिकारियों के निर्देश पर ऐसा कर रहे हैं। जिससे डीलरों पर असुविधा तो बढ़ी ही है आम लोगों पैनिक हो रहे हैं। परिणाम स्वरूप पेट्रोल पंप में पेट्रोल भरवाने के लिए वाहनों की लंबी-लंबी लाइन लग रही हैं।
गौरतलब है कि राजधानी भोपाल जिले में 192 पेट्रोल पंप संचालित हैं, जिनमें प्रतिदिन 12 लाख लीटर से अधिक डीजल और 9 लाख लीटर से अधिक पेट्रोल विक्रय होता है। लेकिन वैश्विक तनाव के बीच कंपनियों की मनमानी पूर्ण वितरण नीति की बदौलत पेट्रोल पंपों पर मांग का दबाव 10 प्रतिशत अधिक बढ़ा हुआ है।
पंप संचालकों की मानें तो भुगतान पूरा करने के बाद भी कंपनियां पर्याप्त मात्रा में ईंधन सप्लाई नहीं कर रही हैं। कहा जा रहा है कि यह जानबूझकर किया जा रहा है, क्योंकि बिक्री अधिकारी स्पष्ट रूप से उच्च अधिकारियों के निर्देश का हवाला दे रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कंपनियों की वितरण नीति राजधानी भोपाल में हालात भले ही सीमित हैं, लेकिन आसपास के दूरदराज इलाकों और हाईवे पर स्थित पेट्रोल पंपों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है। आम वाहन चालकों को ईंधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
पेट्रोल पंपों को सिर्फ नगद में मिल रहा पेट्रोल, क्रेडिट सुविधा बंद
मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार तेल कंपनियों ने राजधानी भोपाल सहित समूचे मध्यप्रदेश में पंपों को दी जाने वाली क्रेडिट सुविधा पूरी तरह बंद कर दी है। अब पंप संचालकों को सिर्फ कैश जमा करने पर ही डीजल- पेट्रोल मिल रहा है। जरूरत से ज्यादा तेल स्टॉक रखने की अनुमति भी नहीं है।
पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के अनुसार पहले कंपनियां पंपों को उनकी बिक्री के आधार पर 4 से 5 दिन का उधार देती थीं। यह क्रेडिट लिमिट औसतन 12 लाख से 60 लाख रुपए तक होती थी। लेकिन क्रेडिट सुविधा बंद होने से पंप संचालकों पर फंड मैनेजमेंट का दबाव बढ़ गया है। अब वे उधार तेल देने की स्थिति में नहीं है। हालांकि आम लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सामान्य बनी रहेगी।
घटा कम करने कंपनियां सामान्य कम और प्रीमियम पेट्रोल से अधिक दे रही सप्लाई
पेट्रोलियम मंत्रालय एक ओर जहां स्पष्ट कर रहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। वहीं तेल कंपनियों वितरण नीति में बदलाव किए जाने और कंपनियों के अधिकारियों द्वारा मनमानी पूर्ण रवैया जाने से डीलरों के साथ-साथ आम उपभोक्ता कंपनियों की मनमानी पूर्ण नीतियों से दो-चार हो रहा है।
जानकारी के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच भारत में तेल विपणन कंपनियों द्वारा घाटे को कम करने के लिए एक रणनीतिक बदलाव की है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कंपनियां सामान्य पेट्रोल के बजाय प्रीमियम पेट्रोल (जैसे -एक्सपी95, पावर) की आपूर्ति और विपणन पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं। क्योंकि प्रीमियम पेट्रोल में मार्जिन बेहतर है, इसलिए कंपनियां उसकी सप्लाई पर जोर दे रही हैं।
बताया यह भी जा रहा है कि सरकार के दबाव के चलते सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां सामान्य ईंधन की कीमतों को नहीं बढ़ा पा रही हैं, इसलिए वे उच्च मार्जिन वाले प्रीमियम उत्पादों के माध्यम से परिचालन घाटे की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं। ज्ञात हो कि राजधानी भोपाल में सामान्य पेट्रोल 106 रुपए 48 पैसे प्रति लीटर है तो प्रीमियम पेट्रोल 116 रुपए लीटर है।

कंपनियों की वितरण नीति वितरकों के अनुकूल नहीं
तेल कंपनियों द्वारा उधारी में ईंधन देना 5 मार्च 2026 से बंद कर दिया गया है। कंपनियां चार दीवारी बंद कमरे में बैठकर वितरण नीति तैयार कर रही हैं, अत: वितरण नीति वितरकों के अनुकूल नहीं हैं। रहीं बात प्रीमियम पेट्रोल की तो कंपनियों जो तेल उपलब्ध करा रहीं हैं वह पंप वाले बेच रहे हैं।
अजय सिंह
अध्यक्ष, मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन

