एवीएस न्यूज.भोपाल 


राजधानी भोपाल सहित मध्यप्रदेश में पेट्रोल पंप संचालकों और तेल विपणन कंपनियों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। पंप संचालकों ने आरोप लगाया है कि  तीनों सरकारी कंपनियों ने डीजल बिक्री पर अघोषित बंदी कर दी है। जिस मशीन से हम डीजल बिक्री करते है उस मशीन से हम एक साथ 200 लीटर से अधिक प्रदाय नहीं कर सकते है। यदि कर दें तो मशीन लाक हो जाती है उसके बाद कंपनियां हमें कारण बताओ नोटिस जारी कर रही है।

पंप संचालकों ने कहा कि तेल कंपनियां सामान्य पेट्रोल की बजाय जबरन पावर पेट्रोल की सप्लाई थोप रही हैं। इसके विरोध में कई पंप संचालकों ने सामान्य पेट्रोल की खरीदी कम कर दी है, जिससे प्रदेश के करीब 30 फीसदी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल संकट की स्थिति बन गई है।


मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक राजधानी भोपाल समेत इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और अन्य शहरों में कई पेट्रोल पंप ड्राई हो चुके हैं। वाहन चालकों को पेट्रोल के लिए एक पंप से दूसरे पंप तक भटकना पड़ रहा है। कई स्थानों पर लंबी कतारें भी देखने को मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि तेल विपणन कंपनियों द्वारा उत्पन्न उक्त हालातों के चलते राजधानी भोपाल जिले में करीब 50 से 55 पेट्रोल पंप ड्राई चल रहे हैं।

 तेल कंपनियां द्वारा सामान्य पेट्रोल की सप्लाई समय सीमा पर नहीं मिलने से पेट्रोल पंप संचालकों को महंगे दाम वाला पावर पेट्रोल खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है और ग्राहकों बेच रहे है जिससे ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और बिक्री भी प्रभावित हो रही है। 


मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।  वहीं तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि सप्लाई व्यवस्था सामान्य है और किसी प्रकार की जबरन बिक्री नहीं की जा रही। कंपनियों के मुताबिक पावर पेट्रोल बेहतर गुणवत्ता वाला ईंधन है, जिसकी बाजार में मांग बढ़ रही है। इधर आम उपभोक्ता परेशान हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में महंगा पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है, जबकि कई पंपों पर सामान्य पेट्रोल उपलब्ध ही नहीं है। 


 डीजल भरवाने की सीमा को लेकर वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में असंतोष व्याप्त 
ऑल इंडिया मोटर परिवहन कांग्रेस (एआईएमटीसी) अध्यक्ष हरीश सभरवाल सहित सीएल मुकाती, ​विजय कालरा, ​राजेन्द्र त्रेहान, ​अमरजीत सिंह बग्गा, ​राकेश तिवारी, ​हरीश डाबर के अनुसार एचपीसीएल में 300 लीटर, बीपीसीएल व इंडियन ऑयल में एक बार में 200 लीटर से ज्यादा डीजल भरते ही मशीन लॉक हो रही है।बस और ट्रक का डीजल टैंक 150 से 600 लीटर के बीच होता है।  पंप संचालकों के अनुसार इस व्यवस्था का सीधा असर लंबी दूरी तय करने वाले बस और ट्रक ऑपरेटरों पर पड़ रहा है।