राज्य सरकार ने सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन और रूम टू रीड के सहयोग से मल्टीग्रेड टीचर गाइड तैयार की


एवीएस न्यूज. भोपाल 
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत बुनियादी साक्षरता और अंक-ज्ञान (एफएलएन) को मजबूत बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश का मल्टीग्रेड क्लासरूम मॉडल प्रभावी साबित हो रहा है।

सीमित शिक्षकों वाले सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के लिए तैयार की गई मल्टीग्रेड टीचर गाइड ने एक ही शिक्षक के लिए कक्षा 1 और 2 की पढ़ाई को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बना दिया है।
राज्य में मिशन अंकुर के तहत पिछले पांच वर्षों में 79 हजार सरकारी स्कूलों के लगभग 23 लाख बच्चों तक एफएलएन कार्यक्रम पहुंचाया गया। साथ ही सभी 52 जिलों में नियमित लर्निंग असेसमेंट की व्यवस्था विकसित की गई, जिसके तहत हर कक्षा के 25 से 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति का आकलन किया जाता है। इन प्रयासों का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दिया।

एनसीईआरटी के राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में कक्षा 3 के विद्यार्थियों ने भाषा में 66 प्रतिशत और गणित में 62 प्रतिशत औसत अंक हासिल किए, जो दोनों विषयों में राष्ट्रीय औसत से दो प्रतिशत अधिक हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से चार प्रतिशत और शहरी विद्यार्थियों का प्रदर्शन एक प्रतिशत बेहतर रहा। बालक और बालिकाओं, दोनों ने राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया।
राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लगभग 70 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में तीन या उससे कम शिक्षक हैं, जिन्हें एक साथ पांच कक्षाओं को पढ़ाना पड़ता है।


 इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन और रूम टू रीड के सहयोग से मल्टीग्रेड टीचर गाइड तैयार की। इसमें कक्षा 1 और 2 की पाठ योजनाओं को एक ही पृष्ठ पर 10 से 15 मिनट के शिक्षण खंडों में व्यवस्थित किया गया है, जिससे शिक्षक एक कक्षा को पढ़ाते समय दूसरी कक्षा के विद्यार्थी निर्धारित गतिविधियों के माध्यम से स्वयं अभ्यास करते हैं।

राज्य के 80 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों में यह गाइड और वर्कबुक वितरित की जा चुकी है। इसके परिणामस्वरूप सीमित शिक्षकों वाले स्कूलों में भी पढ़ाई अधिक व्यवस्थित हुई है, विद्यार्थियों की सीखने की निरंतरता बनी है और शिक्षकों के लिए अध्यापन की योजना बनाना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार मध्य प्रदेश का यह मॉडल दर्शाता है कि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए व्यावहारिक समाधान सीमित संसाधनों के बावजूद सरकारी विद्यालयों में सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं।