प्रकरण में देरी और नियमों के उल्लंघन के आरोप: खाद्य सुरक्षा अधिकारी पर कार्रवाई के लिए अपर कलेक्टर ने की सिफारिश
एवीएस न्यूज.भोपाल
खाद्य सुरक्षा से जुड़े एक मामले में अपर कलेक्टर एवं न्यायनिर्णायक अधिकारी, रायसेन ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुषमा पथरोल के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की है। मामला मंडीदीप स्थित श्रीधी मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है।
प्रकरण के अनुसार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी कुदसिया खान ने 20 दिसंबर 2023 को खाद्य कारोबारी जयकरण सिंह एवं रामप्रताप सिंह (फैक्ट्री मैनेजर) के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया था। न्यायालय की समीक्षा में सामने आया कि राज्य खाद्य प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के बाद मैसूर स्थित निर्दिष्ट खाद्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट 13 जुलाई 2021 को प्राप्त हो गई थी, लेकिन इसके बाद परिवाद करीब 2 वर्ष 5 माह 7 दिन की देरी से न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। देरी का कारण भी परिवाद में स्पष्ट नहीं बताया गया।

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 66(1) के तहत कंपनी के निदेशक, भागीदार, प्रबंधक, सचिव एवं कंपनी को भी आरोपी बनाया जाना था, लेकिन केवल फैक्ट्री मैनेजर के विरुद्ध ही परिवाद प्रस्तुत किया गया।
इस संबंध में खाद्य सुरक्षा अधिकारी कुदसिया खान से जवाब मांगा गया। जवाब में उन्होंने बताया कि नमूने सुषमा पथरोल द्वारा लिए गए थे, प्रकरण की तैयारी भी उन्हीं के द्वारा की गई थी और उन्होंने 2 दिसंबर 2023 को प्रकरण का प्रभार सौंपा था। दस्तावेजों के अनुसार, सुषमा पथरोल का रायसेन से सागर स्थानांतरण होने के बाद 4 अक्टूबर 2022 को उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया था।
इसके बावजूद आरोप है कि 4 अक्टूबर 2022 से 1 दिसंबर 2023 तक करीब 1 वर्ष 2 माह तक संबंधित प्रकरण के दस्तावेज उनके पास रहे। अपर कलेक्टर ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उल्लंघन की श्रेणी में माना है और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई योग्य बताया है।
आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया सुषमा पथरोल द्वारा पद का दुरुपयोग कर संबंधित पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसी आधार पर उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र घोषित होने के बाद भी आरक्षण के आधार पर पदोन्नति देने का आरोप
खाद्य एवं औषधि विभाग में चल रही विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
शिकायतकर्ता अनिल शर्मा ने आरोप लगाया है कि विभाग द्वारा एक वरिष्ठ फूड इंस्पेक्टर को अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण का लाभ देते हुए पदोन्नति देने की तैयारी की जा रही है, जबकि उनका जाति प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश की उच्च स्तरीय अनुसूचित जनजाति छानबीन समिति द्वारा फर्जी घोषित किया जा चुका है।
इसके इसके अलावा न्यायालय अपर कलेक्टर रायसेन द्वारा भी उनके पत्र क्रमांक 8/ रीडर -दो/ 2024,रायसेन दिनांक 9.1.24 के माध्यम से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधन 2018 अंतर्गत विभागीय कार्रवाई के अनुशंसा भी प्रभावशील है जिसका निराकरण अभी तक विभाग द्वारा नहीं किया गया है तथा उनकी निष्ठा भी संदिग्ध है l
शिकायतकर्ता के अनुसार, वरिष्ठ फूड इंस्पेक्टर श्रीमती सुषमा पथरोल के जाति प्रमाण पत्र को उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने अपने 26 फरवरी 2025 के आदेश के माध्यम से अमान्य एवं फर्जी घोषित किया था। उनका कहना है कि संबंधित आदेश वर्तमान में प्रभावशील है।
अनिल शर्मा का यह भी दावा है कि मामले में उच्च न्यायालय ने छानबीन समिति के आदेश या उसकी प्रक्रिया पर अंतिम रूप से रोक (स्टे) नहीं लगाई है। उनके अनुसार, न्यायालय द्वारा केवल अगली सुनवाई तक अंतरिम राहत प्रदान की गई थी, इसलिए छानबीन समिति का आदेश प्रभावी बना हुआ है , अलावा न्यायालय अपर कलेक्टर रायसेन का आदेश भी प्रभावी है l
इन परिस्थितियों में शिकायतकर्ता अनिल शर्मा ने आरोप लगाया है कि विभागीय लिपिक ओर बाबू और कर्मचारियों की मिलीभगत से संबंधित अधिकारी को अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ देते हुए पदोन्नति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पदोन्नति प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की है।






