महाराष्ट्र के छात्रों ने एआई से बदली टेनिस कोचिंग की तस्वीर
एवीएस न्यूज. मुंबई
भारत में टेनिस प्रशिक्षण अब और सुलभ हो सकता है और इसका श्रेय दो युवा खिलाड़ियों के प्रयास को जाता है। इन्होंने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करके बड़े शहरों के बाहर मौजूद कोचिंग की कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
औरंगाबाद के आदिश शेल्के और मुंबई की भाग्यश्री मीणा — दोनों 21 वर्ष के टेनिस खिलाड़ी और आईआईआईटी पुणे के कंप्यूटर साइंस के छात्र हैं। इन्होंने नेक्स्टप्लेएआई नाम का प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है। यह प्लैटफ़ॉर्म मशीन लर्निंग की मदद से टेनिस के वीडियो का विश्लेषण करता है और स्ट्रोक, फुटवर्क और मैच मूवमेंट्स पर व्यक्तिगत फीडबैक देता है। इसका लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के खिलाड़ियों को वही मार्गदर्शन देना है, जो महंगी अकादमियों और नामी कोचों के पास मिलता है।
उनके इस नवाचार को सैमसंग सॉल्व फॉर टुमॉरो कार्यक्रम के तहत सोशल चेंज थ्रू स्पोर्ट एंड टेक्नोलॉजी श्रेणी में पुरस्कार मिला है। इस साल चार विजेता टीमों को अपने आइडियाज़ को आगे बढ़ाने के लिए आईआईटी दिल्ली में 1 करोड़ रूपये की इनक्यूबेशन सहायता दी गई है।
आदिश ने बताया कि उन्हें यह आइडिया भारत में टेनिस की सीमित पहुंच देखकर आया। उन्होंने कहा, “टेनिस कोचिंग एक तरह की लग्ज़री बन गई है। औरंगाबाद जैसे शहर में अच्छी सुविधाएं और अनुभवी कोच मिलना बहुत मुश्किल है। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी सही समय पर सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण खेल छोड़ देते हैं।”
नेक्स्टप्लेएआई खिलाड़ियों को अपनी प्रैक्टिस रिकॉर्ड कर उसे प्रोफेशनल खिलाड़ियों के मानकों से तुलना करने की सुविधा देता है—चाहे वह सर्व की तकनीक हो, रैकेट एंगल हो या कोर्ट पर मूवमेंट। भाग्यश्री मीणा कहती हैं कि उनका लक्ष्य टेनिस सीखने को सस्ता और सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा, “दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों का बहुत सारा डेटा और फुटेज उपलब्ध है। हम उस ज्ञान को छोटे शहरों के खिलाड़ियों तक पहुँचाना चाहते थे।”
सैमसंग के मार्गदर्शन से टीम ने प्लेटफ़ॉर्म को इस तरह तैयार किया कि यह अलग-अलग खिलाड़ियों की सीखने की शैली को समझ सके। आदिश बताते हैं, “हर खिलाड़ी की लय और तकनीक अलग होती है। एआई को उसी विशिष्टता को पहचानना चाहिए—एक जैसा ढांचा थोपना नहीं चाहिए।”
अब यह टीम ज़िला खेल संघों और टेनिस एकेडमीज़ के साथ मिलकर इस प्लेटफ़ॉर्म का छोटे शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करना चाहती है। वे अपनी टीम में ऐसे डेवलपर्स और खिलाड़ियों को भी शामिल करना चाहते हैं जो छोटे शहरों से आते हों और इन चुनौतियों को करीब से समझते हों।
भाग्यश्री कहती हैं, “हम चाहते हैं कि टेनिस चैंपियन उन जगहों से निकलें, जहां से लोग उम्मीद भी नहीं करते। प्रतिभा हर जगह है—मौक़े भी हर जगह होने चाहिए।”

