एवीएस न्यूज..भोपाल 


फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित संवाद मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास पर परिचर्चा कार्यक्रम में प्रदेश के औद्योगिक, व्यापारिक और आर्थिक विकास को नई गति देने के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों, व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों, उद्यमियों और विशेषज्ञों ने भाग लेकर निवेश, उद्योग विस्तार और रोजगार सृजन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने सुझाव दिए।


कार्यक्रम में फेडरेशन के अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि संवाद उद्योग और शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की एक सतत पहल है। इस मंच के माध्यम से उद्योग जगत और प्रशासन के बीच खुला संवाद स्थापित कर प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए ठोस कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से निवेश को बढ़ावा मिलेगा, नए रोजगार अवसर सृजित होंगे और मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष आरएस गोस्वामी  तथा दीपक शर्मा ने भी उद्योग एवं शासन के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नीति-निर्माण प्रक्रिया में उद्योगों की सक्रिय भागीदारी से निवेश, उत्पादन, नवाचार और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।


परिचर्चा के दौरान निवेश प्रोत्साहन, निर्यात संवर्धन, कौशल विकास, उद्यमिता, फार्मा उद्योग, कृषि आधारित उद्योग, एमएसएमई विकास, श्रम सुधार, उद्योग-अकादमिक सहयोग और वैश्विक व्यापार अवसरों जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने उद्योग स्थापना और विस्तार से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।


इस अवसर पर फेडरेशन ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को उद्योग हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण ज्ञापन भी सौंपे। इनमें फायर एनओसी प्रक्रिया के सरलीकरण, औद्योगिक क्षेत्रों में संपत्ति कर नीति के युक्तियुक्तकरण, भोपाल-स्मोलेंस्क सिस्टर सिटी समझौते से संबंधित कार्रवाई, फार्मा उद्योगों के लिए लाइसेंस वैधता अवधि बढ़ाने, लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत करने संबंधी सुझाव शामिल रहे। इसके अलावा फैक्ट्री अधिनियम के तहत लाइसेंसिंग शुल्क, निरीक्षण और अनुमतियों की प्रक्रियाओं में उद्योग-अनुकूल सुधारों की भी मांग की गई।

कार्यक्रम में प्राप्त सुझावों के आधार पर मध्यप्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए एक व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया गया। साथ ही संबंधित विभागों तक सुझाव पहुंचाकर उनके क्रियान्वयन के लिए सतत अनुवर्ती कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी।