एवीएस न्यूज..भोपाल 
मध्यप्रदेश सरकार के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा पर बुधवार पर पेश बजट को फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज सहित अन्य व्यापारिक और उद्योग संगठनों ने स्वागत करते हुए इसे प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास एवं रोजगार सृजन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया संतुलित एवं दूरदर्शी बजट बताया है।  संगठनों के प्रतिनिधियों के अनुसार बजट में “ज्ञानी” आधारित विकास मॉडल के माध्यम से गरीब, युवा, अन्नदाता एवं नारी शक्ति के साथ-साथ अधोसंरचना और उद्योग को विकास की केंद्रीय धुरी बनाया गया है, जिससे उत्पादन क्षमता और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।   
 

कारोबारियों ने कहाकि ने मांग 
कारोबारियों ने कहाकि ने मांग की है कि सरकार एमएसएमई के लिए सरल एवं सस्ती ऋण सुविधा उपलब्ध कराए।  औद्योगिक अनुमतियों की सिंगल विंडो प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाए। लॉजिस्टिक लागत कम करने के लिए  औद्योगिक क्लस्टर आधारित अधोसंरचना विकसित करें। निर्यात संवर्धन के लिए विशेष नीति लागू करने पर बल दे, इसके साथ ही स्टार्टअप एवं नवाचार आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए।
 

  क्रेडाई की मेट्रोपॉलिटन रीजन फोकस पर तीन प्रमुख मांगें  
क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहाकि हमारी तीन प्रमुख मांग हैं पहली भोपाल–इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए ट्रंक इंफ्रा प्लस ट्रांजिट-लिंक्ड डेवलपमेंट की स्पष्ट, टाइम-बाउंड पाइपलाइन।  दूसरी राजधानी भोपाल के लिए “कैपिटल रिडेवलपमेंट पैकेज” पुराने क्षेत्रों का रिन्यूअल, सरकारी व सार्वजनिक जमीन का बेहतर उपयोग, और नगर निकाय की आय बढ़ाने के उपाय और तीसरी मांग है कि ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस, ऑनलाइन मंजूरी, तय समय-सीमा, और नियमों की स्थिरता ताकि होल्डिंग कॉस्ट घटे और घर खरीदार को फायदा मिले। मीक ने कहा कि प्रदेश की ग्रोथ के डेटा अब ईज ऑफ लिविंग से आगे ईज़ ऑफ अर्निंग की मांग कर रहे हैं और इसकी धुरी भोपाल मेट्रोपॉलिटन कैपिटल रीजन बन सकता है।
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 किसान एवं कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया 
वित्त मंत्री ने लाड़ली बहना योजना का विस्तार सराहनीय कदम है। किसान एवं कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया । दुग्ध उत्पादन एवं सहकारी डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया गया। इसके साथ सोलर पंप एवं सौर ऊर्जा आधारित कृषि को बढ़ावा।  छात्र एवं युवाओं के लिए कौशल विकास, आईटी , एआई एवं रिसर्च पार्क की स्थापना पर बल दिया। साथ ही कन्या एवं महिला छात्रावासों को डिजिटल, सुरक्षित एवं आधुनिक बनाने बजट में प्रावधान हुआ। बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा (जूडो-कराटे, मार्शल आर्ट), योग, सूर्य नमस्कार, गीता-संस्कृत शिक्षा एवं नैतिक मूल्यों का समावेश हुआ जो कि सराहनीय कदम है। 
संतोष अग्रवाल
 अध्यक्ष, भोपाल स्टॉक इंवेस्टर्स एसोसिएशन
 


 मप्र की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में बजट 
समृद्ध, संपन्न, सुखी एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त मध्यप्रदेश” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में बजट 2026-27 एक दूरदर्शी और परिवर्तनकारी पहल है।  प्रधानमंत्री के ज्ञान मंत्र से प्रेरित होकर प्रदेश सरकार ने इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं इंडस्ट्री को जोड़ते हुए ‘ज्ञानी ’ की अभिनव अवधारणा प्रस्तुत की है। इस मार्गदर्शक सिद्धांत के केंद्र में गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी शक्ति, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री को स्थान दिया गया है,जो संतुलित, समावेशी और सतत विकास की मजबूत आधारशिला हैं। वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट दीर्घकालिक विकास के लिए सुविचारित एवं संरचित दृष्टि प्रस्तुत करता है।
सुनील पंजाबी 
अध्यक्ष, भोपाल किराना वायपारी महासंघ

  


 समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए बनाया गया बजट  
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किया गया बजट समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए बनाया गया बजट है किंतु इस बजट में व्यापारियों के एवं व्यापरियों के मार्केट, बाजार आदि क्षेत्रों के डबलपमेंट की बात नहीं कही गई है। औद्योगिक प्रोत्साहन के लिए लगभग 2500 करोड़ रूपए का प्रावधान है, वहीं डेस्टीनेशन मध्यप्रदेश, इन्वेस्टमेंट ड्राइव के लिये लगभग 200 करोड़ रुपए का प्रावधान है, किंतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के बाजारों को, मार्केटों को सुव्यवस्थित करने, बाजारों में मूलभूत सुविधा जुटाने, अतिक्रमण मुक्त बाजार बनाने एवं टेक्नोलोजीयुक्त बाजार बनाने की दिशा में किसी प्रकार का प्रावधान नहीं किया गया है। 
सुनील जैन 501
अध्यक्ष, मप्र एफएमसीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन 
  


 
उद्योगों को प्रोत्साहन देने की बजट में कोई योजना नहीं 
मध्यप्रदेश का बजट  व्यापार जगत और व्यापारियों के लिए बहुत निराशाजनक रहा। 2026 कृषि वर्ष मनाने के बावजूद उससे संबंधित उद्योगों को प्रोत्साहन देने की इस बजट में कोई योजना नहीं है । आज मध्य प्रदेश का दाल उद्योग पूरी तरह तबाह हो गया है। टैक्स की मार से परेशान व्यापारी प्रतिस्पर्धा में अन्य प्रदेशों के बाजार से बाहर हो गया। सरकार को डीजल-पेट्रोल  पर वेट घटाना चाहिए था] जिससे मध्यम वर्ग को राहत मिलती।  बजट से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कोई सुधार नजर नहीं आता( लोकलुभावनी योजनाओं के कारण आम जनता पर कर्ज का बोझ बढ़ता जाएगा।
  समीर भार्गव
 अध्यक्ष, अनाज तिलहन व्यापार संघ  सिरोंज

 

  वित्त प्रबंधन सरकार की अहम चुनौती 
 सरकार अधोसंरचना विकास और निवेश कार्यक्रम को गति देकर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के प्रयास में जुटी है , ताकि अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती रहे। विगत कुछ वर्षों में सरकार ने ज्यादा कर्ज लिया है अभी बजट की पूर्व ही 5,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया गया है। कर्ज लेने में कोई बुराई नहीं, लेकिन राज्य के उपलब्ध सीमित संसाधनों के साथ ली गई कर्ज की  राशि का  वितरण राज्य के राजस्व और आय के स्रोतों को बढ़ाने के लिए के लिए किया जाना चाहिए। जिससे आर्थिक सशक्तिकरण के साथ आर्थिक  गतिविधियां बढ़े और रोजगार के नए अवसर सृजित हो सके। जब जनता के हाथ में पैसा होगा तो उसका खर्च किया जाएगा। इस खर्च करने से सरकार को टैक्स के रूप में अप्रत्यक्ष आमदनी होती है। 
सुनील अग्रवाल
 प्रदेश अध्यक्ष, कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स

 बजट देता है कृषि, महिला कल्याण और सामाजिक क्षेत्र में सकारात्मक संकेत  
 मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 में अनेक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। राज्यहित, जनकल्याण एवं आर्थिक सुदृढ़ता को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न मदों में बजट प्रस्तावित किया गया है , लेकिन व्यापार और व्यापारियों के हित में और बाजार उत्थान पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। सरकार ने किसान एवं कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है।  लेकिन सिंचाई विस्तार के लिए नर्मदा परियोजना एवं नदी जोड़ो योजना (नर्मदा–ताप्ती–क्षिप्रा–पार्वती–चंबल आदि) को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर विशेष बल देना चाहिए था। यह बजट कृषि, महिला कल्याण, अवसंरचना एवं सामाजिक क्षेत्र में सकारात्मक संकेत देता है। तथापि, उद्योग, व्यापार, जेम्स एंड ज्वेलरी, एमएसपी नीति, पर्यटन, परिवहन एवं राजकोषीय अनुशासन पर और ठोस कदम अपेक्षित हैं। राज्य के समग्र विकास, रोजगार सृजन एवं जनहित को सर्वोपरि रखते हुए उपर्युक्त सुझावों पर सकारात्मक विचार किया जाना चाहिए।
संजीव गर्ग गांधी
अध्यक्ष- होलसेल सराफा एसोसिएशन, भोपाल

 

  डीजल-पेट्रोल पर वैट दर की कमी की उम्मीद नहीं हुई पूरी 
 मध्यप्रदेश के व्यापार और व्यापारियों के उत्थान के लिए शिवराज सरकार में मध्य प्रदेश व्यापार संवर्धन परिषद का जो गठन हुआ था मोहन सरकार ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।  लेकिन मोहन यादव सरकार ने उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाया है। अत: वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट से व्यापारियों और व्यापार जगत में निराशा है। उम्मीद थी कि डीजल-पेट्रोल पर वैट दर की  कमी होगी। लेकिन आमजनता की यह उम्मीद पूरी नहीं हुई।   
रमाकांत तिवारी
पूर्व प्रदेश महामंत्री, कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट ) 

 


 पारंपरिक बाजारों की जमीनी समस्याओं स्वदेशी के विकास और आत्मनिर्भर 
 मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव, वित्तमंत्री जगदीश देवडा, प्रधानमंत्री की स्वदेशी खरीदो, स्वदेशी बेचो की परिकल्पना से अलग दृष्टिकोण रखते हुए स्वदेशी के विकास और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए  एक निश्चित राशि इस बजट में आवंटन किया जाना आवश्यक था।  प्रक्रियाओं के सरलीकरण, वेयरहाउस, ऋण सुविधा एवं लॉजिस्टिक ढांचे को मजबूत करने जैसी घोषणाएं स्वागत योग्य हैं, जिससे व्यापार को गति मिलने की उम्मीद है। किंतु पारंपरिक बाजारों की जमीनी समस्याएं, स्थानीय कर-शुल्क तथा बढ़ते ऑनलाइन व्यापार से असमान प्रतिस्पर्धा  पर अभी और ठोस निर्णय अपेक्षित हैं।  बजट को व्यापारी वर्ग संतुलित दृष्टि से देख रहा है। 
  ईश्वरदास संगतानी
अध्यक्ष, थोक चावल- दाल व्यापारी संघ 

 


दोहरे कर समाप्त करने पर विचार अपेक्षित
वित्तमंत्री ने बजट में वित्तीय अनुशासन एवं राजकोषीय सुधार  का परिचय दिया है। इसके अलावा कोई नया टैक्स नहीं लगाया जाना सकारात्मक संकेत है। दोहरे कर समाप्त करने पर विचार अपेक्षित। राज्य के बढ़ते घाटे को कम करने के लिए  दीर्घकालिक आर्थिक नीति निर्धारण आवश्यक। यह बजट कृषि, महिला कल्याण, अवसंरचना एवं सामाजिक क्षेत्र में सकारात्मक संकेत देता है।  
नवनीत अग्रवाल
संगठन महामंत्री  एवं प्रवक्ता, सर्राफा महासंघ भोपाल

 


 
व्यापारियों की सभी उम्मीदें अधूरी रह गई
 बजट में कई सकारात्मक घोषणाएं हुई हैं, फिर भी व्यापारिक वर्ग की कुछ प्रमुख अपेक्षाएं अधूरी रह गईं।  जिसमें एमएसएमई और लघु व्यापारियों के लिए कर राहत व सरल लाइसेंस प्रक्रिया पर स्पष्ट प्रावधान अपेक्षित था, स्थानीय व्यापार संरक्षण और ई-कॉमर्स नीति पर ठोस निर्णय की आवश्यकता,  बढ़ते सरकारी ऋण को देखते हुए वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर और स्पष्ट रोडमैप आना चाहिए । लेकिन व्यापारियों की सभी उम्मीदें अधूरी रह गई। 
धर्मेन्द्र शर्मा
 जिलाध्यक्ष भोपाल, कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स  

व्यापारियों की मांग है कि अतिक्रमण मुक्त बाजार चाहिए
आयुष्मान योजना का दुरुपयोग हो रहा है उसकी भी निगरानी होनी चाहिए। मकान दुकान बनाने का सामान सामान बहुत महंगा होता जा रहा है जमीन पहले ही महंगी है उन पर टैक्स कम होना चाहिए।  आम आदमी तथा व्यापारियों के लिए मांग है की अतिक्रमण मुक्त बाजार होने चाहिए। जगह-जगह पर रोड पर सामान बेचने वाले लोगों के खिलाफ फेरी वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। क्योंकि वह किसी प्रकार का कोई प्रॉपर्टी टैक्स ,रोड टैक्स, जीएसटी इनकम टैक्स नगर निगम टैक्स आदि नहीं देते हैं, जबकि एक आम व्यापारी है सभी भरता है और यह जगह-जगह पर  रोड ट्रैफिक को भी जाम करते हैं। उस पर रोक लगनी चाहिए उसके निगरानी के लिए एक समिति बनना चाहिए।
अरविंद जैन,
श्री नाकोड़ा इन्वेस्टमेन्ट, भोपाल