निगम के आला अधिकारियों के साथ मैदानी अमला भीषण गर्मी में भी दिन-रात तैयारियों में जुटा 
10 वें सर्वेक्षण के लिए तीन स्तरों पर मूल्यांकन के लिए राजधानी तैयार, सड़कें, बाजार, बैक लेन और नालों की सफाई के साथ पेंटिंग और मेंटेनेंस का काम तेज
पिछली बार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के चलते शहर चकाचक था, इस बार फील्ड में अधिकारियों के साथ मैदानी अमले ने भी झोंकी पूरी ताकत
आदमपुर में कचरे के पहाड़ के चलते घटी थी रैकिंग, इस बार बदलाव

 

एमएम सिद्दीकी, भोपाल।
 

शहर में 10 वें स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए दिल्ली से कभी भी टीम आ सकती है। इसे देखते हुए निगम प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। निगम के आला अधिकारियों के साथ मैदानी अमला भीषण गर्मी में भी दिन-रात तैयारियों में जुटा है। बीते साल की तुलना में इस साल व्यवस्थाएं बेहतर करने खासी मेहनत करना पडी। दरअसल पिछले सर्वे के दौरान ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के चलते शहर में व्यवस्थाएं चकाचक थीं तो दूसरे पायदान पर शहर पहुंचा था। इस बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा दिलाने पूरा निगम प्रशासन, महापौर, विधायक, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि जुटे हुए हैं। 
शहर के सभी गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन, सार्वजनिक स्थल, सुलभ शौचालय, स्कूलों की दीवारें व अन्य खाली दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग से नया लुक दिया गया है, जबकि कई बंद फाउंटेन शुरू किए गए हैं। इसी तरह आदमपुर छावनी में 6 लाख टन से ज्यादा लेगेेसी वेस्ट का निष्पादन भी शुरू हो चुका है। यहां चारकोल प्लांट भी लग चुका है। इस संबंध में महापौर मालती राय का कहना है कि ​बीते पांच-छह माह से लगातार तैयारियां की जा रही हैं। नगर निगम प्रशासन, जनप्रतिनिधि, आम लोगों के सहयोग से हमारा संकल्प है कि इस बार शहर को देश के सबसे स्वच्छ शहर बनाएंगे। इसके लिए एक बडा अमला लगातार फील्ड में लगा हुआ है। 


3 हजार कर्मचारी 45 दिन आन-ग्राउंड करेंगे सर्वेक्षण
स्वच्छता सर्वेक्षण के मूल्यांकन के लिए इस बार देशभर में 3,000 से अधिक प्रशिक्षित फील्ड मूल्यांकनकर्ता तैनात किए गए हैं। ये टीमें 45 दिनों तक सभी शहरी स्थानीय निकायों में ऑन-ग्राउंड सर्वेक्षण करेंगी। सर्वेक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा, जिससे निरीक्षण के दौरान लोकेशन और गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी हो सकेगी।


स्वच्छता सर्वेक्षण के ये होंगे 10 प्रमुख आधार
शहर में साफ-सफाई और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, मशीनों से नालियों और सीवर की सफाई, गीले और सूखे कचरे को अलग करना और उसका सही प्रबंधन, सफाई और जागरुकता अभियान चलाना, ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान, स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाना, सभी लोगों को साफ और सुरक्षित शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना, सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखना, इस्तेमाल किए गए पानी और गंदे पानी का सही प्रबंधन, नागरिकों की शिकायतों का समाधान और उनकी प्रतिक्रिया लेना। 

शहर में तीन स्तर पर होगा मूल्यांकन
स्वच्छता सर्वेक्षण में शहरों का मूल्यांकन तीन स्तर पर किया जाएगा। इसमें सबसे पहले दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच होगी, इसके बाद जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया जाएगा। वहीं पूरी प्रक्रिया के दौरान नागरिकों की राय और फीडबैक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
डेस्कटॉप मूल्यांकन:- इस चरण में नगर निगम और संबंधित विभागों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, रिकॉर्ड, रिपोर्ट और ऑनलाइन डेटा की जांच की जाएगी। इसमें सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, शौचालय सुविधाएं और अन्य योजनाओं से जुड़े दावों का परीक्षण होगा।
ऑन-फील्ड मूल्यांकन:- इसके तहत सर्वे टीम शहर में अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखेगी। सड़क सफाई, कचरा संग्रहण, सार्वजनिक शौचालय, डंपिंग साइट और अन्य व्यवस्थाओं का मौके पर निरीक्षण और सत्यापन किया जाएगा।
सिटीजन फीडबैक:- पूरी प्रक्रिया के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप और अन्य माध्यमों से आम लोगों की राय और फीडबैक भी लिए जाएंगे। नागरिकों की संतुष्टि और शिकायतों के आधार पर भी शहरों को अंक दिए जाएंगे।

देश के 72 शहरों के स्वच्छ सर्वेक्षण में इस तरह दिए जाएंगे अवाॅर्ड
स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत इस बार देशभर के 72 शहरों को अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे। शहरों को उनकी आबादी के आधार पर पांच वर्गों में बांटा गया है। 

आबादी के आधार पर शहरों की श्रेणियां
मिलियन प्लस सिटी-10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर
बिग सिटी- 1 लाख से 10 लाख तक आबादी वाले शहर
मीडियम सिटी - मध्यम श्रेणी के शहर
स्मॉल सिट-छोटे शहर
वेरी स्मॉल सिटी-बहुत छोटे शहर