भोपाल वैश्विक नॉलेज–सिटी लीग में शामिल : सत्तर वर्षों बाद राजधानी को 3,707 एकड़ एजू–सिटी और न्यू टेक कॉरिडोर
एवीएस न्यूज .भोपाल
3,707 एकड़ के‘भोपाल एजू-सिटी’ का एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट राजधानी के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। पिछले लगभग सत्तर वर्षों में भोपाल ने राजधानी की प्रशासनिक जिम्मेदारियां तो निभाईं, परंतु उसे वह आर्थिक9तकनीकी दृष्टि कभी नहीं मिली,लेकिन अब पहली बार वह दिशा स्पष्ट दिखाई दे रही है।
सरकार का यह निर्णय भोपाल विश्व के उन चुनिंदा शहरों की कतार में खड़ा हो गया है, जहां अगली पीढ़ी के नॉलेज और एआई सिटीज विकसित किए जा रहे हैं जैसे सिंगापुर का ‘वन-नॉर्थ’, अबू धाबी का ‘मसदर–स्टारगेट क्लस्टर’, और शेनझेन के इनोवेशन डिस्ट्रिक्ट। यह शहर आने वाले 30-40 वर्षों की तकनीकी–आर्थिक क्रांति के लिए बनाए जाते हैं आज भोपाल उसी भविष्य की तैयारी कर रहा है। यह बात ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर मनोज मीक ने कही।

उन्होंने कहाकि ‘कमाल का भोपाल’ अभियान ने पिछले एक वर्ष में लगातार इस बात पर जोर दिया है कि राजधानी को एक बड़े पैमाने की इनोवेशन डिस्ट्रिक्ट - जिसमें उच्च शिक्षा, अनुसंधान, स्टार्ट-अप, क्लीन कंप्यूट, क्वांटम व एआई क्लस्टर, और सतत शहरी विकास एकीकृत हों, की आवश्यकता है। यह देखकर विनम्र संतोष होता है कि आज सरकार की 3,707 एकड़ की यह योजना उसी नागरिक-विजन की गूंज है।
उन्होंने कहाकि यह परियोजना भोपाल की जीडीपी, रोजगार, निवेश और राष्ट्रीय–वैश्विक साझेदारियों को नई दिशा दे सकती है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जैसे इंस्टीट्यूशंस की मौजूदगी भोपाल को वैसा अकादमिक आधार देती है जो देश में बहुत कम शहरों को मिलता है।
एजू-सिटी और बीएचईल रीजन बना सकते हैं राजधानी के लिए दोहरे विकास का अक्ष
भेल टाउनशिप की विशाल रिक्त भूमि का भविष्य भी समान रूप से महत्वपूर्ण है - यह केंद्र में स्थित हजारों एकड़ का टेक–इंडस्ट्रियल क्षेत्र आज भी पुनर्पयोग के लिए उपलब्ध है। एजू-सिटी और बीएचईल रीजन मिलकर राजधानी के लिए दोहरा विकास-अक्ष बना सकते हैं- एक ज्ञान और नवाचार द्वारा संचालित, दूसरा क्वांटम, एआई, क्लीन कंप्यूट और स्मार्ट इंडस्ट्रीज़ के माध्यम से।
‘कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर मनोज मीक कि कमाल का भोपाल’ अभियान इस घोषणा का स्केल, उसकी व्यापकता और उसकी टाइमलाइन यह दर्शाती है कि नागरिक-विजन और शासकीय दूरदृष्टि किस सुंदरता से एक-दूसरे से जुड़ सकती हैं।‘ कमाल का भोपाल’ अभियान इस ऐतिहासिक अवसर को वास्तविकता में बदलने के लिए शोध, भागीदारी और सतत सहयोग प्रदान करता रहेगा।

