भोपाल। सर्राफा कारोबारियों ने केंद्र सरकार से ज्वेलरी पर लगे जीएसटी और इंपोर्ट ड्यूटी टैक्स में कटौती की मांग की है, इसके साथ ही  मौजूदा समय में पेन कार्ड अनिवार्यता की लिमिट जो 2 लाख रुपए तक निर्धारत है, इसे बढ़ाकर 4 लाख रुपए से अधिक किया जाए।  क्योंकि सोना 30 लाख रुपए प्रति किलो बढ़कर मौजूद समय 1 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है तो वहीं चांदी 35 हजार रुपए उछलकर  1 लाख 15 हजार रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गई है। अत: उपभोक्ता हित को ध्यान में रखते हुए नगद खरीदी लिमिट बढ़ाई जाए।  ताकि उपभोक्ताओं पर टैक्स का बोझ कम हो, बाजार में मंदी से बचाया जा सके और व्यापार को बढ़ावा मिलें। 


गौरतलब है कि जीएसटी की दर बढ़ाने की अफवाहों से बाजार में चिंता है। कारोबारियों की प्रमुख मांग है कि सोने और चांदी पर तीन फीसदी की जीएसटी दर को घटाया जाए। अगर जीएसटी दरें बढ़ती हैं, तो सोने और चांदी के आभूषण महंगे हो जाएंगे, जिससे आम ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित होगी और बाजार में मंदी आ सकती है। 


सर्राफा कारोबारी ने कहाकि मौजूदा समय में सोने -चांदी के भाव ऐतिहासिक ऊंचाई पर है। वर्तमान में 2 लाख रुपए में 20 ग्राम की सोने की ज्वेलरी भी ग्राहकों को नहीं मिल पाती है अत: सरकार नगद में ज्वैलरी खरीदी की लिमिट 2 लाख रुपए को दोगुना करें और  फिर इस पर पैन कार्ड अनिवार्य का निर्धारण करें।  


 -जीएसटी और  इंपोर्ट ड्यूटी कम करें सरकार 
सराफा व्यापारियों ने कहाकि बैंक एवं सरकार द्वारा ऑथराइज बुलियन डीलर कंपनी के पास सस्ते दाम पर सोना उपलब्ध होगा तो भारत में चोरी-छुपे आने वाले सोने पर रोक लगेगी।  जिस दिन नगद में सोना महंगा बिकना शुरू हो जाएगा, उस दिन से आरटीजीएस -एनईएफटी के माध्यम और सोने -चांदी की ज्वेलरी इंडस्ट्रीज में सभी बिलिंग से ही बेचने के लिए बाध्य हो जाएंगे।  व्यवसायियों ने कहा घरेलू बाजार में सोने-चांदी के भाव  काफी बढ़ गए हैं ।  ऐसे में अत: केंद्र सरकार जीएसटी और इंपोर्ट ड्यूटी को कम करती है तो उनको टैक्स कलेक्शन में नुकसान नहीं होगा। आसानी बैंक के माध्यम से  सोने का कारोबार के साथ टैक्स कलेक्शन कई गुना बढ़ जाएगा ।


- डर और खौफ की तलवार नहीं लटकनी चाहिए
 कारोबारियों ने कहाकि सरकार टैक्स सिस्टम दर, अन्य व्यापारी- उद्योग पर लगने वाले कानून को सरलीकरण करना चाहिए, जिससे हर व्यवसाय सेक्टर का व्यापारी, उद्योगपति आगे होकर पूरा व्यवसाय बैंकिंग और अकाउंटिंग के माध्यम से खुद स्वेच्छा से करना शुरू करने के लिए बाध्य हो जाएगा। अगर पेचीदा और डर वाला कानून होगा तो सिस्टम में आने से हर कोई डरेगा। अत:  कानून सरल और फ्रेंडली हो, डर और खौफ की तलवार नहीं लटकनी चाहिए।