माध्यमिक शिक्षा मंडल की परेशानी बढ़ी - क्यूआर कोड और सीसीटीवी टेंडर विवाद पर हाईकोर्ट में याचिका, पारदर्शिता पर उठे सवाल
एवीएस न्यूज. भोपाल/जबलपुर
माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपीबीएसई) पर एक के बाद एक टेंडर विवादों का साया गहराता जा रहा है। पहले क्यूआर कोड आधारित परीक्षा निगरानी प्रणाली के टेंडर में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे, और अब सीसीटीवी निगरानी टेंडर पर भी पक्षपात और फर्जीवाड़े के आरोप लग चुके हैं। दोनों मामलों में जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएँ दायर की गई हैं।
पहला मामला क्यूआर कोड आधारित निगरानी प्रणाली से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें रखी गई हैं जिसके कारण परियोजना की लागत कई गुना बढ़ गई। सबसे पहले बोर्ड ने क्यूआर कोड आधारित परीक्षा निगरानी प्रणाली का टेंडर जारी किया। इसमें विभाग ने एक खास पेटेंटेड तकनीक को अनिवार्य कर दिया। जबकि इस प्रोजेक्ट के लिए ऐसी तकनीक की वास्तविक आवश्यकता ही नहीं थी। तकनीकी जानकारों का कहना है कि सामान्य क्यूआर कोड सिस्टम कुछ लाख रुपये में तैयार किया जा सकता था, लेकिन पेटेंटेड तकनीक की शर्त जोड़कर परियोजना की लागत को लगभग 10 गुना बढ़ा दिया गया। इस पर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह शर्त जानबूझकर एक विशेष निजी कंपनी को लाभ पहुँचाने के लिए रखी गई थी।
टेंडर में बोलीदाता के लिए 1,500 करोड़ रुपये का टर्नओवर, 1,000 करोड़ की नेटवर्थ और 25 साल का अनुभव अनिवार्य किया
क्यूआर कोड विवाद के बाद बोर्ड ने परीक्षा निगरानी के लिए दूसरा टेंडर जारी किया, इस बार सीसीटीवी परियोजना के लिए टेंडर जारी किया गया। यह टेंडर कुल 10 करोड़ रुपये का था, लेकिन पात्रता शर्तें देखकर विशेषज्ञ और बोलीदाता हैरान रह गए। टेंडर में बोलीदाता के लिए 1,500 करोड़ रुपये का टर्नओवर, 1,000 करोड़ की नेटवर्थ और 25 साल का अनुभव अनिवार्य किया गया, जबकि सीसीटीवी क्षेत्र में इस तरह की शर्तों की कोई आवश्यकता नहीं थी। सूत्रों के अनुसार, यह टेंडर सरकारी कंपनी ईसीआईएल के नाम पर बनाया गया, लेकिन असली काम ई.सी.आई.एल. के पीछे काम कर रही एक निजी इकाई को दिया जाना था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह टेंडर मनमाना, भेदभावपूर्ण और समान अवसर (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन है।
दोनों मामलों में याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि क्यूआर कोड और सीसीटीवी परियोजनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच किसी प्रतिष्ठित एजेंसी जैसे ईवाई , पीडब्ल्यूसी या अन्य विश्वसनीय संस्था से कराई जाए
लगभग 10-12 साल पहले देश में सीसीटीवी और 2017 में क्यूआर कोड धीरे-धीरे विकसित होते हुये आज अधिकाधिक प्रयोग में हैं, इसलिए इस आधार पर टेंडर में रखी गई शर्तें सही नहीं मानी जा सकतीं। दोनों मामलों में याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि क्यूआर कोड और सीसीटीवी परियोजनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच किसी प्रतिष्ठित एजेंसी जैसे ईवाई , पीडब्ल्यूसी या अन्य विश्वसनीय संस्था से कराई जाए। विभागीय अधिकारियों ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि टेंडर पूरी तरह नियमों के अनुसार जारी किए गए थे। बावजूद इसके, लगातार बढ़ते विवादों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं और टेंडर पूरी तरह नियमों के अनुसार जारी किए गए हैं। हालांकि, इन विवादों ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

