एवीएस न्यूज..नई दिल्ली 
सीओपी 28 की शुरुआत ग्लोबल मल्टी-हिटधारक पहल इंडिपेंडेंट ट्रांजिशन एक्सेले रिटेलर (आईटीए) ने अपनी इंडिया इनसाइट्स ब्रीफिंग, अनलॉकिंग इंडियाज क्लीन इंडस्ट्रियलाइजेशन अपॉर्चुनिटी से की। रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट का उद्देश्य भारत के उच्च-उत्सर्जन वाले उद्योगों को डिकार्बोनाइज करने के लिए कार्रवाई को बढ़ावा देना है। इसी अवसर पर आईटीए ने आधिकारिक रूप से आईटीए इंडिया प्रोजेक्ट सपोर्ट प्रोग्राम की शुरुआत भी की। यह प्रोजेक्ट सपोर्ट प्रोग्राम भारत की प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं को निवेश के लिए तैयार करने में तेजी लाएगा और रसायन, इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम, विमानन तथा शिपिंग जैसे क्षेत्रों में स्वच्छ, कम-कार्बन विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के सहयोग से तैयार इस इंडिया इनसाइट्स ब्रीफिंग में उद्योग और वैश्विक सलाहकार विशेषज्ञों का अनुभव सम्मिलित किया गया है।

 भारत के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी लो और नियर-जीरो-एमिशन औद्योगिक परियोजनाओं की पाइपलाइन 
  रिपोर्ट के अनुसार चीन और अमेरिका के बाद भारत के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी लो- और नियर-जीरो-एमिशन औद्योगिक परियोजनाओं की पाइपलाइन है जो सतत औद्योगिक विकास में भारत की बढ़ती नेतृत्व भूमिका को दर्शाती है। हालांकि अब तक केवल छह परियोजनाएं फाइनल इंवेस्टमेंट डिसीजन चरण तक पहुंच पाई हैं। अनिश्चित स्वच्छ मांग, उच्च पूंजी लागत, प्रमुख बाजारों में नियामक जटिलताएं और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा जैसी संरचनात्मक चुनौतियां अंतिम निवेश निर्णय की दिशा में प्रगति को धीमा कर रही हैं। आईटीए का इंडिया प्रोजेक्ट सपोर्ट प्रोग्राम विभिन्न हितधारकों को साथ लाकर नीतियों, मांग और वित्त को एक दिशा में जोड़ने का प्रयास करता है, ताकि भारत की प्रमुख स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाओं की पहली खेप को निवेश के योग्य बनाया जा सके।
 

भारत की स्वच्छ औद्योगिक क्रांति के प्रमुख क्षेत्र और सेक्टर
भारत की 65 स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाएं मुख्य रूप से ओडिशा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में केंद्रित हैं। नवीकरणीय ऊर्जा की मजबूत उपलब्धता, बंदरगाहों तक बेहतर पहुंच और राज्य सरकारों की सहायक नीतियों के कारण ये क्षेत्र स्वच्छ अमोनिया, मेथनॉल और कम-कार्बन धातुओं के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।