रिटायरमेंट की तैयारी में पीछे छूट रहे भारतीय, जागरूकता है लेकिन कदम नहीं बढ़ रहे, समय रहते प्लानिंग जरूरी
एवीएस न्यूज. नई दिल्ली
भारत तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था, डिजिटल निवेश और वित्तीय जागरूकता के दौर से गुजर रहा है। आज का युवा और कामकाजी वर्ग म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, SIP, इंश्योरेंस और टैक्स सेविंग जैसे विषयों पर अच्छी समझ रखता है। लेकिन जब बात रिटायरमेंट प्लानिंग की आती है तो बड़ी संख्या में लोग अब भी इसे टाल रहे हैं। यही कारण है कि देश में जागरूकता बढ़ने के बावजूद रिटायरमेंट सुरक्षा को लेकर गंभीर अंतर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतर लोग रिटायरमेंट को बहुत दूर की जरूरत मानते हैं और वर्तमान खर्चों को प्राथमिकता देते हैं। नौकरी शुरू होते ही घर, वाहन, बच्चों की शिक्षा, लाइफस्टाइल और पारिवारिक जिम्मेदारियों में आय का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। नतीजा यह होता है कि भविष्य के लिए बचत की योजना कागजों तक सीमित रह जाती है।
भारतीय परिवारों में लंबे समय से यह सोच रही है कि बुढ़ापे में बच्चे सहारा बनेंगे। लेकिन बदलते सामाजिक ढांचे, न्यूक्लियर फैमिली, नौकरी के लिए दूसरे शहरों में पलायन और व्यस्त जीवनशैली ने इस व्यवस्था को काफी बदल दिया है। ऐसे में केवल पारिवारिक सहारे पर निर्भर रहना अब सुरक्षित विकल्प नहीं माना जा सकता।
इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी IRIS 5.0 के अनुसार देश का कुल रिटायरमेंट इंडेक्स स्कोर 46 तक पहुंचा है, जो जागरूकता में सुधार को दर्शाता है। हालांकि वित्तीय तैयारी का हिस्सा अब भी कमजोर बना हुआ है। इसका मतलब है कि लोग रिटायरमेंट की जरूरत समझ रहे हैं, लेकिन उतनी बचत नहीं कर रहे जितनी उन्हें भविष्य के लिए करनी चाहिए।
महंगाई इस चुनौती को और बड़ा बना रही है। यदि किसी परिवार का आज मासिक खर्च 50 हजार रुपये है, तो सामान्य महंगाई दर के हिसाब से यही खर्च 10 साल बाद करीब 89 हजार रुपये, 20 साल बाद 1 लाख 60 हजार रुपये और 30 साल बाद लगभग 2 लाख 87 हजार रुपये प्रति माह तक पहुंच सकता है। यानी आज जो जीवनशैली सामान्य है, उसे बनाए रखने के लिए भविष्य में कई गुना अधिक धन की जरूरत होगी।
विशेषज्ञ बताते हैं कि रिटायरमेंट केवल मासिक आय का विषय नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का आधार है। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य खर्च भी तेजी से बढ़ते हैं। अस्पताल, दवाइयां, जांच और लंबी अवधि की देखभाल जैसी जरूरतें आर्थिक दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में यदि पहले से तैयारी न हो तो बुजुर्ग अवस्था में व्यक्ति खुद को परिवार पर निर्भर महसूस कर सकता है।

