नीति में दूरसंचार की भूमिका महज एक वर्टिकल उद्योग के बजाय एक राष्ट्रीय प्रवर्तक की होनी चाहिए: डॉ. एसपी कोचर
दूरसंचार मंत्रालय ने अगले एक दशक में रखा जीडीपी में 20 फीसदी योगदान का लक्ष्य
एवीएस न्यूज. नई दिल्ली
दूरसंचार मंत्रालय द्वारा अगले दशक में जीडीपी में 20 प्रतिशत योगदान करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। दूरसंचार मंत्री का बयान सोची समझी संभावना पर आधारित हो सकता है। यह लक्ष्य हासिल होने योग्य है, इस पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। हालांकि इस लक्ष्य को समझने के लिए हमें दूरसंचार को अलग से देखना बंद करना होगा। यह बात कि सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. एसपी कोचर कही।

उन्होंने कहाकि कोविड के बाद दूरसंचार बुनियादी क्षैतिज मंच बन गया है जिस पर अर्थव्यवस्था का प्रत्येक अन्य क्षेत्र निर्भर है। एक मजबूत, अनूठा दूरसंचार आधार प्रत्यक्ष रूप से सभी उद्योगों की वृद्धि को गति देता है जिससे कुल जीडीपी बढ़ता है।
कोचर ने कहाकि राष्ट्रीय दूरसंचार नीति का मसौदा सही मायने में इस रणनीतिक दिशा की पहचान करता है। हम इन विशिष्टताओं को और बेहतर बनाने के लिए सरकार के साथ वार्ता में लगे हैं, लेकिन संपूर्ण विजन इस उद्योग की जरूरतों के अनुरूप होना आवश्यक है। इस नीति में दूरसंचार की भूमिका महज एक वर्टिकल उद्योग के बजाय एक राष्ट्रीय प्रवर्तक की होनी चाहिए।
6जी के उपयोग को महज टेक्नोलॉजी प्रचार से नहीं, बल्कि ठोस यूज केसेस से गति मिलेगी
उन्होनें कहाकि यह सही है कि 5जी यूज़ केसेस का मोनेटाइजेशन अभी तक उस स्तर पर नहीं पहुंचा है और यह विश्वव्यापी स्थिति है। 4जी से 5जी की तरफ जाना एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय छलांग थी, लेकिन यूज़ केसेस उतनी तेजी से नहीं बढ़े जितनी उम्मीद थी। हम अब सीखने के दौर में है। 5जी से 6जी की तरफ कदम कहीं अधिक अपग्रेड होगा जहां हम एआई, आईओटी के उदय से वाणिज्यिक तौर पर व्यवहारिक एप्लीकेशंस विकसित करने में हमारी सीख का उपयोग करेंगे और गैर स्थलीय नेटवर्क मूल रूप से अंतर्निहित होंगे। 6जी के उपयोग को महज टेक्नोलॉजी प्रचार से नहीं, बल्कि ठोस यूज केसेस से गति मिलेगी। हमें पूंजीगत खर्च की एक महत्वपूर्ण लहर के बजाय धीरे धीरे उत्प्रेरक आधारित निवेश चक्र देखने को मिलेगा।
भारत को मिड-बैंड स्पेक्ट्रम के 2 गीगाहर्ट्ज की जरूरत
5जी द्वारा 100 गुना तेज स्पीड का वादा पूरा करने के लिए यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि भारत को मिड-बैंड स्पेक्ट्रम के 2 गीगाहर्ट्ज की जरूरत है। वर्तमान में हमारे पास केवल 800 मेगाहर्ट्ज है। 6 गीगाहर्ट्ज बैंड में हमारे पास 1200 मेगाहर्ट्ज की कमी है। इस स्पेक्ट्रम के बगैर 5जी के लिए सेवा की गुणवत्ता से आने वाले समय में समझौता करना होगा। वाई-फाई उद्योग से प्रतिस्पर्धी दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हमारा मानना है कि मोबाइल टेलीफोनी के लिए यह मामला कहीं अधिक मजबूत है। वाई-फाई उद्योग के पास 2.4 गीगाहर्ट्ज और 5 गीगाहर्ट्ज बैंड में पहले से ही पर्याप्त, अनुपयोग एवं गैर लाइसेंस प्राप्त स्पेक्ट्रम है। इसके अलावा, वाई-फाई 6 और 7 स्पेक्ट्रम संशयवादी हैं, जबकि 5जी का निष्पादन सीधे तौर पर इस मिड-बैंड से जुड़ा है।
दूरसंचार विभाग के नए निर्देश के तहत संचार एप्स को उस सिम और मोबाइल नंबर से सतत रूप से जुड़े रहना आवश्यक है जिनका इस्तेमाल पंजीकरण के लिए किया गया था। इससे एक मजबूत, सत्यापित पहचान की परत का निर्माण होता है ताकि किसी भी गतिविधि का पता लगाने के लिए उसके असल यूज़र तक पहुंचा जा सके। इससे अपराधियों के लिए फर्जी एकाउंट या चोरीशुदा मोबाइल के पीछे छिपना बहुत मुश्किल हो जाता है। दूरसंचार ऑपरेटरों ने इस साल की शुरुआत में सरकार के समक्ष यह प्रस्ताव रखा था। वे इस पहल का पुरजोर समर्थन करते हैं और पहले से ही कॉल्स और एसएमएस पर स्पैम और धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए काम कर रहे हैं।

